राजस्थान के अजमेर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ACB राजस्थान ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। मामला वर्क ऑर्डर जारी करने के बदले रिश्वत मांगने से जुड़ा हुआ है। कॉन्ट्रैक्टर की शिकायत पर की गई इस कार्रवाई ने विभाग में हड़कंप मचा दिया है।
वर्क ऑर्डर जारी करने के बदले मांगे थे 2 लाख रुपये
घटना तब सामने आई जब एक ठेकेदार ने शिकायत दर्ज कराई कि अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधीक्षण अभियंता बाबूलाल ने पुराने वर्क ऑर्डर जारी करने के बदले उससे 2 लाख रुपये की मांग की है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसीबी ने प्राथमिक सत्यापन किया और रिश्वत की मांग सच पाए जाने पर सोमवार को जाल बिछाया गया। एसीबी ने अभियंता को उनके कार्यालय में 50 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान वर्क ऑर्डर से संबंधित फाइल भी जब्त कर ली गई। यह वर्क ऑर्डर नवंबर–दिसंबर 2025 अवधि से जुड़ा हुआ बताया गया है।
पहले भी लगाए गए थे आरोप, ठेकेदारों ने किया था विरोध
आरोपी सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर पर इससे पहले भी कई ठेकेदार आरोप लगा चुके थे। शिकायतों के अनुसार, ठेकेदारों को कार्य आवंटन में देरी कर परेशान किया जाता था और अलग-अलग बहाने बनाकर फाइलें रोकी जाती थीं। विरोध स्वरूप ठेकेदारों ने लगभग एक महीने तक काम का बहिष्कार भी किया था। इसके बाद मामले को हेडक्वार्टर स्तर पर भी उठाया गया, लेकिन पर्याप्त सबूतों के अभाव में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी थी।
इस संदर्भ में एसीबी अजमेर के जांच अधिकारी मीणा बेनीवाल ने बताया कि शिकायत के बाद पूरी प्रक्रिया का सत्यापन किया गया और प्रमाण मिलने पर ही ट्रैप लगाया गया। उन्होंने कहा कि आरोपी अधिकारी से मामले में विस्तृत पूछताछ की जा रही है।
प्रबंध निदेशक ने दी प्रतिक्रिया
घटना पर के.पी. वर्मा ने बताया कि उन्हें अधीक्षण अभियंता के रिश्वत लेते पकड़े जाने की सूचना मिल चुकी है। उन्होंने स्वीकार किया कि पहले भी ठेकेदारों ने परेशान करने के आरोप लगाए थे, लेकिन स्पष्ट सबूत न होने के कारण विभागीय कार्रवाई संभव नहीं हो सकी थी। उन्होंने कहा कि अब एसीबी की कार्रवाई के बाद आगे की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जाएगी।
एसीबी की इस कार्रवाई से विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ठेकेदारों ने उम्मीद जताई है कि इस कदम से भविष्य में पारदर्शिता बढ़ेगी और ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।


