जयपुर शहर में 16 फरवरी को शराब की 350 से अधिक दुकानें बंद रह सकती हैं। शराब कारोबारियों के संगठन राज लिकर वेलफेयर सोसायटी ने इसका ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि नई आबकारी नीति और प्रशासनिक दबाव के विरोध में यह कदम उठाया जा रहा है। इस फैसले के बाद शहरभर में शराब के ठेकों पर असर पड़ेगा और आम उपभोक्ताओं को भी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
नई आबकारी नीति को लेकर नाराजगी
सोसायटी के अध्यक्ष निलेश मेवाड़ा के मुताबिक सरकार की नई आबकारी नीति में शराब कारोबारियों के लिए बिक्री बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया है। यदि यह लक्ष्य पूरा नहीं होता है तो भारी पेनल्टी लगाने का प्रावधान रखा गया है। व्यापारियों का आरोप है कि एक तरफ बिक्री बढ़ाने का दबाव डाला जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बिक्री का समय नहीं बढ़ाया गया है। मौजूदा नियमों के तहत सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक ही शराब की बिक्री की अनुमति है। उनका कहना है कि सीमित समय में अधिक बिक्री का लक्ष्य पूरा करना व्यावहारिक नहीं है और इससे कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रशासन और पुलिस पर उत्पीड़न के आरोप
शराब कारोबारियों का यह भी आरोप है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर भी पुलिस और प्रशासन की ओर से अनावश्यक जांच और कार्रवाई की जा रही है। इससे ग्राहकों पर असर पड़ता है और बिक्री प्रभावित होती है। सोसायटी का कहना है कि नए-नए नियमों और सख्ती के कारण व्यापार करना मुश्किल हो गया है। कारोबारियों का मानना है कि यदि लक्ष्य तय किए गए हैं तो उसके अनुरूप सुविधाएं और समय भी दिया जाना चाहिए।
आबकारी आयुक्त को सौंपेंगे ज्ञापन
संगठन ने स्पष्ट किया है कि वे सोमवार को आबकारी आयुक्त को ज्ञापन सौंपेंगे और अपनी समस्याओं को विस्तार से रखेंगे। उनका कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेते हैं, तो दुकानें बंद रखने का यह निर्णय आगे भी जारी रह सकता है। फिलहाल 16 फरवरी को प्रस्तावित बंद के कारण जयपुर में 350 से अधिक शराब की दुकानें प्रभावित होंगी। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।


