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जयपुर–उदयपुर और उदयपुर–आगरा वंदे भारत एक्सप्रेस बंद, कम यात्री भार बना वजह

जयपुर–उदयपुर और उदयपुर–आगरा वंदे भारत एक्सप्रेस बंद, कम यात्री भार बना वजह

होली से ठीक पहले भारतीय रेलवे ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए वंदे भारत एक्सप्रेस की दो प्रमुख सेवाओं को बंद करने की घोषणा कर दी है। यह कदम पूरे राजस्थान और उत्तर भारत के यात्रियों के लिए अचानक आए बदलाव जैसा है, क्योंकि यह ट्रेन सितंबर 2023 में शुरू हुई थी और शुरुआती महीनों में इसे लेकर यात्रियों में खासा उत्साह देखा गया था। लेकिन पिछले कई महीनों से यात्री भार उम्मीद से काफी कम बना हुआ था, जिसके बाद रेलवे ने इसे बंद करने का अंतिम निर्णय लिया। रेलवे के अनुसार 14 फरवरी से उदयपुर–जयपुर रूट और 15 फरवरी से उदयपुर सिटी–आगरा रूट पर वंदे भारत का संचालन पूरी तरह रोक दिया जाएगा।

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब त्योहारों के कारण यात्रियों की आवाजाही बढ़ रही है, जिससे कई यात्री इसे असुविधाजनक मान रहे हैं। फिर भी रेलवे का कहना है कि पूरे साल औसत यात्री भार बहुत कम रहा, इसलिए सेवा को जारी रखना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं था।

शुरुआत में मिला उत्साह, बाद में कम होती गई मांग

सितंबर 2023 में जब इस प्रीमियम ट्रेन को राजस्थान के यात्रियों के लिए शुरू किया गया, तब इसे प्रदेश में तेज रफ्तार और आधुनिक यात्रा अनुभव का नया विकल्प माना गया था। शुरू में जयपुर, उदयपुर और आगरा के बीच चलने वाली इस सेमी-हाईस्पीड सेवा को लेकर यात्रा करने वालों में आकर्षण था। लेकिन कुछ ही महीनों में यात्रियों की संख्या स्थिर नहीं रही। सामान्य दिनों में सीटें खाली रहने लगीं और औसत बुकिंग उम्मीद से काफी नीचे चली गई।

रेलवे सूत्रों का कहना है कि इन दोनों रूटों पर औसत यात्री भार सिर्फ 50 से 60 प्रतिशत तक ही पहुंच पाता था, जो संचालन लागत के मुकाबले काफी कम है। त्योहारों और छुट्टियों के दौरान यह संख्या 80 प्रतिशत के करीब पहुंची जरूर, लेकिन पूरे वर्ष की दृष्टि से यह पैटर्न स्थायी नहीं माना जा सकता था। ऐसे में मंत्रालय ने आंकड़ों के आधार पर यह तय किया कि इन दोनों रूटों पर सेवा जारी रखना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

फेरों में कटौती के बाद भी नहीं मिली सफलता

कम यात्री संख्या को देखते हुए रेलवे ने पहले भी संशोधन किए थे। शुरुआत में यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलती थी, लेकिन बाद में इसे तीन दिन जयपुर–उदयपुर और तीन दिन उदयपुर–आगरा के बीच सीमित कर दिया गया। इस बदलाव का उद्देश्य यात्री भार और संचालन लागत के बीच संतुलन बनाना था, लेकिन आंकड़ों में खास सुधार नहीं हुआ।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि टिकट दर, यात्रा समय और रूट की मांग जैसे कारकों ने इस सेवा को लाभकारी बनने से रोका। तालमेल न बन पाने के कारण अंततः रेलवे ने इसे बंद करने का निर्णय लिया। यह फैसला प्रशासनिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से आवश्यक बताया गया है।

अब वंदे भारत रैक का नया उपयोग: उदयपुर सिटी–असारवा रूट पर संचालन

सेवा बंद करने के साथ रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि वंदे भारत का मौजूदा रैक अब पूरी तरह से एक नए रूट पर स्थानांतरित किया जाएगा। यह रूट उदयपुर सिटी से गुजरात के असारवा तक तय किया गया है। असारवा, अहमदाबाद के पास स्थित एक प्रमुख उपनगरीय स्टेशन है, और यह रूट क्षेत्रीय यात्रियों के लिए एक नया तेज विकल्प प्रदान करेगा।

नई समय-सारणी के अनुसार ट्रेन सुबह 6:10 बजे उदयपुर सिटी से रवाना होगी और 10:25 बजे असारवा पहुंचेगी। वापसी की यात्रा शाम 5:45 बजे असारवा से शुरू होकर रात 10 बजे तक उदयपुर सिटी पहुंचेगी। इस रूट पर संचालन सप्ताह में छह दिन होगा, जबकि एक दिन नियमित रखरखाव के लिए निर्धारित रहेगा। रेलवे का मानना है कि यह रूट यात्रियों की वास्तविक आवश्यकताओं के अधिक अनुकूल है और यहां यात्री भार बेहतर रहने की संभावना है।

यात्रियों में निराशा, त्योहारों से पहले बढ़ी परेशानी

जो यात्री जयपुर, उदयपुर और आगरा के बीच तेजी से यात्रा करना चाहते थे, उनके लिए वंदे भारत सबसे सुविधाजनक विकल्पों में से एक था। कई यात्री तब इस ट्रेन का सहारा लेते थे जब अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों में कंफर्म सीटें मिलना मुश्किल होता था। ऐसे में अचानक से सेवाएं बंद होने की घोषणा ने निश्चित रूप से यात्रा करने वालों के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं। खासकर होली जैसे बड़े त्योहार से ठीक पहले यह निर्णय कई परिवारों और दैनिक यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। हालांकि रेलवे का कहना है कि अन्य पारंपरिक ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाने और विशेष ट्रेनों का संचालन करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।

वंदे भारत के भविष्य पर चर्चा जारी

इस फैसले ने एक नई बहस को भी जन्म दिया है कि क्या वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम सेवाओं को हर रूट पर शुरू करना व्यावहारिक है या नहीं। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की हाई-एंड ट्रेनें उन्हीं मार्गों पर अधिक सफल होती हैं, जहां दैनिक यात्रियों की संख्या लगातार अधिक रहती है। राजस्थान के आंतरिक रूटों पर ऐसे आंकड़े स्थिर नहीं पाए गए, जिससे सेवा को बंद करना पड़ा। रेलवे की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वंदे भारत जैसी सेवाओं के लिए रूट चयन बेहद संवेदनशील प्रक्रिया है और भविष्य में इस मॉडल को और बेहतर तरीके से लागू किया जाएगा।

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