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राजस्थान बजट 2026: घोषणाओं के क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव के सख्त निर्देश

राजस्थान बजट 2026: घोषणाओं के क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव के सख्त निर्देश

राजस्थान में भजनलाल सरकार ने 11 फरवरी को अपने कार्यकाल का तीसरा बजट पेश किया है। वित्त मंत्री दीया कुमारी द्वारा की गई घोषणाओं के बाद अब सरकार उन्हें धरातल पर उतारने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। बजट के तुरंत बाद मुख्य सचिव वी. श्रीनिवासन ने सभी संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। मुख्य सचिव ने सभी अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव और शासन सचिवों को पत्र लिखकर बजट इम्प्लीमेंटेशन के लिए ठोस प्रस्ताव तैयार करने के आदेश दिए हैं।

15 दिन में प्रस्ताव भेजने के निर्देश

मुख्य सचिव द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि बजट घोषणाओं को लागू करने के लिए संबंधित विभाग अपने-अपने स्तर पर प्रस्ताव तैयार करें और निर्धारित समयसीमा में भेजें। जिन मामलों में केवल प्रशासनिक आदेश की आवश्यकता है, वहां प्रक्रिया को और सरल करते हुए जल्द से जल्द निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं। सीएस ने स्पष्ट किया है कि बजट घोषणाओं को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें समयबद्ध तरीके से लागू किया जाना सरकार की प्राथमिकता है।

बजट घोषणाओं को तीन श्रेणियों में बांटा

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवासन ने अपने निर्देशों में बजट घोषणाओं को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया तय की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर प्रकार की घोषणा के लिए अलग-अलग स्तर पर स्पष्ट जिम्मेदारी तय हो और अनावश्यक देरी न हो।

पहली श्रेणी: बिना वित्तीय भार वाले प्रकरण

पहली श्रेणी में वे घोषणाएं रखी गई हैं, जिनमें किसी प्रकार का वित्तीय भार नहीं है। ऐसे मामलों में केवल प्रशासनिक स्तर पर प्रस्ताव बनाकर आदेश जारी करने की आवश्यकता होगी। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि इस श्रेणी की घोषणाओं के प्रस्ताव जल्द से जल्द तैयार कर भेजे जाएं, ताकि उन्हें तुरंत लागू किया जा सके। सरकार का मानना है कि जिन योजनाओं में बजट का अतिरिक्त भार नहीं पड़ता, उन्हें तेजी से लागू कर आम जनता को जल्द राहत दी जा सकती है।

दूसरी श्रेणी: बिना वित्तीय भार लेकिन विभागीय मंजूरी जरूरी

दूसरी श्रेणी में वे घोषणाएं शामिल हैं, जिनमें सीधे तौर पर कोई वित्तीय भार नहीं है, लेकिन उन्हें लागू करने के लिए कार्मिक विभाग (DOP) या वित्त विभाग की स्वीकृति आवश्यक है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी प्रकरणों के प्रस्ताव भी 15 दिन के भीतर तैयार कर संबंधित विभागों को भेज दिए जाएं। इस श्रेणी के मामलों में प्रक्रिया को तेज करने के लिए विभागों के बीच समन्वय पर भी जोर दिया गया है।

तीसरी श्रेणी: वित्तीय और तकनीकी स्वीकृति वाले प्रकरण

तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण श्रेणी में वे घोषणाएं रखी गई हैं, जिनमें सरकार पर वित्तीय भार पड़ेगा और जिनके लिए वित्तीय तथा तकनीकी स्वीकृति की आवश्यकता होगी। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी प्रस्ताव 25 फरवरी तक तैयार कर वित्त विभाग, मुख्यमंत्री कार्यालय और मुख्य सचिव कार्यालय में भेजे जाएं। इसका उद्देश्य यह है कि उच्च स्तर पर आवश्यक स्वीकृतियां समय रहते मिल सकें और बजट घोषणाओं को लागू करने में अनावश्यक विलंब न हो।

प्रशासनिक सक्रियता का संकेत

मुख्य सचिव के इन निर्देशों से साफ है कि राज्य सरकार बजट घोषणाओं को लेकर गंभीर है और उन्हें जमीन पर उतारने के लिए प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय किया जा चुका है। बजट इम्प्लीमेंटेशन को लेकर तय की गई समयसीमा यह संकेत देती है कि सरकार योजनाओं को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखना चाहती।

जनता की उम्मीदें और आगे की राह

बजट के बाद अब आम जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि घोषणाएं कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से लागू होती हैं। मुख्य सचिव के निर्देशों से यह उम्मीद बढ़ी है कि बजट 2026 की योजनाएं समय पर शुरू होंगी और उनका लाभ लोगों तक पहुंचेगा।

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