राजस्थान विधानसभा में बुधवार को वित्त मंत्री द्वारा बजट पेश किए जाने के बाद राज्य की राजनीति अचानक गर्मा गई। सदन के भीतर बजट बहस ने जहां सरकार और विपक्ष को आमने-सामने ला दिया था, वहीं अगले ही दिन विधानसभा के बाहर माहौल और ज्यादा सियासी रंग लेता दिखा। कांग्रेस व भाजपा के विधायकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तीखी नोकझोंक ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी।
रफीक खान का आरोप: जयपुर को मिला निराशाजनक बजट
कांग्रेस विधायक रफीक खान ने जयपुर को लेकर सीधा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि जयपुर से भाजपा के बड़े चेहरे जीतकर विधानसभा पहुंचे, लेकिन राजधानी को बजट में कोई बड़ा लाभ नहीं मिला। रफीक खान के अनुसार:
जयपुर को बड़े प्रोजेक्ट्स की उम्मीद थी।
बजट में मेट्रो विस्तार या किसी प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर योजना का जिक्र नहीं है।
सरकार ने शहर की आवश्यकताओं पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने लंबा बजट भाषण तो दिया, लेकिन उसमें राजधानी के विकास के लिए कोई ठोस दृष्टि दिखाई नहीं दी।
कर्ज को लेकर सरकार पर निशाना
रफीक खान ने राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
बजट में दिशा का अभाव है।
राज्य लगातार कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है।
सरकार वित्तीय प्रबंधन को मजबूत बताती है, जबकि आंकड़े उल्टा संकेत देते हैं। खान के बयान से साफ था कि कांग्रेस बजट को लेकर सरकार की आर्थिक रणनीति पर गंभीर सवाल उठा रही है।
जेठानंद व्यास का पलटवार: गहलोत पर लगाया जोधपुर केंद्रित बजट का आरोप
कांग्रेस विधायक के आरोपों पर भाजपा विधायक जेठानंद व्यास तीखे होते दिखे। उन्होंने कहा कि:
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर हमेशा जोधपुर-केंद्रित बजट का आरोप लगता रहा है।
मौजूदा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पूरे प्रदेश के संतुलित विकास पर ध्यान दे रहे हैं। व्यास ने तंज भरे अंदाज में कहा कि कांग्रेस की आलोचना तथ्यहीन है क्योंकि इस बार का बजट किसी एक शहर को नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है।
हवामहल से विधायक बालमुकुंद आचार्य भी बोले
जोधपुर का मुद्दा उठते ही हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य भी प्रतिक्रिया देने से खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने कहा कि:
कांग्रेस सरकार के दावे खोखले थे।
जोधपुर को भी पिछले पांच वर्षों में अपेक्षित विकास नहीं मिला।
पूर्व सरकार अपनी ही प्राथमिकताओं को पूरा करने में नाकाम रही। आचार्य के अनुसार वर्तमान सरकार विकास के प्रति वास्तविक रूप से समर्पित है और बजट इसका प्रमाण है।
मनरेगा और बेरोजगारी पर कांग्रेस का सवाल
रफीक खान ने अंत में दो अहम मुद्दों पर सरकार को घेरा—मनरेगा और बेरोजगारी। उन्होंने दावा किया कि:
राज्य में एक करोड़ से अधिक बेरोजगार हैं।
बजट में उनके लिए ठोस रोजगार योजना शामिल नहीं है।
कांग्रेस कभी भी मनरेगा को कमजोर नहीं होने देगी, क्योंकि यह ग्रामीण रोजगार की रीढ़ है। रफीक खान ने कहा कि सरकार ने युवाओं को अवसर देने के बजाय आश्वासन दिए हैं, जिनका कोई स्पष्ट रोडमैप दिखाई नहीं देता।
बजट से शुरू हुआ विवाद, अब बनेगा बड़ा राजनीतिक मुद्दा?
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच यह नोकझोंक केवल बजट प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं दिखती। दोनों दलों के नेताओं ने जिस तरह के बयान दिए हैं, उससे साफ है कि इस बजट को आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया जाएगा।
कांग्रेस बजट को कमजोर और महत्वहीन बताकर सरकार घेरने की कोशिश में है।
भाजपा इसे समग्र विकास का दस्तावेज बताते हुए विपक्ष पर तथ्यहीन राजनीति का आरोप लगा रही है। ऐसे में राजस्थान की सियासत में बजट बहस आने वाले कुछ दिनों तक गरम रहने की संभावना है।


