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किचन के पास WiFi स्लो क्यों हो जाता है? माइक्रोवेव और राउटर के बीच छिपा है पूरा साइंस

किचन के पास WiFi स्लो क्यों हो जाता है? माइक्रोवेव और राउटर के बीच छिपा है पूरा साइंस

अक्सर ऐसा होता है कि आप घर में मोबाइल पर वीडियो देखते हुए घूम रहे हों, लेकिन जैसे ही किचन के पास पहुंचते हैं—वीडियो अटकने लगता है। कई बार नेटवर्क पूरी तरह गिर भी जाता है और वाईफाई अचानक स्लो हो जाता है। कई लोग इसे इंटरनेट प्लान या राउटर की खराबी समझते हैं, लेकिन असली वजह अक्सर कुछ और होती है—आपके किचन का माइक्रोवेव ओवन। सवाल उठता है कि आखिर एक माइक्रोवेव ओवन वीडियो क्यों बफर करवा सकता है? इसका जवाब इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स और रेडियो फ्रीक्वेंसी में छिपा है।

कैसे माइक्रोवेव कमजोर करता है WiFi कनेक्शन?

बहुत से लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि माइक्रोवेव और वाईफाई राउटर दोनों एक ही फ्रीक्वेंसी बैंड का उपयोग करते हैं। यही वजह है कि जब माइक्रोवेव चलता है, तो वाईफाई सिग्नल कमजोर हो जाते हैं और वीडियो स्ट्रीमिंग रुकने लगती है।

1. माइक्रोवेव की फ्रीक्वेंसी — 2.45 GHz

माइक्रोवेव ओवन 2.45 GHz की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्ज छोड़ता है। इसी फ्रीक्वेंसी पर पानी के अणु कंपन करते हैं और खाना गर्म होता है।

2. वाईफाई राउटर की फ्रीक्वेंसी — 2.4 GHz

अधिकतर घरों में इस्तेमाल होने वाला वाईफाई भी 2.4 GHz बैंड पर चलता है। यानी दोनों लगभग एक ही बैंड पर सिग्नल ट्रांसमिट करते हैं। यही वजह है कि जब माइक्रोवेव ऑन होता है, तो उसके सिग्नल राउटर के सिग्नल में दखल देने लगते हैं।

3. सिग्नल ओवरलैप — इंटरफेरेंस की समस्या

जब दो सिग्नल एक ही फ्रीक्वेंसी रेंज में चलते हैं, तो वे एक दूसरे को ओवरलैप करते हैं। इससे राउटर के सिग्नल कमजोर पड़ते हैं और इंटरनेट स्लो लगने लगता है। इसे ही माइक्रोवेव इंटरफेरेंस कहा जाता है।

वाईफाई पर सिर्फ राउटर का नहीं, पावर का असर भी पड़ता है

कई लोग सोचते हैं कि अगर राउटर और माइक्रोवेव एक ही फ्रीक्वेंसी पर हैं तो राउटर माइक्रोवेव पर असर क्यों नहीं डालता? इसका जवाब है—पावर लेवल।

1. माइक्रोवेव = लगभग 1000 वॉट पावर

माइक्रोवेव लगभग 1000 वॉट के आसपास इनर्जी छोड़ता है। यह बहुत ही ज्यादा पावर है।

2. वाईफाई राउटर = लगभग 0.1 वॉट पावर (100 mW)

राउटर बहुत कम पावर का सिग्नल छोड़ता है। इस तरह माइक्रोवेव के सामने राउटर के सिग्नल बहुत कमजोर होते हैं। माइक्रोवेव की रेडिएशन कम पावर वाले वाईफाई सिग्नल को “डूबा” देती है, जिससे कनेक्शन अटकने लगता है।

किन परिस्थितियों में ज्यादा समस्या होती है?

वाईफाई और माइक्रोवेव के टकराव से समस्या हर बार नहीं होती। यह कुछ विशेष परिस्थितियों में बढ़ जाती है:

  • माइक्रोवेव और राउटर बहुत पास हों

  • माइक्रोवेव का दरवाजा ठीक से बंद न हो

  • डोर सील या हिंज ढीली या खराब हो

  • राउटर 2.4 GHz बैंड पर चल रहा हो

  • घर में मोटी दीवारें सिग्नल को पहले से कमजोर कर रही हों

ऐसे हालत में माइक्रोवेव ऑन होते ही वीडियो बफर होने लगता है या इंटरनेट स्पीड गिर जाती है।

इस समस्या से कैसे बचा जा सकता है?

अगर आपके घर में माइक्रोवेव के चलते वाईफाई कमजोर हो जाता है, तो कुछ आसान उपाय अपनाकर समस्या को काफी कम किया जा सकता है।

1. राउटर को माइक्रोवेव से दूर रखें

राउटर को किचन से दूर किसी ओपन जगह पर रखें। कम से कम 5–7 मीटर की दूरी बनाए रखना बेहतर है।

2. 5 GHz वाईफाई बैंड पर स्विच करें

आजकल बाजार में डुअल-बैंड राउटर मिलते हैं, जो 2.4 GHz के साथ 5 GHz बैंड भी सपोर्ट करते हैं। 5 GHz माइक्रोवेव की फ्रीक्वेंसी से प्रभावित नहीं होता।

3. माइक्रोवेव का दरवाजा ठीक से बंद रखें

अगर इसकी सील या हिंज टूटी है तो रेडिएशन लीक होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में

  • सील बदलवाएं

  • दरवाजा टाइट करवाएं

  • माइक्रोवेव का सही रखरखाव करें

4. वाईफाई चैनल बदलें

कई बार 2.4 GHz बैंड पर भी राउटर एक अलग चैनल पर सेट होकर इंटरफेरेंस कम कर सकता है। राउटर सेटिंग्स में जाकर चैनल बदलना आसान होता है।

5. माइक्रोवेव इस्तेमाल के दौरान हाई-बैंडविड्थ काम न करें

अगर स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन क्लास या गेमिंग चल रही है, तो उसे माइक्रोवेव चालू होने से पहले रोक दें। यह व्यावहारिक उपाय है।

क्या माइक्रोवेव की रेडिएशन खतरनाक होती है?

माइक्रोवेव ओवन सुरक्षित बनाए जाते हैं और इनकी रेडिएशन बाहर लीक न हो, इसकी खास व्यवस्था होती है। जब तक डोर सील सही है और मशीन ठीक से बंद होती है—यह सुरक्षित है। समस्या सिर्फ वाईफाई इंटरफेरेंस की है, स्वास्थ्य जोखिम की नहीं।

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