राजस्थान की राजधानी जयपुर एक बार फिर मेडिकल साइंस के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने जा रहा है। इंडियन सोसायटी ऑफ रिकंस्ट्रेक्टिव माइक्रोसर्जरी (ISRM) की नेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन 12 फरवरी से जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी), झालाना में किया जाएगा। यह तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस 12 से 15 फरवरी तक चलेगी, जिसमें देश और विदेश से करीब 250 वरिष्ठ प्लास्टिक और कॉस्मेटिक सर्जन हिस्सा लेंगे।
इस कॉन्फ्रेंस में कटी हुई जीभ, हाथ-पांव, चेहरे के गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हिस्सों की रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी की आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजन न केवल चिकित्सा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देते हैं, बल्कि जटिल सर्जरी के बेहतर परिणामों का रास्ता भी खोलते हैं।
लेटेस्ट तकनीक और भविष्य की सर्जरी पर फोकस
कॉन्फ्रेंस के दौरान वर्तमान में प्रचलित प्लास्टिक और कॉस्मेटिक सर्जरी की नवीनतम तकनीकों के साथ-साथ भविष्य में होने वाले संभावित बदलावों पर भी मंथन किया जाएगा। विशेषज्ञ डॉक्टर माइक्रो लेवल पर की जाने वाली सर्जरी, अत्याधुनिक उपकरणों और नए ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल पर अपने विचार साझा करेंगे।
इस दौरान यह भी चर्चा होगी कि किस तरह माइक्रोसर्जरी के जरिए दुर्घटनाओं, कैंसर या जन्मजात विकृतियों के कारण खराब हुए अंगों को फिर से कार्यशील बनाया जा सकता है। आधुनिक तकनीकों के माध्यम से मरीजों की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
देश-विदेश के विशेषज्ञ करेंगे शिरकत
ISRM के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. जी.एस. कालरा और सचिव डॉ. आर.के. जैन ने बताया कि इस तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, स्पेन, फ्रांस सहित कई देशों से नामी विशेषज्ञ शामिल होंगे। विदेशी विशेषज्ञ अपने अनुभव और रिसर्च साझा करेंगे, जिससे भारतीय सर्जनों को वैश्विक स्तर की तकनीकों और मानकों को समझने का अवसर मिलेगा। यह कॉन्फ्रेंस इंटरनेशनल मेडिकल कोलैबोरेशन को भी मजबूत करेगी।
लिम्ब साल्वेज सर्जरी पर विशेष चर्चा
कॉन्फ्रेंस का एक अहम विषय लिम्ब साल्वेज सर्जरी रहेगा। यह तकनीक उन मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिनके हाथ या पैर गंभीर दुर्घटना या कैंसर के कारण कटने की स्थिति में पहुंच जाते हैं। विशेषज्ञ बताएंगे कि किस तरह आधुनिक माइक्रोसर्जरी तकनीकों से अंगों को बचाया जा सकता है और मरीज को सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद मिल सकती है। यह विषय न केवल चिकित्सकीय दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद अहम है।
पैनल डिस्कशन और सर्जिकल डेमोस्ट्रेशन
तीन दिन चलने वाले इस आयोजन में केवल लेक्चर ही नहीं होंगे, बल्कि पैनल डिस्कशन, स्पीच सेशन और लाइव सर्जिकल डेमोस्ट्रेशन भी आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों के माध्यम से डॉक्टर अपने वास्तविक केस स्टडी, रिसर्च और क्लिनिकल अनुभव साझा करेंगे। युवा सर्जनों और मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए यह सीखने का एक बड़ा मंच होगा, जहां वे विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछ सकेंगे।
कैंसर और दुर्घटनाओं के बाद रिकंस्ट्रक्शन पर जोर
कॉन्फ्रेंस में कैंसर सर्जरी के बाद चेहरे, जबड़े, जीभ और अन्य अंगों की रिकंस्ट्रक्शन पर भी विशेष चर्चा होगी। इसके अलावा सड़क दुर्घटनाओं में क्षतिग्रस्त हुए अंगों के पुनर्निर्माण के नए तरीकों पर भी विस्तार से विचार किया जाएगा। डॉक्टर यह भी बताएंगे कि किस तरह समय पर और सही तकनीक से की गई सर्जरी मरीज की जिंदगी को पूरी तरह बदल सकती है।
राजस्थान को मेडिकल टूरिज्म में नई पहचान दिलाने का प्रयास
डॉ. आर.के. जैन ने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस के आयोजन का एक बड़ा उद्देश्य राजस्थान को मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में नई पहचान दिलाना है। जयपुर पहले से ही पर्यटन के लिए जाना जाता है, लेकिन अब इसे अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं के केंद्र के रूप में भी स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर के डॉक्टरों की मौजूदगी और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों पर चर्चा से यह संदेश जाएगा कि राजस्थान में भी विश्वस्तरीय इलाज उपलब्ध है।
चिकित्सा क्षेत्र के लिए अहम आयोजन
कुल मिलाकर ISRM की यह नेशनल कॉन्फ्रेंस न केवल प्लास्टिक और रिकंस्ट्रेक्टिव माइक्रोसर्जरी के क्षेत्र में नई दिशा तय करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक मेडिकल मैप पर और मजबूत करेगी। जयपुर में होने वाला यह आयोजन चिकित्सा विज्ञान, शोध और मेडिकल टूरिज्म तीनों के लिए एक अहम पड़ाव साबित होने की उम्मीद है।


