जयपुर स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA) के स्वर्ण जयंती समारोह में एक ओर आयुर्वेद की उपलब्धियों का उत्सव मनाया गया, वहीं दूसरी ओर मंच से उठी एक सख्त और बेबाक आवाज ने सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में चल रही अनियमितताओं का खुलकर उल्लेख किया। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव भी मंच पर मौजूद थे, जिनके सामने मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद के महत्व के साथ-साथ योजनाओं की पवित्रता को बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
आयुर्वेद की पवित्रता पर CM का ध्यान, स्वास्थ्य योजनाओं में सख्ती का संकेत
कार्यक्रम में संबोधन देते हुए मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद को “जीवन जीने की कला” बताया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद सिर्फ उपचार नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन शैली है। लेकिन साथ ही उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि कुछ लोग आयुर्वेद और सरकारी योजनाओं के नाम पर ऐसी गतिविधियाँ कर रहे हैं, जो न तो चिकित्सा विज्ञान के अनुरूप हैं और न ही सामाजिक रूप से उचित। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी योजनाओं का मकसद सिर्फ और सिर्फ पात्र व्यक्तियों तक लाभ पहुँचाना है। यदि कोई व्यक्ति इस व्यवस्था का गलत लाभ उठा रहा है, तो यह न केवल योजना की आत्मा के खिलाफ है, बल्कि उन लोगों के साथ अन्याय भी है जिन्हें वास्तव में उपचार की आवश्यकता है।
75 डिब्बे च्यवनप्राश और फर्जी पंचकर्म का मामला चर्चा में
कार्यक्रम के दौरान दिया गया मुख्यमंत्री का बयान पूरे प्रशासनिक तंत्र और आमजन में चर्चा का विषय बन गया है। मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि RGHS का दुरुपयोग किस स्तर तक हो रहा है यह इसी बात से समझा जा सकता है कि “कोई एक व्यक्ति 75 डिब्बे च्यवनप्राश ले जा रहा है, तो 25 साल की उम्र का युवक साल में 3-4 बार पंचकर्म करा रहा है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि पंचकर्म जैसी चिकित्सा पद्धति जरूरत के आधार पर उपयोग की जाती है, और इसकी overuse न केवल क्लिनिकल रूप से अनुचित है बल्कि योजनाओं का सीधा दुरुपयोग भी है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी गतिविधियों में शामिल कार्मिकों की पहचान की जा रही है और सरकार ऐसे मामलों में ठोस कार्रवाई करेगी।
आयुर्वेद चिकित्सकों को भी दी जिम्मेदारी
समारोह में मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद चिकित्सकों से विशेष अपील की कि वे अपनी जिम्मेदारी समझें और किसी भी प्रकार की गलत प्रवृत्ति को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएँ। उन्होंने कहा कि उपचार और दवाओं का निर्धारण रोगी की वास्तविक स्थिति को देखकर किया जाना चाहिए। यदि चिकित्सक ही बिना चिकित्सीय आधार के दवाएं या प्रक्रियाएं लिख देंगे तो यह आयुर्वेद की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है। CM ने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं की निगरानी में चिकित्सकों की भूमिका महत्वपूर्ण है और इसलिए हर चिकित्सक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उपचार वास्तविक आवश्यकता पर आधारित हो।
NIA के 50 वर्षों की यात्रा पर गर्व, लेकिन भविष्य के लिए सतर्कता आवश्यक
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य था राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के 50 वर्षों की उपलब्धियों का जश्न मनाना। मुख्यमंत्री ने संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि NIA ने देश और दुनिया में आयुर्वेद को नई पहचान दिलाई है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर लोगों तक पहुंचाने की दिशा में सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब आयुर्वेद और स्वास्थ्य सेवाओं की मांग बढ़ रही है, तो योजनाओं के दुरुपयोग को रोकना उतना ही जरूरी हो जाता है। योजनाएँ तभी सफल होंगी जब उनका लाभ सही व्यक्ति तक पहुँचे।
सरकार सख्त, अनियमितताओं पर होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री के भाषण से स्पष्ट संकेत मिला कि सरकार RGHS में चल रही गड़बड़ियों को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर नए कदम उठाए जा रहे हैं। अनियमितताओं में शामिल व्यक्तियों, अस्पतालों या चिकित्सकों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। यह भी उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर व्यापक चर्चा चल रही है।


