अजमेर के ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में प्राचीन शिव मंदिर होने के दावे ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। यह मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है, लेकिन इसी बीच याचिकाकर्ता की ओर से प्रशासन को नया ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें कई महत्वपूर्ण मांगें दोहराई गई हैं। याचिकाकर्ता वकील एपी सिंह ने जिला कलेक्टर लोक बंधु और पुलिस अधीक्षक वंदिता राणा से दरगाह परिसर की मौजूदा स्थिति को सुरक्षित रखने के लिए पूरी वीडियोग्राफी करवाने तथा किसी भी प्रकार के निर्माण या बदलाव की गतिविधि पर तत्काल रोक लगाने की अपील की है।
पूरी दरगाह परिसर की वीडियोग्राफी करवाने की मांग
दायर ज्ञापन में कहा गया है कि जब मामला अदालत में लंबित है, ऐसे में परिसर की वर्तमान स्थिति का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना आवश्यक है ताकि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार के विवाद या साक्ष्यों में भ्रम की स्थिति न बने। एपी सिंह का कहना है कि दरगाह परिसर में रोजाना गतिविधियाँ होती हैं, इसलिए बिना निगरानी और रिकॉर्ड के कई महत्वपूर्ण संरचनात्मक तत्व बदल सकते हैं। इसलिए मांग की गई है कि प्रशासन या किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा संपूर्ण परिसर की उच्च गुणवत्ता की वीडियोग्राफी कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी भी दावे या प्रतिदावे की स्थिति में तथ्यात्मक सामग्री उपलब्ध रहे।
निर्माण, खुदाई, ड्रिलिंग और पेंटिंग पर रोक की अपील
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि दरगाह कमेटी से जुड़े कुछ कथित लोगों द्वारा परिसर में खुदाई, ड्रिलिंग, पेंटिंग और अन्य निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। उनका दावा है कि ये गतिविधियाँ संभावित ऐतिहासिक या पुरातात्विक निशानों को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे मामले की जांच पर असर पड़ सकता है।
इसी आधार पर ज्ञापन में प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि किसी भी तरह के निर्माण या बदलाव को तुरंत रोका जाए और पूरे परिसर में यथास्थिति बनाए रखी जाए। एपी सिंह का कहना है कि यह सिर्फ एक धार्मिक विवाद नहीं, बल्कि ऐसे दावों के सत्यापन में संरचनात्मक साक्ष्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि परिसर में कोई बदलाव होता है, तो यह साक्ष्यों को कमजोर कर सकता है। इसलिए प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप जरूरी है।
पुरातत्व विभाग की निगरानी का हवाला
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि देश के कई हिस्सों में धार्मिक या ऐतिहासिक दावों से जुड़े मामलों में पुरातत्व विभाग (ASI) द्वारा सर्वे और निरीक्षण कराए गए हैं याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसे मामलों में पुरातात्विक तथ्यों का संरक्षण प्राथमिकता होनी चाहिए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि किसी स्थान को लेकर ऐतिहासिक दावे होते हैं, तो वहां किसी भी तरह के निर्माण या क्षति रोककर वैज्ञानिक सर्वेक्षण करवाना चाहिए। इसलिए उन्होंने आग्रह किया कि दरगाह परिसर में भी ऐसी प्रक्रिया अपनाई जाए, ताकि विवाद का समाधान प्रमाणों के आधार पर हो सके।
निष्पक्ष जांच और सुरक्षा व्यवस्था की मांग
ज्ञापन में प्रशासन से यह भी अनुरोध किया गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए तथा परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि विवाद के बढ़ते स्वरूप को देखते हुए किसी भी संभावित तनाव, अफवाह या अनाधिकृत गतिविधि को रोकने के लिए सुरक्षात्मक कदम बेहद जरूरी हैं।
कोर्ट में विचाराधीन है पूरा मामला
यह मामला तब शुरू हुआ जब महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार की ओर से अजमेर कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका में दावा किया गया है कि दरगाह परिसर के भीतर एक प्राचीन शिव मंदिर मौजूद है, जिसके ऐतिहासिक और धार्मिक तथ्यों की न्यायिक जांच की मांग की गई है।
अदालत ने इस मामले पर सुनवाई शुरू कर दी है और यह फिलहाल विचाराधीन है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के साथ-साथ प्रशासन से भी लगातार यह मांग उठाई जा रही है कि विवादित स्थल की मौजूदा स्थिति को छेड़छाड़ से बचाया जाए और किसी भी प्रकार का भौतिक परिवर्तन रोका जाए।


