राजस्थान का श्रीगंगानगर जिला अपनी उच्च गुणवत्ता वाले किन्नू उत्पादन के लिए देशभर में पहचाना जाता है। यहां की जलवायु और मिट्टी इस फसल को उत्कृष्ट स्वाद और बनावट प्रदान करती है। किन्नू को जिले की पहचान के रूप में भी माना जाता है। ऐसे में किन्नू उत्पादक किसानों के लिए यह बड़ी खुशखबरी है कि सरकार ने श्रीगंगानगर में आधुनिक किन्नू प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की मंजूरी दे दी है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी योजना के अंतर्गत इस प्लांट के लिए 5 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसकी स्थापना की जिम्मेदारी उद्यान विभाग को दी गई है। विभाग ने मंजूरी मिलने के बाद प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस निर्णय से किसानों, स्थानीय उद्योगों और जिले की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।
‘अपनी उपज, अपना उद्योग’ अभियान का असर किन्नू प्रसंस्करण उद्योगों को मिला प्रोत्साहन
किन्नू प्रसंस्करण उद्योगों की कमी के कारण किसानों की उपज का पूरा उपयोग नहीं हो पाता। रिपोर्टों में बताया गया कि
बी और सी ग्रेड किन्नू की बिक्री में किसानों को बड़ी समस्या आती है,
प्रसंस्करण उद्योग होने पर इन ग्रेडों की भी मांग बनेगी,
इससे नए उद्योग, रोजगार और मूल्य संवर्धन की संभावना बढ़ेगी।
‘अपनी उपज, अपना उद्योग’ अभियान के बाद प्रशासन ने इस दिशा में प्रस्ताव तैयार किया और इसे सरकार को भेजा। अंततः शहर को किन्नू प्रोसेसिंग प्लांट की मंजूरी मिल गई।
प्लांट में क्या होगा: किन्नू पल्प और वैल्यू एडेड उत्पादों की श्रृंखला
प्रस्तावित किन्नू प्रोसेसिंग प्लांट में किन्नू से पल्प तैयार किया जाएगा। इसके तहत
छिलका अलग किया जाएगा,
बीजों को हटाया जाएगा,
और उच्च गुणवत्ता का पल्प तैयार किया जाएगा।
इस पल्प का उपयोग अनेक खाद्य उत्पादों के निर्माण में किया जा सकेगा, जैसे:
मुरब्बा
फ्रूट केक
हलवा
कैंडी
चटनी
हाई फाइबर सेवेई
वर्मीसेली
न्यूट्रिशन ड्रिंक्स
इनके अलावा किन्नू के छिलकों का उपयोग बायोएंजाइम बनाने में भी किया जा सकता है, जो पर्यावरण के अनुकूल सफाई उत्पादों में उपयोग होते हैं।
पंजाब एग्रो मॉडल पर होगा विकास
उद्यान विभाग की प्राथमिकता इस प्लांट को पंजाब एग्रो इंडस्ट्रीज की तर्ज पर विकसित करने की है। पंजाब में किन्नू प्रोसेसिंग प्लांट का एक सफल नेटवर्क मौजूद है, जहां पल्प तैयार कर बड़े पैमाने पर निजी कंपनियों को बेचा जाता है। श्रीगंगानगर में उसी मॉडल को अपनाने से
स्थानीय उद्योगों को कच्चा माल लगातार मिलेगा,
किसान अपनी फसल का पूरा मूल्य प्राप्त कर सकेंगे,
और जिले में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर तेजी से विकसित हो सकेगा।
सरकारी या पीपीपी मॉडल: निर्णय जल्द होगा
फिलहाल यह तय नहीं है कि यह प्लांट पूरी तरह सरकारी क्षेत्र में स्थापित होगा या फिर सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP Model) के तहत चलाया जाएगा। शासन स्तर पर इसकी चर्चा चल रही है और अंतिम निर्णय जल्द लिया जाएगा। जिला प्रशासन का मानना है कि दोनों मॉडल के अपने फायदे हैं:
सरकारी मॉडल में नियंत्रण और किसानों को स्थिर मूल्य मिलेगा,
PPP मॉडल में तेज विकास, बेहतर तकनीक और बड़े पैमाने पर विस्तार की संभावनाएँ होंगी।
किसानों को सबसे बड़ा लाभ: बी और सी ग्रेड किन्नू भी बिकेगा
आज तक ए-ग्रेड किन्नू की बिक्री में कोई बड़ी समस्या नहीं आती, क्योंकि इसकी मांग घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में बनी रहती है। लेकिन बी और सी ग्रेड किन्नू के लिए किसानों को खरीदार नहीं मिलते। कई बार स्थिति यह हो जाती है कि
किसानों को कम दाम पर बेचना पड़ता है,
या मजबूरी में फल को फेंकना पड़ता है।
प्रोसेसिंग प्लांट शुरू होने के बाद
बी और सी ग्रेड किन्नू भी खरीदा जाएगा,
इससे फसल की बर्बादी रुकेगी,
और किसानों की आय में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी। यह कदम कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन और स्थायी आय के उद्देश्य को पूरा करेगा।
औद्योगिक विकास को नई दिशा
किन्नू प्रोसेसिंग प्लांट से जिले में नई औद्योगिक इकाइयों और स्टार्टअप्स के लिए अवसर खुलेंगे। इससे
रोजगार बढ़ेगा,
स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी,
और श्रीगंगानगर को किन्नू आधारित उद्योगों का केंद्र बनाया जा सकेगा। वर्तमान में जिले में केवल वैक्सिंग यूनिट्स हैं, जो किन्नू को चमकदार और लंबे समय तक ताजा रखने का काम करती हैं। पल्प आधारित उद्योग आने से यह दायरा कई गुना बढ़ जाएगा।
अधिकारी क्या कहते हैं
डॉ. मंजू, जिला कलक्टर:
“श्यामा प्रसाद मुखर्जी योजना में श्रीगंगानगर के लिए किन्नू प्रोसेसिंग प्लांट की मंजूरी मिली है। इसके लिए 5 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। उद्यान विभाग की देखरेख में यह प्लांट लगाया जाएगा।”
प्रीति बाला, सहायक निदेशक, उद्यान विभाग:
“किन्नू प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 5 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। इससे किसानों को बड़ा फायदा होगा। फिलहाल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जा रही है।”


