साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब इस पूरे मामले में भोमाराम का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट, पोस्टमार्टम और उस रात हुए घटनाक्रम को लेकर कई अहम खुलासे किए हैं। भोमाराम का कहना है कि इस पूरे मामले को कुछ लोग जानबूझकर राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दी सफाई
भोमाराम ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर जो पोस्ट वायरल हुई थी, उसे उन्होंने अपनी मर्जी से नहीं डाला था। यह पोस्ट साध्वी के पिता विरमनाथ के कहने पर डाली गई थी। उन्होंने कहा कि बाद में इसी पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा किया गया और आश्रम तथा गुरु महाराज को बदनाम करने की कोशिश की गई। भोमाराम के अनुसार, कुछ लोग बिना पूरी जानकारी के हंगामा कर रहे थे और इस संवेदनशील मामले को राजनीति का मुद्दा बना रहे थे।
पोस्टमार्टम को लेकर गलतफहमी का आरोप
भोमाराम ने पोस्टमार्टम को लेकर फैली अफवाहों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि गुरु महाराज का ऐसा कोई इरादा नहीं था कि साध्वी का पोस्टमार्टम न कराया जाए। निजी अस्पताल में साध्वी के निधन के बाद जब उन्हें आश्रम लाया गया, तब गुरु महाराज ने कहा था कि रात के समय पोस्टमार्टम संभव नहीं होता है। उन्होंने बताया कि योजना यह थी कि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में साध्वी को सरकारी अस्पताल ले जाकर विधिवत पोस्टमार्टम कराया जाएगा। लेकिन इससे पहले ही माहौल बिगाड़ दिया गया और गलत संदेश फैलाया गया।
गाड़ी के साथ तोड़फोड़ और माहौल बिगाड़ने का आरोप
भोमाराम ने दावा किया कि साधु-संतों और गुरुजनों को सूचना देकर पूरी प्रक्रिया धार्मिक परंपराओं के अनुसार करने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान कुछ लोगों ने जानबूझकर माहौल खराब किया। उन्होंने बताया कि उनकी गाड़ी के टायर की हवा निकाल दी गई और वाहन को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। भोमाराम के अनुसार, इस तरह की हरकतों से स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई, जिससे मामले ने तूल पकड़ लिया।
समाधि के समय गायब रहे हंगामा करने वाले लोग
भोमाराम ने यह भी कहा कि जिन्होंने उस समय हंगामा किया, वे लोग साध्वी प्रेम बाईसा की समाधि के दौरान नजर नहीं आए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग केवल विवाद खड़ा करने के लिए सामने आए थे, जबकि वास्तविक श्रद्धालु और साधु-संत शांतिपूर्ण तरीके से धार्मिक प्रक्रिया निभा रहे थे।
वायरल वीडियो के बाद न्याय की मांग
भोमाराम ने बताया कि साध्वी प्रेम बाईसा, जिन्हें प्रेम बाईसा भी कहा जाता था, उनके वायरल वीडियो के बाद न्याय की मांग कर रही थीं। उन्होंने कहा कि इसी क्रम में प्रेम बाईसा ने चारों शंकराचार्यों को पत्र लिखे थे। इन पत्रों में साध्वी ने यह कहा था कि वे हर तरह की अग्नि परीक्षा देने को तैयार हैं। उनका दावा था कि उन्होंने बचपन से लेकर अंतिम समय तक ब्रह्मचर्य का पालन किया है। भोमाराम ने दोहराया कि यह पोस्ट भी साध्वी के पिता विरमनाथ के कहने पर ही डाली गई थी।
घटना वाले दिन का पूरा घटनाक्रम
भोमाराम ने उस दिन की पूरी जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन वे दिल्ली जाने के लिए निकले थे। इसी दौरान झालामंड के पास उन्हें गुरुदेव के फोन से सेवादार सुरेश का कॉल आया। फोन पर बताया गया कि बाईसा की तबीयत अचानक खराब हो गई है और उन्हें अस्पताल पहुंचने के लिए कहा गया। भोमाराम ने पूछा कि किस अस्पताल आना है, तब उन्हें प्रेक्षा हॉस्पिटल आने के लिए कहा गया।
अस्पताल पहुंचने से पहले हो चुकी थी मौत
भोमाराम के अनुसार, सूचना मिलते ही वे प्रेक्षा हॉस्पिटल पहुंचे, लेकिन तब तक साध्वी प्रेम बाईसा का निधन हो चुका था। इसके बाद उन्हें आश्रम लाया गया, जहां आगे की प्रक्रिया को लेकर विचार किया जा रहा था।
फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद सामने आएगी सच्चाई
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। भोमाराम का कहना है कि पूरे मामले की सच्चाई फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। उन्होंने अपील की कि जब तक जांच पूरी न हो जाए, तब तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाना चाहिए। फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और सभी की नजरें फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जो इस रहस्यमयी मौत से जुड़े सभी सवालों के जवाब दे सकती है।


