राजस्थान में इन दिनों भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) लगातार सख्त अभियान चला रही है। राज्य में बीते कुछ वर्षों से अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक और डमी कैंडिडेट के मामलों ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है। इसी कड़ी में अब एसओजी ने पटवार भर्ती परीक्षा 2021 और कनिष्ठ अभियंता संयुक्त भर्ती परीक्षा 2021 से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में अहम गिरफ्तारियां की हैं। जांच में सामने आया कि दोनों परीक्षाओं में आरोपियों तक पेपर परीक्षा से पहले पहुंच चुका था और इसी आधार पर उन्होंने फर्जी तरीके से चयन हासिल किया।
पटवारी भर्ती में दो आरोपी गिरफ्तार
एडीजी एसओजी विशाल बंसल के अनुसार, पटवार भर्ती परीक्षा 2021 में डमी कैंडिडेट बैठाने के मामले में दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। यह मामला डीग जिले का है, जहां खैरिया पुरोहित निवासी 28 वर्षीय गीतेश जादौन पुत्र श्याम सिंह खुद परीक्षा देने के बजाय डमी कैंडिडेट के रूप में किसी अन्य को बैठाकर चयनित हो गया था।
जांच में खुलासा हुआ कि गीतेश ने डीग के ही बहज निवासी नीरज कुमार पुत्र राजेश कुमार को अपनी जगह परीक्षा में बैठाया था। नीरज ने परीक्षा में गीतेश के स्थान पर परीक्षा दी और परिणाम आने पर गीतेश का चयन हो गया। चयनित होने के बाद उसे डीग जिले के सीकरी स्थित एसडीएम कार्यालय में पटवारी के पद पर नियुक्ति मिल गई थी। बाद में फर्जीवाड़े की जानकारी सामने आने पर उसे निलंबित कर दिया गया।
एसओजी दोनों आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या वे किसी अन्य भर्ती परीक्षा में भी डमी कैंडिडेट या मूल अभ्यर्थी के रूप में शामिल हुए थे। अधिकारियों के अनुसार, मामले की परतें खुलने पर और भी नाम सामने आ सकते हैं।
कनिष्ठ अभियंता भर्ती परीक्षा में सॉल्व्ड पेपर से चयन
राजस्थान में केवल पटवारी ही नहीं, बल्कि 2020 और 2021 में आयोजित कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) संयुक्त भर्ती परीक्षा भी बड़े स्तर पर पेपर लीक का शिकार हुई थी। यह परीक्षा मूल रूप से दिसंबर 2020 में आयोजित की गई थी, लेकिन पेपर लीक होने के बाद इसे निरस्त कर दिया गया और वर्ष 2021 में दोबारा से परीक्षा आयोजित की गई।
हालांकि दूसरी बार हुई परीक्षा में भी पेपर परीक्षा से पहले ही लीक हो गया था और यह पेपर कई पेपर माफियाओं के पास पहुंच चुका था। इसी कड़ी में एसओजी ने 19 जनवरी 2026 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान टीम ने भर्ती परीक्षा में फर्जी तरीके से चयनित हुए एक अन्य अभ्यर्थी को गिरफ्तार किया।
यह गिरफ्तारी जालौर जिले के चितलवाना क्षेत्र के डेडरिया नाडी निवासी 29 वर्षीय सुरेश कुमार पुत्र दुर्गाराम (जाति विश्नोई-साऊ) की है। सुरेश कुमार बालोतरा के धोरीमन्ना में लोक निर्माण विभाग (PWD) में सहायक अभियंता (AEN) के पद पर कार्यरत था।
एईएन पद तक पहुंचने का पूरा फर्जी तरीका
एसओजी अधिकारियों ने बताया कि भूपेन्द्र सारण नामक आरोपी ने सुरेश कुमार को जेईएन परीक्षा 2021 का लीक और पहले से सॉल्व्ड पेपर परीक्षा से कुछ समय पहले उपलब्ध करवाया था। सुरेश ने वही पेपर पढ़कर परीक्षा दी और आसानी से चयनित हो गया। चयन होने के बाद उसे विभाग में कनिष्ठ अभियंता (Junior Engineer) के पद पर नियुक्ति मिली।
चौंकाने वाली बात यह है कि नौकरी मिलते ही सुरेश को चंद समय में पदोन्नति (प्रमोशन) भी मिल गया और वह सहायक अभियंता (AEN) के पद पर पहुंच गया। फिलहाल एसओजी उसकी नियुक्ति और प्रमोशन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।
जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि सितंबर 2021 में आयोजित उप निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा से ठीक पहले भी सुरेश कुमार को पेपर लीक कर उपलब्ध कराया गया था। इससे यह साफ है कि आरोपी लगातार फर्जी तरीकों से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होता रहा है।
एसओजी की कार्रवाई और आगे की जांच
एसओजी की टीम का कहना है कि दोनों मामलों में गिरफ्तार किए गए आरोपियों से विस्तृत पूछताछ जारी है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पेपर लीक की चेन में कौन-कौन शामिल था और कितने अभ्यर्थियों ने इस रैकेट का फायदा उठाया।
अधिकारियों का मानना है कि यह केवल दो मामले नहीं हैं, बल्कि बड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं जो कई वर्षों से राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं को प्रभावित कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद कई और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।


