उदयपुर शहर में जमीन से जुड़े सबसे पुराने और बड़े मामलों में से एक का आखिरकार पटाक्षेप हो गया है। पुरोहितों की मादड़ी क्षेत्र में उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) ने बड़ी और निर्णायक कार्रवाई करते हुए करीब 56 बीघा बेशकीमती जमीन पर कब्जा ले लिया है। यह जमीन शहर के अंडरब्रिज के पास स्थित है, जिस पर साल 2002 से कानूनी विवाद चल रहा था। लंबी न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब यह जमीन पूरी तरह यूडीए के अधिकार में आ चुकी है।
करोड़ों की जमीन अब यूडीए के नियंत्रण में
जिस जमीन पर यूडीए ने कब्जा लिया है, उसकी बाजार कीमत करीब 150 से 160 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। इतनी बड़ी और मूल्यवान भूमि पर कब्जा हासिल करना प्राधिकरण के लिए अब तक की सबसे बड़ी अवाप्ति कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस जमीन का शहर के भविष्य के विकास में अहम योगदान रहेगा।
साल 2002 से चल रहा था कानूनी संघर्ष
करीब 12.5 हेक्टेयर यानी 56 बीघा जमीन को लेकर साल 2002 से विवाद चला आ रहा था। यह मामला लंबे समय तक अदालत में लंबित रहा, जिसके चलते जमीन का उपयोग नहीं हो सका। कई बार सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार अदालत ने यूडीए के पक्ष में निर्णय दिया। कोर्ट के आदेश के बाद 1 दिसंबर को यूडीए ने जमीन का भौतिक कब्जा हासिल कर लिया था।
शुक्रवार को पूरी हुई अंतिम कार्रवाई
यूडीए आयुक्त राहुल जैन के निर्देश पर शुक्रवार को इस जमीन पर अंतिम कार्रवाई की गई। तहसीलदार रणजीत सिंह के नेतृत्व में यूडीए की टीम सुबह भारी लवाजमे के साथ मौके पर पहुंची। टीम के साथ राजस्व विभाग और पुलिस के अधिकारी भी मौजूद रहे, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
अस्थाई निर्माण हटाए गए
कब्जा प्रक्रिया के दौरान मौके पर कुछ अस्थाई निर्माण पाए गए थे। यूडीए की टीम ने मशीनों की मदद से इन अस्थाई ढांचों को हटाया और जमीन को पूरी तरह खाली करवाया। अधिकारियों के अनुसार, यह निर्माण अवैध रूप से किए गए थे और इन्हें हटाना जरूरी था, ताकि जमीन को सुरक्षित किया जा सके।
शांतिपूर्ण रही पूरी कार्रवाई
इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद पूरे अभियान के दौरान स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण बनी रही। पुलिस के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, लेकिन किसी भी पक्ष की ओर से विरोध या हंगामा नहीं हुआ। स्थानीय लोगों ने भी कार्रवाई में किसी तरह की बाधा नहीं डाली। अधिकारियों ने इसे प्रशासनिक और कानूनी दृष्टि से एक बड़ी सफलता बताया है।
अतिक्रमण रोकने के लिए शुरू हुई चारदीवारी
जमीन पर कब्जा लेने के तुरंत बाद यूडीए ने भविष्य में अतिक्रमण की संभावना को देखते हुए बाउंड्री वॉल यानी चारदीवारी बनाने का काम भी शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरी जमीन सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक यहां निगरानी और घेराबंदी का काम लगातार जारी रहेगा। इस दौरान राजस्व अधिकारी सुरपाल सिंह सहित यूडीए के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौके पर तैनात रहे।
विकास योजनाओं के लिए अहम साबित होगी जमीन
यूडीए अधिकारियों के अनुसार, यह जमीन उदयपुर शहर की भावी विकास योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इतनी बड़ी जमीन मिलने से अब प्राधिकरण को जनहित से जुड़ी बड़ी परियोजनाएं शुरू करने में सुविधा मिलेगी। यहां आवासीय, वाणिज्यिक या सार्वजनिक उपयोग से जुड़ी योजनाएं लाई जा सकती हैं, जिससे शहर के समग्र विकास को गति मिलेगी।
शहरी नियोजन को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अवाप्ति कार्रवाइयां शहरी नियोजन के लिए बेहद जरूरी हैं। लंबे समय तक विवादित रहने वाली जमीन न तो सरकार के काम आ पाती है और न ही आम जनता के हित में उपयोग हो पाती है। यूडीए की इस कार्रवाई से यह संदेश भी गया है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आगे भी जारी रहेंगी कार्रवाई
यूडीए अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि शहर में अन्य विवादित और अतिक्रमित जमीनों को लेकर भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। प्राथमिकता यह है कि सरकारी जमीनों को मुक्त कराकर उन्हें विकास कार्यों में लगाया जाए। पुरोहितों की मादड़ी की यह कार्रवाई आने वाले समय में यूडीए की सबसे अहम उपलब्धियों में गिनी जा सकती है।


