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क्रिकेट-बैडमिंटन किट घोटाला: MLA-LAD फंड की हेराफेरी में बलजीत यादव मास्टरमाइंड

क्रिकेट-बैडमिंटन किट घोटाला: MLA-LAD फंड की हेराफेरी में बलजीत यादव मास्टरमाइंड

क्रिकेट और बैडमिंटन किट घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा खुलासा करते हुए बहरोड़ विधानसभा के पूर्व विधायक बलजीत यादव को गिरफ्तार किया है। ED की पूछताछ में सामने आया है कि विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि यानी MLA-LAD फंड की करीब 2.87 करोड़ रुपये की राशि की सुनियोजित तरीके से हेराफेरी की गई और यह पैसा रिश्तेदारों एवं करीबी सहयोगियों के खातों में डायवर्ट किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि इस फंड का एक हिस्सा प्रॉपर्टी खरीदने में इस्तेमाल किया गया।

शाहजहांपुर टोल प्लाजा से गिरफ्तारी, जयपुर में पूछताछ

ED ने मंगलवार रात अलवर जिले के शाहजहांपुर टोल प्लाजा से पूर्व विधायक बलजीत यादव को हिरासत में लिया। यह टोल प्लाजा दिल्ली–जयपुर हाईवे पर NHAI कार्यालय के पास स्थित है। हिरासत में लेने के बाद उन्हें पूछताछ के लिए जयपुर स्थित प्रवर्तन निदेशालय के कार्यालय लाया गया। यहां लंबी पूछताछ के बाद ED ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए ED ने बलजीत यादव को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत तीन दिन की रिमांड पर लिया है, ताकि फंड की मनी ट्रेल और अन्य संदिग्ध लेन-देन की गहराई से जांच की जा सके।

2021–22 में स्कूलों के लिए खरीदी गई थी खेल सामग्री

यह पूरा मामला वर्ष 2021–22 का है, जब बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र के करीब 32 सरकारी स्कूलों के लिए क्रिकेट और बैडमिंटन किट खरीदी गई थीं। इन खेल सामग्री की खरीद के नाम पर MLA-LAD फंड से कुल 3.72 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गईं और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। ED ने दिसंबर 2024 में इस मामले में PMLA एक्ट के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू की थी। इसके बाद लगातार वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही थी।

जयपुर, दौसा और रेवाड़ी में सर्च ऑपरेशन

जांच के सिलसिले में ED ने 24 जनवरी 2025 को राजस्थान के जयपुर और दौसा तथा हरियाणा के रेवाड़ी में कुल 9 स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया था। यह कार्रवाई पूर्व विधायक बलजीत यादव और उनसे जुड़े लोगों व कंपनियों से संबंधित परिसरों पर की गई थी। सर्च ऑपरेशन के दौरान ED को 31 लाख रुपये नकद, फर्जी दस्तावेज, कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस मिले। इनसे MLA-LAD फंड की लॉन्ड्रिंग और धन के दुरुपयोग से जुड़े अहम सबूत सामने आए।

ED जांच में सामने आया पूरा षड्यंत्र

ED की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र से 2018 से 2023 तक विधायक रहे बलजीत यादव इस पूरे घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता थे। जांच एजेंसी के अनुसार, 2.87 करोड़ रुपये की MLA-LAD फंड हेराफेरी में वे ही मास्टरमाइंड थे। जांच में सामने आया कि बलजीत यादव ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के 32 सरकारी स्कूलों के लिए खेल सामग्री की खरीद की सिफारिश की थी। इसके बाद अपने सहयोगियों के साथ मिलकर मेसर्स बालाजी कम्प्लीट सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया।

बिना अनुभव वाली कंपनियों को दिलाए टेंडर

ED ने खुलासा किया है कि मेसर्स सूर्या एंटरप्राइजेज लिमिटेड, मेसर्स राजपूत स्पोर्ट्स एंटरप्राइजेज लिमिटेड और मेसर्स शर्मा स्पोर्ट्स एंटरप्राइजेज लिमिटेड जैसी कंपनियों को स्पोर्ट्स इक्विपमेंट सप्लाई का कोई पूर्व अनुभव नहीं था। इन कंपनियों को कर्मचारियों और सहयोगियों की आईडी का इस्तेमाल कर बनाया गया। इन कंपनियों को अलवर जिला परिषद से प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दिलवाई गई। प्रतिस्पर्धा को रोकने के लिए तय नियमों को दरकिनार कर टेंडर जारी किए गए, ताकि इन्हीं कंपनियों को खेल सामग्री की आपूर्ति का ठेका मिल सके।

घटिया सामान, बढ़े-चढ़े बिल और कैश में लेन-देन

जांच में यह भी सामने आया कि स्कूलों के लिए घटिया क्वालिटी का खेल सामान खरीदा गया, वह भी अधिकतर कैश में। नीमराना पंचायत समिति को बढ़ा-चढ़ाकर भेजे गए बिलों को बिना आपत्ति के मंजूरी दे दी गई। बैंक अकाउंट एनालिसिस से यह खुलासा हुआ कि प्राप्त फंड को बलजीत यादव के रिश्तेदारों और सहयोगियों के खातों में डायवर्ट किया गया। फंड का एक हिस्सा उनके नाम पर प्रॉपर्टी खरीदने में इस्तेमाल किया गया, जिसे बाद में बेचकर रकम संबंधित कंपनियों को वापस कर दी गई और अधिकांश पैसा नकद में निकाल लिया गया।

आगे और गिरफ्तारियों की संभावना

ED अधिकारियों का कहना है कि यह जांच अभी शुरुआती चरण में नहीं है, बल्कि कई अहम सबूत सामने आ चुके हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। क्रिकेट और बैडमिंटन किट घोटाले ने एक बार फिर MLA-LAD फंड के उपयोग और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच आगे किस दिशा में जाती है और किन-किन चेहरों तक इसकी आंच पहुंचती है।

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