राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर सियासी माहौल गर्म हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार पर शिक्षा, कानून व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। डोटासरा ने प्रेस वार्ता में कई मुद्दों पर सरकार को घेरा और कहा कि प्रदेश की वर्तमान स्थिति चिंताजनक होती जा रही है।
व्याख्याता की मृत्यु के मामले में सरकार पर सवाल
डोटासरा ने एक व्याख्याता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस घटना ने प्रदेश की प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि राज्य की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के पिछले दो वर्षों के कामकाज की विस्तृत जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार को न्याय मिलना आवश्यक है और इस दिशा में सरकार को जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। उन्होंने मृतक व्याख्याता के परिवार के लिए आर्थिक पैकेज तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की। डोटासरा ने कहा कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए ताकि तथ्य सामने आएं और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
खेजड़ी कटाई विवाद: डोटासरा बोले— ‘सरकार को कोढ़ में खाज हो गई’
पर्यावरण से जुड़े खेजड़ी कटाई विवाद पर डोटासरा का हमला और भी तीखा रहा। उन्होंने कहा कि राजस्थान में खेजड़ी सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि आस्था, पर्यावरण और परंपरा का प्रतीक है। इसके बावजूद सरकार इस गंभीर मामले को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “सरकार को कोढ़ हो गया है और अब कोढ़ में खाज हो गई है।” डोटासरा ने दावा किया कि खेजड़ी कटाई के विरोध में करीब 50 हजार लोग धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशीलता नहीं दिखा रही। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस मामले को हल्के में लिया गया तो यह प्रदेश में बड़े सामाजिक असंतोष का कारण बन सकता है।
रामकथा में शिक्षकों की ड्यूटी पर आपत्ति
डोटासरा ने शिक्षा विभाग और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को निशाने पर लेते हुए कहा कि सरकार शिक्षकों को शिक्षा कार्य के बजाय अन्य गतिविधियों में लगाकर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले कुछ जगहों पर शिक्षकों की ड्यूटी कुत्ते भगाने जैसे असंगत कामों में लगाई गई थी, और अब धार्मिक कार्यक्रमों में शिक्षकों को तैनात किया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा — “बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की ड्यूटी आखिर कब लगेगी?” कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि राजस्थान में पहले से ही शिक्षक-कर्मचारियों की कमी है और ऐसी परिस्थितियों में सरकार का फैसला शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
कानून व्यवस्था पर भी सरकार घिरी— ‘लगातार बिगड़ रही स्थिति’
डोटासरा ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून व्यवस्था दिनों-दिन बिगड़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि जनता सुरक्षा महसूस नहीं कर रही और सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाने में विफल साबित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि “डबल इंजन की सरकार में आरएसएस का महिमामंडन हो रहा है, लेकिन आम लोगों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।” डोटासरा ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग राजनीतिक कार्यक्रमों और प्रचार में व्यस्त हैं, जबकि प्रदेश के वास्तविक मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सरकार पर प्रशासनिक लापरवाही का आरोप
डोटासरा ने कहा कि मौजूदा राज्य सरकार ऐसा प्रतीत करती है जैसे उसे जनता की आवाज़ सुनने में रुचि ही नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर संवेदनशीलता की कमी दिख रही है और कई विभागों में पारदर्शिता का अभाव साफ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश के लोग सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक अपनी आवाज़ उठा रहे हों, तब सरकार का मौन रहना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है।
कांग्रेस ने उठाई न्याय और जवाबदेही की मांग
अपने बयान के अंत में डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी प्रदेश के मुद्दों पर मजबूती से आवाज़ उठाती रहेगी और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि हर मामले में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही जरूरी है और यही बातें एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान हैं।


