राजस्थान के बहरोड़ से पूर्व निर्दलीय विधायक बलजीत यादव की गिरफ्तारी ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को उन्हें हिरासत में लिया था और बुधवार को विशेष अदालत में पेश किया गया। मामला वर्ष 2021 में सरकारी स्कूलों के लिए खरीदे गए स्पोर्ट्स किट में कथित 3.72 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़ा हुआ है। अदालत में पेशी के दौरान इस मामले ने राजनीतिक और कानूनी दोनों ही मोर्चों पर तीखी बहस का रूप ले लिया।
कोर्ट में बोले बलजीत यादव- मुझे फंसाया जा रहा है
कोर्ट में बहस के दौरान बलजीत यादव ने खुद को निर्दोष बताते हुए मौजूदा बहरोड़ विधायक जसवंत यादव पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर एक राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। बलजीत यादव ने अदालत में कहा कि बहरोड़ विधायक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और अपने मानसिक रूप से कमजोर बेटे को राजनीति में स्थापित करना चाहते हैं। इसी वजह से उनके खिलाफ यह कार्रवाई करवाई जा रही है।
पूर्व विधायक ने कहा कि उन्हें कानून और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कोर्ट में यह भी कहा, “सत्यमेव जयते की जीत होगी।” बलजीत यादव ने दावा किया कि एक विधायक की भूमिका केवल सिफारिश तक सीमित होती है और टेंडर प्रक्रिया से उनका कोई सीधा संबंध नहीं होता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह पहला मामला है, जब हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद गिरफ्तारी की गई है।
वकीलों का दावा- राजनीतिक द्वेष में की गई कार्रवाई
बलजीत यादव के वकीलों ने ईडी की कार्रवाई को पूरी तरह राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया। उन्होंने अदालत में दलील दी कि जिस फर्म के खातों में पैसे जाने की बात कही जा रही है, उसके मालिक से बलजीत यादव का पहले से संपत्ति विवाद चल रहा है। वकीलों के अनुसार टेंडर पंचायत समिति के माध्यम से नियमों के तहत अखबारों में प्रकाशित किए गए थे और इसमें बलजीत यादव की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी।
वकीलों ने यह भी कहा कि यदि बलजीत यादव किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाते, तो उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने ईडी के आरोपों को निराधार बताते हुए गिरफ्तारी को गलत ठहराया।
ED का पक्ष- फर्जी फर्म बनाकर किया फंड डायवर्ट
प्रवर्तन निदेशालय ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस मामले में आगे की जांच बेहद जरूरी है। ED के अनुसार स्पोर्ट्स किट खरीद में फर्जी फर्मों का सहारा लेकर सरकारी धन को डायवर्ट किया गया। एजेंसी ने कोर्ट से 6 दिन की रिमांड की मांग की है, ताकि पूरे नेटवर्क और धन के लेन-देन की गहराई से जांच की जा सके।
ED ने यह भी बताया कि जनवरी 2024 में पहले ही बलजीत यादव से जुड़े 10 ठिकानों पर छापेमारी की जा चुकी है, जिसमें कई अहम दस्तावेज और जानकारियां सामने आई थीं।
क्या है स्पोर्ट्स किट घोटाला
यह मामला वर्ष 2021 का है, जब अलवर जिले के 32 सरकारी स्कूलों के लिए क्रिकेट किट, बैडमिंटन और अन्य खेल सामग्री खरीदी गई थी। आरोप है कि यह सामग्री बाजार कीमत से लगभग तीन गुना अधिक दर पर खरीदी गई। इसी खरीद प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।
राजनीतिक सफर और पहचान
बलजीत यादव वर्ष 2018 में निर्दलीय विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे थे। वे हमेशा अपने अलग अंदाज और आंदोलनों के लिए चर्चा में रहे। मार्च 2022 में उन्होंने बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं में नकल के खिलाफ जयपुर के सेंट्रल पार्क में काले कपड़े पहनकर 24 चक्कर लगाकर विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले को 51 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा कर भी सुर्खियां बटोरी थीं।
लंच के बाद आएगा कोर्ट का फैसला
विशेष अदालत के न्यायाधीश खगेंद्र कुमार शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुन ली हैं। अब लंच के बाद होने वाली सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि बलजीत यादव को ईडी की रिमांड पर भेजा जाएगा या न्यायिक हिरासत में रखा जाएगा। इस फैसले पर न सिर्फ कानूनी, बल्कि राजनीतिक नजरें भी टिकी हुई हैं।


