राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर सोमवार को बारां जिले के दौरे पर थे। छैलाबेल गांव जाते समय रास्ते में उन्होंने एक बुजुर्ग व्यक्ति को बकरियां लेकर जाते देखा। उन्हें पहचानते ही मंत्री दिलावर ने तुरंत अपना काफिला रुकवाया और उसके पास पहुंचे।
बुजुर्ग को संबोधित करते हुए उन्होंने पूछा—“कैसे हो दोस्त?” जैसे ही बुजुर्ग ने पलटकर मंत्री को देखा, वह आश्चर्यचकित रह गया। मंत्री दिलावर ने उसे गले लगाते हुए बताया कि यह उनका बचपन का दोस्त हरीश चंद्र सुमन है। वे दोनों एक समय सिर पर टोकरी रखकर गांव-गांव सब्जी बेचते थे।
पुरानी यादें ताज़ा—साथ में बेचते थे बैंगन और हरी सब्जियां
मंत्री ने हंसते हुए पूछा—“याद है, हम क्या-क्या बेचते थे?”
हरीश ने तुरंत जवाब दिया—“हां, बैंगन और हरी सब्जियां।”
उन्होंने आगे कहा कि दोनों की उम्र बराबर की है और वे लंबे समय तक एक साथ गांव-गांव जाकर आवाज़ लगाकर सब्जी बेचा करते थे। इस मुलाकात के दौरान दोनों के बीच बचपन की यादें फिर जीवंत हो उठीं।
जर्जर स्कूलों को लेकर मंत्री का बयान
कारी कार्यक्रम के दौरान एक सवाल पूछा गया कि जर्जर स्कूल भवनों को गिराए जाने के बाद कई जगह बच्चे खुले में पढ़ने को मजबूर हैं। इस पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि सरकार सबसे पहले क्षतिग्रस्त भवनों को गिराकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।
उन्होंने बताया कि बच्चों को असुरक्षित इमारतों में पढ़ाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। सरकार का प्रयास है कि बच्चों को दूसरे सुरक्षित भवनों में शिफ्ट किया जाए और नए भवन चरणबद्ध तरीके से बनाए जाएं। इसके लिए स्वीकृतियां जारी कर दी गई हैं।
सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता पर दिलावर का दावा
मंत्री ने कहा कि राजस्थान की शिक्षा रैंकिंग पहले 11वें स्थान पर थी, जो अब बढ़कर तीसरे स्थान पर पहुंच गई है।
उन्होंने दावा किया कि आज सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता निजी विद्यालयों की अपेक्षा बेहतर हो रही है। सरकार शिक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
वायरल चिट्ठी पर दिया जवाब
अंता विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे मोरपाल सुमन के नाम की एक वायरल चिट्ठी को लेकर जब मंत्री से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा—“न मुझे पत्र के बारे में जानकारी है, न मैंने उसे पढ़ा है, और न ही मैं व्हाट्सएप चलाता हूं।”
उन्होंने इस मामले में किसी भी तरह की जानकारी से इंकार किया।


