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बजट 2026 : STT बढ़ते ही बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 400 अंक फिसला, सरकारी बैंक सबसे ज्यादा टूटे

बजट 2026 : STT बढ़ते ही बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 400 अंक फिसला, सरकारी बैंक सबसे ज्यादा टूटे

केंद्रीय बजट 2026 पेश होने के दिन यानी 1 फरवरी को शेयर बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। बजट से जुड़ी घोषणाओं के बीच निवेशक सतर्क नजर आए, जिसका असर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर साफ दिखा। दोपहर के कारोबार में सेंसेक्स करीब 400 अंक गिरकर 81,900 और निफ्टी करीब 150 अंक फिसलकर 25,200 के आसपास कारोबार करता नजर आया। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 11 शेयरों में तेजी, जबकि 19 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। SBI, BEL और टाइटन के शेयरों में सबसे ज्यादा करीब 3% तक की गिरावट देखने को मिली।

निचले स्तर से बाजार ने दिखाई रिकवरी

बाजार में गिरावट के बीच कुछ समय के लिए रिकवरी भी देखने को मिली। करीब सुबह 11 बजे सेंसेक्स अपने निचले स्तर 82,119 से लगभग 500 अंक की रिकवरी करता नजर आया। वहीं निफ्टी भी डे लो 25,236 से करीब 150 अंक उछलकर ऊपर आया। हालांकि, यह तेजी ज्यादा देर टिक नहीं पाई और बजट से जुड़े बड़े ऐलानों के बाद बाजार फिर दबाव में आ गया।

कमजोर शुरुआत के बाद बढ़ा दबाव

आज बाजार की शुरुआत भी सुस्त रही थी। सुबह 9:15 बजे सेंसेक्स करीब 100 अंक की गिरावट के साथ 82,156 के स्तर पर खुला था। निफ्टी भी 50 अंक गिरकर 25,275 पर ओपन हुआ था। इसके बाद उतार-चढ़ाव का सिलसिला पूरे दिन जारी रहा।

सरकारी बैंक सेक्टर में सबसे बड़ी गिरावट

निफ्टी के सेक्टोरल इंडेक्स पर नजर डालें तो सरकारी बैंक सेक्टर में सबसे ज्यादा 3.5% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा—

  • मेटल और मीडिया सेक्टर करीब 2% टूटे

  • FMCG, IT, फार्मा, फाइनेंशियल सर्विसेज और रियल्टी सेक्टर में भी कमजोरी

  • सिर्फ ऑटो और प्राइवेट बैंक सेक्टर में सीमित तेजी देखने को मिली

PSU बैंकों में बिकवाली का दबाव साफ तौर पर दिखा, जिससे पूरे बाजार की धारणा कमजोर हुई।

STT बढ़ाने के ऐलान से बिगड़ा सेंटीमेंट

बाजार में तेज गिरावट की सबसे बड़ी वजह रही STT (सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स) से जुड़ी घोषणा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में बताया कि फ्यूचर्स पर लगने वाला STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है। इस घोषणा के तुरंत बाद शेयर बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली। खासतौर पर स्टॉक एक्सचेंज और ब्रोकिंग कंपनियों के शेयर 10% तक टूट गए। निवेशकों को डर है कि STT बढ़ने से ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ेगी, जिससे वॉल्यूम और मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

STT क्या है और क्यों असर डालता है?

STT यानी Securities Transaction Tax एक डायरेक्ट टैक्स है, जो शेयर बाजार में हर खरीद-फरोख्त पर लगता है। यह टैक्स घाटा होने पर भी देना पड़ता है और सीधे ट्रांजैक्शन वैल्यू पर कटता है। STT बढ़ने से खासकर शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स और डेरिवेटिव सेगमेंट में एक्टिव निवेशकों पर सीधा असर पड़ता है।

कैपेक्स बढ़ने से लंबी अवधि में उम्मीद

बजट 2026-27 में सरकार ने कैपेक्स बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपए करने का ऐलान किया है, जो पिछले साल 11.2 लाख करोड़ रुपए था। वित्त मंत्री ने कहा कि इससे इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबी अवधि में यह कदम बाजार के लिए पॉजिटिव है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में टैक्स और पॉलिसी बदलावों की वजह से उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह

एक्सपर्ट्स निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि—

  • क्वालिटी और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर फोकस रखें

  • इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और रेलवे जैसे बजट-फोकस्ड सेक्टर में हलचल बनी रह सकती है

  • लंबी अवधि के लिए लार्जकैप शेयर बेहतर विकल्प हो सकते हैं

बजट तक बना रह सकता है उतार-चढ़ाव

मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि जब तक बजट से जुड़ी सभी घोषणाएं पूरी तरह सामने नहीं आ जातीं, तब तक बाजार में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है। प्रॉफिट बुकिंग के चलते बीच-बीच में गिरावट आएगी, लेकिन हर गिरावट पर खरीदारी के मौके भी बन सकते हैं।

बैंकिंग और IT शेयरों ने दिया सहारा

बाजार को संभालने में बैंकिंग और IT शेयरों का अहम योगदान रहा। HDFC बैंक, ICICI बैंक और TCS जैसे दिग्गज शेयरों में आई तेजी ने इंडेक्स को ज्यादा टूटने से बचाया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निचले स्तरों पर खरीदारी देखने को मिली।

ग्लोबल और FII फैक्टर्स का असर

ग्लोबल संकेत भी मिले-जुले रहे। जापान, हांगकांग और चीन के बाजारों में कमजोरी दिखी, जबकि कुछ एशियाई बाजारों में हल्की मजबूती रही।
इसके अलावा 30 जनवरी को FIIs ने ₹601 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि DIIs ने ₹2,251 करोड़ की खरीदारी की। दिसंबर 2025 में भी FIIs की भारी बिकवाली देखी गई थी।

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