लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में पहचान बना चुके एक्टिविस्ट और साइंटिस्ट सोनम वांगचुक की तबीयत जोधपुर सेंट्रल जेल में अचानक बिगड़ गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शनिवार सुबह पुलिस कड़ी सुरक्षा में उन्हें जोधपुर स्थित एम्स अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंची। यहां करीब डेढ़ घंटे तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उनका मेडिकल चेकअप किया। एम्स से जुड़े सूत्रों के अनुसार सोनम वांगचुक को पेट से जुड़ी गंभीर समस्या है। इसके अलावा शरीर के अन्य हिस्सों में भी दर्द की शिकायत सामने आई है। जांच के बाद पुलिस टीम उन्हें वापस जेल लेकर रवाना हो गई।
सुबह-सुबह एम्स पहुंची पुलिस टीम
जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे सोनम वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल से एम्स अस्पताल लाया गया। उन्हें सीधे इमरजेंसी वार्ड में गैस्ट्रोलॉजिस्ट को दिखाया गया। डॉक्टरों ने आवश्यक जांच के बाद उनकी स्थिति का आकलन किया।
सूत्रों का कहना है कि वांगचुक को पिछले कुछ समय से पेट दर्द, गैस और कमजोरी की लगातार शिकायत थी। शुक्रवार को भी उन्हें एम्स में कुछ मेडिकल टेस्ट के लिए लाया गया था, लेकिन तबीयत में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर दोबारा जांच कराई गई।
चार महीने से जोधपुर जेल में बंद हैं सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक पिछले चार महीनों से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उन्हें लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठे शेड्यूल में शामिल करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। सोनम वांगचुक देशभर में शिक्षा सुधार और पर्यावरण संरक्षण को लेकर चर्चित रहे हैं। मशहूर हिंदी फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ का किरदार ‘फुनसुख वांगडू’ उनके जीवन से प्रेरित बताया जाता है, जिसके चलते वे आम जनता के बीच भी खास पहचान रखते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे विशेषज्ञ जांच के आदेश
जेल में सोनम वांगचुक की बिगड़ती तबीयत को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। गुरुवार, 29 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जोधपुर जेल प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वांगचुक की जांच किसी सरकारी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर से कराई जाए। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने कहा था कि यदि कोई कैदी लगातार स्वास्थ्य संबंधी शिकायत कर रहा है, तो उसे विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिलना उसका अधिकार है। कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिए कि गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से जांच कराई जाए और मेडिकल रिपोर्ट 2 फरवरी तक पेश की जाए।
सरकार ने बताया- 21 बार हो चुकी है जांच
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने बताया था कि सोनम वांगचुक की नियमित रूप से मेडिकल जांच की जा रही है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पिछले चार महीनों में जेल के डॉक्टरों द्वारा कुल 21 बार उनकी जांच की जा चुकी है। नटराज के अनुसार आखिरी मेडिकल चेकअप 26 जनवरी को किया गया था और जेल प्रशासन की ओर से किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई है।
वकील कपिल सिब्बल ने जताई आपत्ति
राज्य सरकार की दलीलों पर सोनम वांगचुक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने कोर्ट में कहा था कि जेल में उपलब्ध पानी और परिस्थितियों के कारण वांगचुक को लगातार पेट दर्द की समस्या हो रही है। सिब्बल ने तर्क दिया कि सामान्य जेल जांच पर्याप्त नहीं है और उनकी हालत को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच जरूरी है। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा था कि मरीज की मांग और स्थिति के अनुसार उसे विशेषज्ञ चिकित्सा मिलनी चाहिए।
मेडिकल रिपोर्ट पर टिकी आगे की कार्रवाई
अब सभी की नजरें एम्स द्वारा तैयार की जाने वाली मेडिकल रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट में 2 फरवरी तक पेश किया जाना है। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय की जा सकती है।


