देशभर के सर्राफा बाजारों में इन दिनों चांदी की बेकाबू तेजी चर्चा का सबसे बड़ा विषय बनी हुई है। लगातार बढ़ते दामों ने जहां निवेशकों को जबरदस्त मुनाफा दिलाया है, वहीं ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोग गहरी चिंता में डूबे हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि शादी-ब्याह का सीजन गुजरने के बावजूद चांदी की दुकानों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और कारीगरों के हाथों में काम नहीं है। चांदी के दाम जिस रफ्तार से ऊपर जा रहे हैं, उसने अनुभवी बाजार विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। ज्वेलर्स जहां रोजाना रेट की खबरें देखकर ही दुकान खोल रहे हैं, वहीं निवेशक ऊंचे भाव पर चांदी बेचकर मुनाफा काटने में जुटे हैं।
ज्वेलरी शोरूम सूने, कारीगर बेरोजगार
तेजी का सबसे बड़ा असर ज्वेलरी इंडस्ट्री पर पड़ा है। जयपुर, दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद जैसे बड़े सर्राफा केंद्रों में चांदी के आभूषणों की बिक्री लगभग ठप हो चुकी है। बढ़ती कीमतों के कारण आम ग्राहक खरीद से दूरी बना रहा है। स्थिति यह है कि कई चांदी कारखानों में काम बंद पड़ा है। कारीगर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और कारोबारी नई ऑर्डर मिलने का इंतजार कर रहे हैं। ज्वेलर्स का कहना है कि अगर यही हालात रहे तो आने वाले महीनों में हजारों कारीगरों पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।
छोटे निवेशकों की चांदी, डिजिटल प्लेटफॉर्म से करोड़ों का सपना
जहां एक ओर पारंपरिक बाजार संकट में है, वहीं डिजिटल सिल्वर निवेश ने तस्वीर का दूसरा पहलू दिखा दिया है। अब लोग सिर्फ 10 रुपये से चांदी में निवेश कर रहे हैं। मोबाइल ऐप के जरिए शुद्धता की गारंटी, सुरक्षित स्टोरेज और तुरंत खरीद-बिक्री की सुविधा ने आम आदमी को भी निवेशक बना दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए चांदी में निवेश करने वालों को अब तक करीब 240 प्रतिशत तक का रिटर्न मिल चुका है। यही वजह है कि छोटे निवेशकों के चेहरे खिले हुए हैं और चांदी को भविष्य का सबसे मजबूत एसेट माना जाने लगा है।
क्या यह किसी बड़े तूफान की शुरुआत है?
वैश्विक वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की मौजूदा तेजी थमने वाली नहीं है। मशहूर निवेशक और ‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि आने वाले समय में चांदी सोने से भी बेहतर रिटर्न दे सकती है। वहीं एलबीएमए (London Bullion Market Association) के ताजा सर्वे में अनुमान जताया गया है कि साल 2026 के अंत तक चांदी 5 लाख से 6 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है। जयपुर सर्राफ समिति बड़ी चौपड़ के मंत्री अश्विनी तिवारी का कहना है कि चार दशक के कारोबार में उन्होंने कभी नहीं देखा कि चांदी 50 डॉलर से सीधे 100 डॉलर प्रति औंस तक इतनी तेजी से पहुंचे। उनके अनुसार यह उछाल न केवल असाधारण है, बल्कि ऐतिहासिक भी है।
एक सप्ताह में रिकॉर्ड उछाल, बाजार में अफरा-तफरी
चांदी के दामों में हालिया बढ़ोतरी ने पूरे देश के सर्राफा बाजारों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया है। बीते मंगलवार को चांदी के दाम में एक ही दिन में 40,500 रुपये प्रति किलो की छलांग लगी। इसके अगले दिन बुधवार को 15,000 रुपये की और तेजी दर्ज की गई। पलक झपकते ही चांदी 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार निकल गई। इस तरह का उछाल वर्षों में पहली बार देखा गया है।
आखिर क्यों बढ़ रहा है चांदी का भाव?
विशेषज्ञ चांदी की इस तेजी के पीछे चार बड़े कारण गिना रहे हैं।
पहला कारण है चीन द्वारा चांदी के निर्यात पर सख्ती और खनन में कटौती, जिससे वैश्विक सप्लाई घट गई है।
दूसरा कारण सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों में चांदी की बढ़ती खपत है। ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ती दुनिया में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है।
तीसरा कारण यह है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपनी मुद्राओं को सुरक्षित रखने के लिए भारी मात्रा में सोना-चांदी जमा कर रहे हैं।
चौथा और सबसे अहम कारण डिजिटल निवेश का विस्फोट है, जिसने आम लोगों को भी सीधे बुलियन मार्केट से जोड़ दिया है।
साल 2026 की शुरुआत में ही चांदी ने रचा इतिहास
साल 2026 की शुरुआत ने कीमती धातुओं के बाजार में नया अध्याय जोड़ दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी पहली बार 100 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच चुकी है। इसका सीधा असर भारत पर पड़ा और एमसीएक्स पर चांदी 4,07,456 रुपये प्रति किलो पर खुली। एक ही सप्ताह में करीब 50 हजार रुपये की उछाल के साथ चांदी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।


