महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (MDSU) में परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय से संबद्ध नागौर के बलदेव राम मिर्धा राजकीय कॉलेज में बीए फर्स्ट ईयर सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा कॉपियों को लेकर भारी लापरवाही उजागर हुई है। इस मामले का एक वीडियो 15 जनवरी को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें बच्चों द्वारा परीक्षा की कॉपियां जांचे जाने का दृश्य दिखाई दे रहा था। वीडियो के सामने आने के बाद शिक्षण जगत में हड़कंप मच गया और विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए।
12 नवंबर की परीक्षा, 15 जनवरी को वायरल हुआ वीडियो
यह मामला 12 नवंबर को आयोजित बीए फर्स्ट ईयर सेकंड सेमेस्टर (हिस्ट्री ऑफ इंडिया) की परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा संपन्न होने के बाद मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान हुई लापरवाही का वीडियो करीब दो महीने बाद सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो में साफ तौर पर देखा गया कि परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं बच्चों के हाथों में हैं और वे उन्हें जांच रहे हैं। इस वीडियो के वायरल होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से तुरंत संज्ञान लिया गया और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए।
हाई लेवल कमेटी ने की जांच
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गठित हाई लेवल जांच कमेटी ने इस गंभीर मामले की पड़ताल की। जांच के तहत नागौर स्थित बलदेव राम मिर्धा राजकीय कॉलेज के प्राचार्य हरसूख छरंग को कमेटी के समक्ष तलब किया गया। साथ ही संबंधित परीक्षक सुरेशचंद बेंदा को भी बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया।
जांच के दौरान वीडियो में दिख रही लापरवाही की पुष्टि हुई। कमेटी की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि परीक्षक द्वारा परीक्षा की कॉपियों को असुरक्षित स्थिति में छोड़ दिया गया था, जिससे बच्चों को उनके साथ छेड़छाड़ करने का अवसर मिला।
परीक्षक की लापरवाही हुई साबित
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि परीक्षा कॉपियों की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी परीक्षक की थी, लेकिन उन्होंने इस जिम्मेदारी का गंभीरता से निर्वहन नहीं किया। उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित स्थान पर न रखने और बाहरी लोगों की पहुंच में आने देना परीक्षा नियमों का सीधा उल्लंघन माना गया है।
कमेटी ने इसे विश्वविद्यालय परीक्षा प्रणाली की गंभीर चूक करार दिया और कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की।
जांच रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हुई FIR
हाई लेवल कमेटी की रिपोर्ट सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के निर्देशों पर तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। मिर्धा कॉलेज के प्राचार्य की ओर से नागौर कोतवाली थाने में परीक्षक सुरेशचंद बेंदा और उनके दो रिश्तेदारों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है।
इन पर सरकारी दस्तावेजों के साथ लापरवाही बरतने और परीक्षा की गोपनीयता भंग करने से संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस कर रही है विस्तृत जांच
नागौर कोतवाली पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की गहन जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वीडियो कब और कहां बनाया गया, इसे किसने वायरल किया और इस पूरे मामले में और किन लोगों की भूमिका रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इससे पहले भी इस तरह की लापरवाही हुई थी।
शिक्षा जगत में मचा हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालयों और परीक्षा मूल्यांकन कार्य से जुड़े कार्मिकों में चिंता का माहौल है। यह मामला न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़े संवेदनशील विषय को भी उजागर करता है।


