राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग मार्च महीने में ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनाव करवाने की योजना बना रहा है। आयोग के अधिकारियों के अनुसार 25 फरवरी के बाद कभी भी चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जा सकता है। कार्यक्रम जारी होते ही पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी, जिससे सरकारी और राजनीतिक गतिविधियों पर नियंत्रण रहेगा।
प्रदेश में लंबे समय से पंचायत चुनावों का इंतजार किया जा रहा था, क्योंकि अधिकांश पंचायतों का कार्यकाल करीब एक साल पहले ही पूरा हो चुका है। ऐसे में चुनावों की घोषणा को ग्रामीण लोकतंत्र के लिए अहम माना जा रहा है।
ग्राम पंचायतों का हुआ व्यापक पुनर्गठन
पंचायतीराज व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से राजस्थान में हाल ही में बड़े स्तर पर पुनर्गठन किया गया है। राज्य में 3,441 नई ग्राम पंचायतों का गठन किया गया है। इसके बाद प्रदेश में ग्राम पंचायतों की कुल संख्या बढ़कर 14,635 हो गई है। यह अब तक का सबसे बड़ा विस्तार माना जा रहा है।
नए पुनर्गठन के तहत पंचायतों में 45,000 से अधिक नए वार्ड बनाए गए हैं। इसके चलते वार्ड पंचों के पदों की संख्या एक लाख से अधिक हो गई है। इस बार पंचायत चुनावों में 45,000 से ज्यादा नए वार्ड पंच चुने जाएंगे। इसके साथ ही 14,635 सरपंचों के पदों के लिए भी मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनेंगे।
आठ नए जिला परिषद और 85 नई पंचायत समितियां
राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत पंचायत स्तर के साथ-साथ जिला और ब्लॉक स्तर पर भी बड़ा बदलाव हुआ है। प्रदेश में 85 नई पंचायत समितियों और 8 नए जिला परिषदों का गठन किया गया है। इसके बाद अब राजस्थान में पंचायत समितियों की कुल संख्या 450 और जिला परिषदों की संख्या 41 हो गई है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि नई बनी सभी पंचायत समितियों और जिला परिषदों में एक साथ चुनाव कराए जाएंगे। 450 पंचायत समितियों में से लगभग 400 पंचायत समितियों में पंचायत समिति सदस्यों और प्रधान पदों के लिए मतदान होगा। इससे प्रदेश में एक साथ बड़े पैमाने पर चुनावी गतिविधियां देखने को मिलेंगी।
मतदान प्रक्रिया में किए गए अहम बदलाव
इस बार पंचायतीराज चुनावों में मतदान प्रक्रिया को लेकर भी बदलाव किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार पंच और सरपंचों के चुनाव बैलेट पेपर यानी मतपत्र के माध्यम से कराए जाएंगे। वहीं पंचायत समिति सदस्यों और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम से होंगे।
इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग ने हाल ही में सभी जिला कलेक्टरों को विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। खास तौर पर बैलेट पेपर से होने वाले चुनावों की तैयारियों को लेकर निर्देश दिए गए हैं, ताकि मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
आचार संहिता लागू होने के बाद बढ़ेगी सख्ती
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसके तहत सरकारी योजनाओं की नई घोषणाओं, तबादलों और विकास कार्यों पर रोक लग जाएगी। राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की गतिविधियों पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था, मतदान कर्मियों की तैनाती और मतदाता जागरूकता अभियान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
ग्रामीण लोकतंत्र के लिए अहम चुनाव
पंचायतीराज चुनावों को ग्रामीण लोकतंत्र की रीढ़ माना जाता है। सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य सीधे तौर पर ग्रामीण विकास, स्थानीय योजनाओं और जनसमस्याओं से जुड़े होते हैं। लंबे समय से चुनाव न होने के कारण कई पंचायतों में प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा था।
अब चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में नई उम्मीद जगी है। राजनीतिक दलों ने भी अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन तेज हो गया है।


