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UGC के नए नियमों के खिलाफ राजस्थान में सड़कों पर उतरे संगठन, जयपुर से झुंझुनूं तक विरोध तेज

UGC के नए नियमों के खिलाफ राजस्थान में सड़कों पर उतरे संगठन, जयपुर से झुंझुनूं तक विरोध तेज

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर राजस्थान में विरोध तेज होता जा रहा है। राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के कई शहरों में सामाजिक संगठनों और सामान्य वर्ग के छात्रों ने सड़कों पर उतरकर अपना आक्रोश जाहिर किया। मंगलवार को जयपुर में ब्राह्मण महासभा, श्री राजपूत करणी सेना, कायस्थ महासभा और विभिन्न वैश्य संगठनों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और UGC से इन नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की।

पहले समझें, विवाद की जड़ क्या है

UGC ने 13 जनवरी को ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026’ को अधिसूचित किया है। इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता सुनिश्चित करना और भेदभाव से जुड़ी शिकायतों के लिए एक नई निगरानी व निवारण प्रणाली लागू करना बताया गया है।

नए प्रावधानों के सामने आने के बाद से ही इसे लेकर देशभर में बहस छिड़ गई है। समर्थकों का कहना है कि यह नियम जातिगत और सामाजिक भेदभाव को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जबकि विरोध करने वाले संगठनों और सामान्य वर्ग के छात्रों का आरोप है कि यह नियम एकतरफा हैं और इससे भेदभाव की नई व्यवस्था खड़ी हो सकती है।

जयपुर में एकजुट हुए कई संगठन

जयपुर में हुए प्रदर्शन के दौरान अलग-अलग सामाजिक संगठनों ने संयुक्त रूप से UGC के नए नियमों को असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शिक्षा संस्थानों में पहले से ही कई कानून और नियम मौजूद हैं, ऐसे में नए प्रावधान लाकर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को मानसिक और शैक्षणिक दबाव में डाला जा रहा है।

करणी सेना ने दी विधानसभा घेराव की चेतावनी

श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने UGC के इन नियमों की तुलना ब्रिटिश काल के रॉलेट एक्ट से की। उन्होंने आरोप लगाया कि नए नियमों में बिना वकील, बिना अपील और बिना सुनवाई के आरोप तय किए जा सकते हैं, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नियम वापस नहीं लिए गए तो पहले राजस्थान विधानसभा का घेराव किया जाएगा, इसके बाद लोकसभा घेराव और जरूरत पड़ी तो भारत बंद जैसे कड़े कदम भी उठाए जाएंगे।

राष्ट्रीय हिंदू महासभा ने नियमों को बताया काला कानून

राष्ट्रीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष विजय कौशिक ने इन नियमों को काला कानून करार देते हुए सवाल उठाया कि जब व्यापक स्तर पर शिकायतें सामने ही नहीं आ रही हैं, तो इतनी कठोर व्यवस्था लाने की क्या आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के नियम समाज में विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं और सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

अलवर और झुंझुनूं में भी उग्र प्रदर्शन

UGC के नए नियमों के खिलाफ विरोध केवल जयपुर तक सीमित नहीं रहा। झुंझुनूं में ब्राह्मण समाज के विभिन्न संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर इस कानून को सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एडवोकेट प्रदीप शर्मा ने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा कि यह नियम संविधान में दिए गए समानता के अधिकार और जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का सीधा उल्लंघन करते हैं।

इससे पहले अलवर में करणी सेना ने कंपनी बाग स्थित शहीद स्मारक पर प्रदर्शन कर नए नियमों का विरोध किया। संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री भूपेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि यह कानून समाज को बांटने वाला है और शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर की भावना को कमजोर करेगा।

नियमों के समर्थन में भी उठी आवाज

जहां एक ओर कई संगठन UGC के नए नियमों का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर छात्र संगठन एनएसयूआई ने इनका समर्थन किया है। एनएसयूआई के प्रदेश प्रवक्ता अमरदीप परिहार ने कहा कि इन नियमों का उद्देश्य छात्रों को भेदभाव से सुरक्षा देना है।

उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में 24×7 हेल्पलाइन, इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर, इक्वल कमेटी और इक्वल स्क्वाड का गठन अनिवार्य होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर संस्थानों की मान्यता रद्द करने या फंड रोकने जैसी सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है।

राजस्थान में और तेज हो सकता है आंदोलन

UGC के नए नियमों को लेकर जिस तरह से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में विरोध और समर्थन दोनों सामने आ रहे हैं, उससे साफ है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप ले सकता है। अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार और UGC के अगले कदम पर टिकी हुई हैं कि वह इस विरोध को देखते हुए नियमों में कोई संशोधन करती है या नहीं।

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