राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों को लेकर भजनलाल सरकार ने एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने तबादलों पर लगी रोक की अवधि को बढ़ाते हुए अब 14 फरवरी तक प्रतिबंध लागू कर दिया है। यह इसी महीने दूसरी बार है जब सरकार की ओर से तबादलों पर रोक को लेकर आदेश जारी किया गया है।
प्रशासनिक सुधार विभाग ने जारी किया आदेश
राज्य के प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से 26 जनवरी को इस संबंध में आदेश जारी किया गया। आदेश में बताया गया है कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राजस्थान में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम के तहत 14 फरवरी को अंतिम वोटर लिस्ट का प्रकाशन किया जाना है। इसी कारण चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर 14 फरवरी तक रोक लगाई गई है।
इन अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर प्रतिबंध
जारी आदेश के अनुसार मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर प्रतिबंध रहेगा। इनमें—
जिला कलक्टर
बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के रूप में लगे शिक्षक
उपखंड अधिकारी (SDM)
पटवारी
तहसीलदार
ग्राम सचिव
शामिल हैं। इन सभी की भूमिका मतदाता सूची के पुनरीक्षण में अहम होने के कारण तबादलों पर रोक लगाई गई है।
विशेष परिस्थिति में चुनाव आयोग से लेनी होगी अनुमति
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत सभी कलक्टर, अतिरिक्त जिला कलक्टर, सहायक कलक्टर, उपखंड अधिकारी आदि के ट्रांसफर भी इस प्रतिबंध के दायरे में रहेंगे। हालांकि, यदि किसी विशेष या अपरिहार्य परिस्थिति में तबादला आवश्यक हो, तो इसके लिए भारत निर्वाचन आयोग से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
पहले 7 फरवरी तक लगाई गई थी रोक
गौरतलब है कि इससे पहले प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से 1 जनवरी को भी एक आदेश जारी किया गया था। उस आदेश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर 7 फरवरी तक रोक लगाई गई थी। अब निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम को देखते हुए इस अवधि को बढ़ाकर 14 फरवरी कर दिया गया है।
सरकारी महकमे में हलचल
तबादलों पर रोक की अवधि बढ़ने से प्रशासनिक महकमे में हलचल देखने को मिल रही है। कई अधिकारी और कर्मचारी लंबे समय से तबादलों का इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब उन्हें 14 फरवरी के बाद ही किसी नए आदेश की उम्मीद करनी होगी।
चुनावी प्रक्रियाओं को सुचारु रखने की तैयारी
सरकार और निर्वाचन आयोग का मानना है कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। ऐसे में इस कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों की निरंतरता बनाए रखना जरूरी है, ताकि अंतिम वोटर लिस्ट बिना किसी व्यवधान के तय समय पर प्रकाशित की जा सके।


