latest-newsअजमेरराजस्थान

RPSC पेपर लीक मामले में 1.20 करोड़ की कथित डील पर सियासी घमासान, लाई डिटेक्टर जांच की मांग की

RPSC पेपर लीक मामले में 1.20 करोड़ की कथित डील पर सियासी घमासान, लाई डिटेक्टर जांच की मांग की

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) से जुड़े पेपर लीक मामलों में जेल में बंद पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा को लेकर एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है। इस बार विवाद की वजह कटारा के RPSC सदस्य बनने के दौरान कथित तौर पर हुई 1.20 करोड़ रुपये की डील है। इस गंभीर आरोप को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, मध्य प्रदेश प्रभारी एवं बायतु विधायक हरीश चौधरी ने बड़ा बयान देते हुए पूरे मामले की लाई डिटेक्टर जांच कराने की मांग की है।

लाई डिटेक्टर जांच से सामने आएगी सच्चाई: हरीश चौधरी

हरीश चौधरी ने कहा कि विकसित भारत के दौर में ऐसे गंभीर मामलों की जांच वैज्ञानिक तरीकों से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि बाबूलाल कटारा और कथित रूप से डील करने वाले दूसरे पक्ष की लाई डिटेक्टर जांच कराई जाए, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। इससे पूरे राजस्थान को यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि कौन सही है और कौन गलत। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण में किसानों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है। हरीश चौधरी ने कहा कि पेपर लीक और भर्ती घोटालों ने प्रदेश के लाखों युवाओं का भरोसा तोड़ा है, जिसे बहाल करना अब सबसे बड़ी चुनौती है।

अप्रैल 2023 से जेल में बंद हैं बाबूलाल कटारा

गौरतलब है कि RPSC के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा अप्रैल 2023 से जेल में बंद हैं। उन पर शिक्षक भर्ती, सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती सहित कई बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक के गंभीर आरोप हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन मामलों में संगठित तरीके से पेपर लीक कर युवाओं के भविष्य के साथ धोखा किया गया। कटारा के RPSC में सदस्य रहते हुए कई महत्वपूर्ण भर्तियां हुई थीं, जिनमें बाद में गड़बड़ियों के आरोप सामने आए। इसी कड़ी में उनके सदस्य बनने के दौरान कथित तौर पर 1.20 करोड़ रुपये की डील होने का मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

बाड़मेर में बेरोजगार युवाओं का प्रदर्शन

मंगलवार को बाड़मेर जिला मुख्यालय पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बेरोजगार युवाओं ने पेपर लीक, OMR शीट घोटाले और नॉर्मलाइजेशन के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतरे और निष्पक्ष भर्तियों की मांग की। इस प्रदर्शन में शामिल होकर हरीश चौधरी ने युवाओं का समर्थन किया। उन्होंने मंच से बोलते हुए यह भी याद दिलाया कि बाबूलाल कटारा की गिरफ्तारी उनकी ही पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) द्वारा की गई थी और उन्हें जेल भेजा गया था।

एसओजी जांच में कटारा के कथित स्वीकारोक्ति का दावा

एसओजी की जांच के दौरान बाबूलाल कटारा द्वारा कथित तौर पर यह स्वीकार किए जाने का दावा किया गया है कि उन्हें 1.20 करोड़ रुपये की डील के तहत RPSC का सदस्य बनाया गया था। जांच में उस व्यक्ति का नाम भी दर्ज किया गया है, जिसने कथित रूप से यह डील कराई थी। हालांकि, जांच में नामजद दूसरा पक्ष इन आरोपों से पूरी तरह इनकार कर रहा है। उसका कहना है कि उसने न तो कोई डील की और न ही बाबूलाल कटारा की नियुक्ति में उसकी कोई भूमिका रही है। इसी विरोधाभास के चलते अब लाई डिटेक्टर जांच की मांग जोर पकड़ रही है।

पेपर लीक मामलों ने बढ़ाया राजनीतिक दबाव

RPSC से जुड़े पेपर लीक मामलों ने पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान की राजनीति को लगातार प्रभावित किया है। विपक्ष जहां सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष जांच एजेंसियों की कार्रवाई को अपनी उपलब्धि बता रहा है। बाबूलाल कटारा प्रकरण में 1.20 करोड़ की कथित डील का मुद्दा सामने आने के बाद यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक सवाल भी बन गया है। लाई डिटेक्टर जांच की मांग से आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासत और गर्माने के संकेत मिल रहे हैं।

युवाओं की निगाहें जांच पर टिकीं

इस पूरे विवाद के बीच लाखों बेरोजगार युवाओं की नजरें जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर टिकी हुई हैं। युवाओं की मांग है कि पेपर लीक और भर्ती घोटालों में शामिल सभी दोषियों को सख्त सजा मिले, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading