अजमेर के गवर्नमेंट कॉलेज (GCA ) के प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल द्वारा पाकिस्तान को ‘बड़ा भाई’ बताए जाने के कथित बयान ने जिले में राजनीतिक और शैक्षणिक माहौल को गरमा दिया है। इस बयान के विरोध में मंगलवार को यूथ कांग्रेस ने कॉलेज परिसर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए सड़क जाम की स्थिति बनी, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कॉलेज के मुख्य द्वार पर चढ़कर नारेबाजी की और प्रिंसिपल के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। इस दौरान “देश विरोधी बयान बर्दाश्त नहीं”, “प्राचार्य इस्तीफा दो” जैसे नारे गूंजते रहे। हालात को देखते हुए पुलिस को मौके पर अतिरिक्त जाप्ता तैनात करना पड़ा।
GCA कॉलेज गेट पर पुतला टांगने और जलाने को लेकर तनाव
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कॉलेज के मुख्य द्वार पर प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल का पुतला टांग दिया। कुछ देर बाद पुतले में आग लगा दी गई, जिसको लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस की स्थिति भी बनी। हालांकि, पुलिस ने मौके पर स्थिति को नियंत्रित रखा और किसी बड़े टकराव से बचाव किया। क्लॉक टावर थाना प्रभारी भीकाराम पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखी गई, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। कॉलेज परिसर और आसपास के इलाकों में पुलिस सतर्कता बनाए हुए है।
सात दिन में इस्तीफे की मांग, आंदोलन की चेतावनी
यूथ कांग्रेस ने प्रिंसिपल से सात दिन के भीतर इस्तीफा देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि निर्धारित समय में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यूथ कांग्रेस जिला अध्यक्ष मोहित मल्होत्रा ने कहा कि एक बड़े शैक्षणिक संस्थान के प्रिंसिपल को अपने पद की गरिमा और जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक सार्वजनिक मंच या कॉन्फ्रेंस में इस तरह का बयान देना न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि इससे कॉलेज में पढ़ने वाले करीब 12 हजार छात्रों के भविष्य पर भी सवाल खड़े होते हैं। उनके अनुसार, इस तरह की बयानबाजी से शैक्षणिक माहौल प्रभावित होता है और छात्रों में गलत संदेश जाता है।
छात्र नेताओं के आरोप और आगे की रणनीति
प्रदर्शन के दौरान यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मोहित मल्होत्रा के साथ छात्र नेता लकी जैन भी मौजूद रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रिंसिपल की मानसिकता बीजेपी और आरएसएस से प्रेरित है और ऐसे बयान किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किए जा सकते। छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह विरोध केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि आगे इसे चरणबद्ध आंदोलन के रूप में चलाया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि जल्द ही जिला शिक्षा अधिकारी और उच्च शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि सात दिनों के भीतर सरकार या प्रशासन की ओर से कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती है, तो उग्र आंदोलन किए जाएंगे।
प्रशासन अलर्ट, कानून-व्यवस्था पर नजर
घटनाक्रम को देखते हुए प्रशासन ने कॉलेज परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और किसी भी तरह की अव्यवस्था से निपटने के लिए पर्याप्त बल तैनात किया गया है। प्रशासन का प्राथमिक उद्देश्य शांति बनाए रखना और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न होने देना है। GCA कॉलेज के प्रिंसिपल के बयान को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक और शैक्षणिक बहस का विषय बन गया है। यूथ कांग्रेस की सात दिन की चेतावनी और आंदोलन की घोषणा के बाद अब सबकी नजरें प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।


