भारत ने स्वतंत्रता दिवस और दिवाली के बाद अब गणतंत्र दिवस पर भी पाकिस्तानी रेंजर्स को मिठाई न देने का निर्णय लिया है। गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि इस वर्ष 26 जनवरी के अवसर पर सीमा पर मिठाई के पारंपरिक आदान-प्रदान की परंपरा नहीं निभाई जाएगी। सरकार का साफ संदेश है कि “मिठाई और आतंक एक साथ नहीं चल सकते।” इसी के साथ सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की अवांछनीय या संदिग्ध गतिविधि को रोका जा सके।
आतंकी हमले के बाद तोड़ी गई परंपरा
भारत और पाकिस्तान के बीच वर्षों से यह परंपरा रही है कि राष्ट्रीय पर्व और प्रमुख धार्मिक त्योहारों पर सीमा पर मिठाई का आदान-प्रदान किया जाता है। भारत की ओर से बीएसएफ और पाकिस्तान की ओर से रेंजर्स इस प्रतीकात्मक परंपरा को निभाते रहे हैं। हालांकि, गत वर्ष 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद केंद्र सरकार ने इस परंपरा को रोकने का फैसला लिया। सरकार और सुरक्षा बलों का रुख स्पष्ट है कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद जारी रहेगा, तब तक सद्भावना के ऐसे प्रतीकात्मक कदम नहीं उठाए जाएंगे।
पिछले साल गणतंत्र दिवस पर भेजी गई थी मिठाई
जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष गणतंत्र दिवस पर आखिरी बार बीएसएफ की ओर से पाकिस्तानी रेंजर्स को मिठाई भेजी गई थी। हालांकि पाकिस्तान की गतिविधियों के कारण यह परंपरा पिछले कुछ वर्षों से लगातार बाधित होती रही है। इससे पहले 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद भी भारत ने पाकिस्तान को मिठाई नहीं भेजी थी। वहीं, जब भारत ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया, तब पाकिस्तान ने विरोध स्वरूप बीएसएफ द्वारा भेजी गई मिठाई स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।
सुरक्षा व्यवस्था और सख्त
गृह मंत्रालय ने बीएसएफ को यह भी निर्देश दिए हैं कि गणतंत्र दिवस के मद्देनज़र सीमा पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए। गश्त, निगरानी और खुफिया समन्वय को मजबूत किया गया है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते निष्क्रिय किया जा सके। सरकार का मानना है कि प्रतीकात्मक कूटनीति से अधिक जरूरी देश की सुरक्षा और नागरिकों की जान की रक्षा है।
आतंक के खिलाफ सख्त नीति का संकेत
गणतंत्र दिवस पर मिठाई न भेजने के फैसले को भारत की आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम न केवल पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत किसी भी कीमत पर आतंकवाद को सामान्य मानने के लिए तैयार नहीं है।


