राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज (RUHS) में आज “Allergenius 2.0 (Advancing Allergy Medicine)” विषय पर एक महत्वपूर्ण वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस वर्कशॉप में भारत में तेजी से बढ़ रहे एलर्जी से जुड़े रोगों—जैसे एलर्जिक राइनाइटिस, अस्थमा, फूड एलर्जी और ड्रग एलर्जी—के प्रभावी प्रबंधन, आधुनिक डायग्नोसिस, रिसर्च और ट्रीटमेंट विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला में देश के वरिष्ठ चिकित्सकों और एलर्जी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और बताया कि बदलती जीवनशैली, प्रदूषण, खानपान की आदतों और दवाओं के बढ़ते उपयोग के कारण एलर्जी रोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
RUHS हॉस्पिटल में एलर्जी क्लिनिक की घोषणा
वर्कशॉप के समापन के बाद RUHS के कुलगुरु डॉ. प्रमोद येवले ने एक अहम घोषणा करते हुए कहा कि RUHS हॉस्पिटल में जल्द ही एक समर्पित एलर्जी क्लिनिक शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही एलर्जी की सटीक जांच के लिए एडवांस एलर्जी लैब भी स्थापित की जाएगी। डॉ. येवले ने कहा कि सरकारी स्तर पर इस तरह की विशेष क्लिनिक की शुरुआत से उन मरीजों को लाभ मिलेगा, जो महंगे निजी अस्पतालों में इलाज कराने में असमर्थ होते हैं।
डायग्नोस्टिक्स से लेकर सर्जरी तक पर चर्चा
इस कार्यक्रम का आयोजन डॉ. मोनिश ग्रोवर, डॉ. गौरव गुप्ता और डॉ. राघव मेहता के नेतृत्व में किया गया। आयोजन समिति की ओर से जानकारी देते हुए डॉ. मोनिश ग्रोवर ने बताया कि वर्कशॉप में एलर्जी से जुड़े हर पहलू पर वैज्ञानिक और व्यावहारिक चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि वर्कशॉप के दौरान—
एलर्जी डायग्नोस्टिक्स की आधुनिक तकनीक
स्किन प्रिक टेस्टिंग
स्पाइरोमैट्री द्वारा अस्थमा की जांच
एलर्जी का मेडिकल मैनेजमेंट
एलर्जी में सर्जरी की भूमिका
एलर्जी से जुड़े सामान्य मिथक और भ्रांतियां
जैसे विषयों पर विस्तार से सत्र आयोजित किए गए।
भारत में 30 प्रतिशत लोग एलर्जी से प्रभावित
डॉ. ग्रोवर ने बताया कि आज भारत की लगभग 30 प्रतिशत आबादी किसी न किसी एलर्जी रोग से प्रभावित है, लेकिन एलर्जी की सही जांच और उपचार की सुविधाएं हर जगह उपलब्ध नहीं हैं। खासतौर पर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में एलर्जी को अक्सर सामान्य सर्दी-खांसी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे रोग गंभीर रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि अगर बड़े शहरों के सरकारी अस्पतालों में इस तरह की एलर्जी क्लिनिक शुरू होती हैं, तो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को समय पर सही इलाज मिल सकेगा।
अगले महीने से ओपीडी होगी शुरू
डॉ. ग्रोवर ने जानकारी दी कि अगले महीने से RUHS एलर्जी क्लिनिक की ओपीडी सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी। इस क्लिनिक में मरीजों की उन सभी एलर्जी की जांच की जाएगी, जिनसे उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि कई मरीजों को—
गेहूं
धूल-मिट्टी
पराग कण
कुछ खास खाद्य पदार्थ
दवाओं में उपयोग होने वाले अलग-अलग सॉल्ट
से एलर्जी होती है, लेकिन सही कारण पता न चल पाने के कारण इलाज अधूरा रह जाता है। एलर्जी क्लिनिक में इन सभी एलर्जी की पहचान कर व्यक्तिगत ट्रीटमेंट प्लान तैयार किया जाएगा।
राजस्थान के लिए अहम पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि RUHS में एलर्जी क्लिनिक और एडवांस लैब की शुरुआत राजस्थान में एलर्जी चिकित्सा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी। इससे न केवल मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि मेडिकल स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स को भी एलर्जी मेडिसिन के क्षेत्र में नई सीख और शोध के अवसर मिलेंगे।


