राजस्थान सरकार के शहरी विकास एवं आवासन (UDH) मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने शनिवार (25 जनवरी) को सीकर नगर परिषद में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान मंत्री खर्रा ने मीडिया से बातचीत में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और नगर निकायों, भूमि आवंटन तथा अतिक्रमण को लेकर पूर्ववर्ती सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए।
2018 से 2023 के बीच नगर निकायों की संपत्तियों का हुआ बंदरबांट: खर्रा
नगर परिषद और यूआईटी की ओर से आवासीय कॉलोनियों के विस्तार को लेकर पूछे गए सवाल पर यूडीएच मंत्री ने कहा कि 2018 से 2023 के दौरान नगर निकायों के पास उपलब्ध भूमि और संपत्तियों का बड़े पैमाने पर बंदरबांट किया गया। खर्रा ने आरोप लगाया कि उस समय नगर निकायों की जमीनों पर पट्टे जारी कर दिए गए, जिनमें से कई अब विवादों में हैं। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि कई जगहों पर मुकदमे दर्ज हो चुके हैं और बड़ी संख्या में पट्टे निरस्त किए जा रहे हैं।
सीमा विस्तार के बाद नगर निकायों को मिली नई सरकारी भूमि
यूडीएच मंत्री ने बताया कि वर्तमान सरकार ने सभी नगर निकायों का सीमा विस्तार किया है। इसके बाद बड़ी मात्रा में नई सरकारी भूमि नगर निकायों के अधिकार क्षेत्र में आई है। उन्होंने कहा कि जहां भी व्यावसायिक या आवासीय योजना विकसित करने की आवश्यकता होगी, वहां सरकार योजनाबद्ध तरीके से विकास कराएगी। मंत्री के अनुसार वर्ष 2026 में सरकार इसी दिशा में ठोस कदम आगे बढ़ाएगी।
1973-74 से शुरू हुई अतिक्रमण की गंभीर समस्या
शहरों में अतिक्रमण की समस्या पर बोलते हुए झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें 1973-74 तक जाती हैं। उन्होंने बताया कि उस समय भारत सरकार और तत्कालीन राजस्थान सरकार ने अधिकारियों पर दबाव डालकर सरकारी जमीनों पर पट्टे बांटने के निर्देश दिए थे। इसके लिए लक्ष्य भी निर्धारित किए गए थे, जिससे सरकारी संपत्तियों का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ।
लोगों में बनी गलत धारणा, कब्जा करो और नियमन हो जाएगा
मंत्री खर्रा ने कहा कि उस दौर के फैसलों के कारण लोगों के मन में यह धारणा बन गई कि सरकारी जमीनों पर कब्जा करना आसान है। उन्होंने कहा, “धीरे-धीरे यह सोच बन गई कि पहले अतिक्रमण करो, फिर किसी न किसी तरह उसका नियमन हो जाएगा।” यही वजह है कि पिछले कई दशकों में शहरों में अवैध अतिक्रमण लगातार बढ़ता चला गया।
अतिक्रमण के खिलाफ सरकार का सख्त रुख
यूडीएच मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में जयपुर सहित कई शहरों में प्रतिदिन करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। यह अभियान केवल जयपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के अन्य शहरों में भी लगातार जारी है।
सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार और जनता साथ
शहरों की सफाई व्यवस्था पर बोलते हुए खर्रा ने कहा कि सरकार अपने स्तर पर हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सफाई के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ जन सहयोग भी मिल रहा है, जिससे शहरों की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
सरकार का फोकस: नियोजित विकास और पारदर्शिता
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बयानों से साफ है कि राज्य सरकार का फोकस नियोजित शहरी विकास, अतिक्रमण मुक्त शहर और पारदर्शी भूमि प्रबंधन पर है। सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में इन कदमों का असर जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।


