मेवाड़ अंचल के प्रसिद्ध कृष्ण धाम श्री सांवलियाजी मंदिर में भंडार की छह राउंड की काउंटिंग पूरी हो चुकी है। शुक्रवार को अंतिम चरण की गणना समाप्त होने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि श्रद्धालुओं की आस्था महंगाई और सोने-चांदी के रिकॉर्ड भावों के बावजूद अटूट बनी हुई है। इस बार मंदिर को नकद, ऑनलाइन दान, मनी ऑर्डर, चेक और कीमती धातुओं के रूप में कुल 35 करोड़ 40 लाख 93 हजार 313 रुपये की आय हुई है। मंदिर मंडल के अनुसार यह राशि न केवल बीते वर्षों के मुकाबले महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि देश-विदेश में बसे श्रद्धालु आज भी सांवरा सेठ पर पूर्ण विश्वास रखते हैं।
छह राउंड में पूरी हुई भंडार काउंटिंग, नकद से मिली 28.68 करोड़ की राशि
मंदिर भंडार 17 जनवरी को कृष्ण पक्ष चतुर्दशी के दिन खोला गया था। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से छह राउंड में नकद काउंटिंग की गई। पहले दिन ही भंडार से 10 करोड़ 25 लाख रुपये की गणना हुई, जिसने इस बार भी बड़े रिकॉर्ड की ओर संकेत दे दिया था। इसके बाद विभिन्न तिथियों पर काउंटिंग का क्रम इस प्रकार रहा—
19 जनवरी को 5 करोड़ 54 लाख 25 हजार रुपये
20 जनवरी को 6 करोड़ 43 लाख 25 हजार रुपये
21 जनवरी को 4 करोड़ 59 लाख 15 हजार रुपये
22 जनवरी को 1 करोड़ 78 लाख 17 हजार 41 रुपये
23 जनवरी को अंतिम राउंड में 8 लाख 31 हजार 127 रुपये
इन सभी राउंड को मिलाकर भंडार से कुल 28 करोड़ 68 लाख 13 हजार 168 रुपये नकद प्राप्त हुए। काउंटिंग के दौरान मंदिर परिसर में प्रशासनिक अधिकारी, मंदिर मंडल सदस्य और सुरक्षा एजेंसियां मौजूद रहीं। पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी निगरानी और बैंकिंग नियमों के तहत संपन्न हुई।
रविवार को नहीं हुई नकद काउंटिंग, सुरक्षा मानकों का पालन
18 जनवरी को रविवार होने के कारण बैंक बंद रहे। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नकद काउंटिंग केवल बैंकिंग दिवसों में ही की जाती है, जिससे सुरक्षा और पारदर्शिता बनी रहे। हालांकि इस दौरान श्रद्धालुओं के दर्शन और पूजा व्यवस्था पूरी तरह सामान्य रही।
ऑनलाइन, मनी ऑर्डर और चेक से 6.72 करोड़ की अतिरिक्त आय
नकद चढ़ावे के अलावा श्रद्धालुओं ने डिजिटल माध्यमों का भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया। मंदिर प्रशासन के अनुसार एक माह की अवधि में— ऑनलाइन दान, मनी ऑर्डर और चेक से 6 करोड़ 72 लाख 80 हजार 145 रुपये की आय हुई। मंदिर मंडल का मानना है कि ऑनलाइन सुविधा शुरू होने के बाद देश-विदेश में रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए दान करना आसान हुआ है, जिससे कुल आय में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
सोना-चांदी के रिकॉर्ड भाव के बावजूद 3.70 करोड़ की भेंट
सांवरा सेठ के दरबार में केवल नकद ही नहीं, बल्कि सोना और चांदी भी बड़ी श्रद्धा से अर्पित की जाती है। इस बार भंडार और भेंट कक्ष से—
592 ग्राम 780 मिलीग्राम सोना
112 किलो 723 ग्राम चांदी
प्राप्त हुई। राजस्थान सर्राफा संघ के प्रदेश महामंत्री किशन पिछोली के अनुसार मौजूदा बाजार भाव के हिसाब से सोने की कीमत लगभग 90 लाख रुपये और चांदी की कीमत करीब 2 करोड़ 80 लाख रुपये आंकी गई है। इस प्रकार कुल सोना-चांदी की भेंट लगभग 3 करोड़ 70 लाख रुपये रही।
भृगु ऋषि के चरण चिन्ह वाली अनूठी मूर्ति, 10 मिनट के विशेष दर्शन
श्री सांवलियाजी मंदिर की विशेषता केवल भंडार तक सीमित नहीं है। यहां विराजित भगवान की एक मूर्ति के सीने पर भृगु ऋषि के चरण चिन्ह होने की मान्यता है। कथा के अनुसार, त्रिदेवों में श्रेष्ठता के निर्णय के दौरान भृगु ऋषि ने भगवान विष्णु के सीने पर चरण रखा था। भगवान विष्णु की विनम्रता से प्रभावित होकर उन्हें यज्ञ का फल समर्पित किया गया।
इस चरण चिन्ह के दर्शन श्रद्धालुओं को सुबह 4:50 से 5:00 बजे तक केवल 10 मिनट के लिए ही होते हैं। इसके बाद भगवान के वस्त्रों से इसे ढक दिया जाता है। देश-दुनिया में यह विशेषता किसी अन्य मंदिर में दुर्लभ मानी जाती है।
केलूपोश मकान से भव्य मंदिर तक का इतिहास
मंदिर का वर्तमान ढांचा करीब 3000 वर्गफुट क्षेत्र में फैला हुआ है। प्रारंभ में यह मंदिर एक साधारण केलूपोश मकान में था। बाद में भिंडर रियासत के राजा मदन सिंह भिंडर ने इसका जीर्णोद्धार करवाया।
इससे जुड़ी कथा के अनुसार बेट द्वारका यात्रा के दौरान राजा की नाव समुद्र में फंस गई थी। पूरा भगत की जय के उद्घोष से नाव सुरक्षित बच गई। बाद में ज्ञात हुआ कि पूरा भगत भादसोड़ा गांव के निवासी थे। उनकी इच्छा पर ही राजा ने सांवलियाजी मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार करवाया।
सांवरा सेठ पर अटूट विश्वास, हर कार्य से पहले अर्पित होती है पहली पत्रिका
यह मान्यता भी प्रचलित है कि विवाह सहित किसी भी शुभ कार्य की पहली पत्रिका सांवरा सेठ को अर्पित की जाती है। श्रद्धालु मानते हैं कि ठाकुरजी का आशीर्वाद मिलने के बाद ही कार्य सफल होता है।


