राजस्थान के बहुचर्चित एकल पट्टा प्रकरण में एक बार फिर से बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ट्रायल (एसीबी) कोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को इस मामले में अग्रिम जांच करने की अनुमति दे दी है। एसीबी की ओर से दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह आदेश पारित किया, जिससे अब मामले की विस्तृत जांच का रास्ता साफ हो गया है।
यह प्रकरण लंबे समय से प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय रहा है। पहले इस मामले को बंद कर दिया गया था, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद एक बार फिर इसकी जांच की मांग उठी, जिसके चलते एसीबी ने कोर्ट से अनुमति मांगी थी।
गहलोत सरकार के समय बंद हुआ था मामला
गौरतलब है कि पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के कार्यकाल में एसीबी ने इस प्रकरण में आरोपी रहे तीनों सरकारी अधिकारियों सहित तत्कालीन मंत्री शांति धारीवाल को क्लीन चिट दे दी थी। इसके बाद मामले को औपचारिक रूप से बंद कर दिया गया था। उस समय एसीबी की ओर से कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट पेश की गई थी, जिसमें यह कहा गया था कि जांच में आरोप साबित नहीं हो पाए हैं। इस फैसले के बाद लंबे समय तक मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।
भजनलाल सरकार में फिर उठा जांच का मुद्दा
प्रदेश में सरकार बदलने के बाद भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार ने इस एकल पट्टा प्रकरण की उच्चस्तरीय और विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया। सरकार का मानना है कि मामला गंभीर प्रकृति का है और इसमें सभी तथ्यों की दोबारा गहन जांच आवश्यक है। इसी निर्णय के तहत एसीबी ने ट्रायल (एसीबी) कोर्ट में अग्रिम जांच की अनुमति के लिए प्रार्थना पत्र दायर किया था। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद एसीबी को अग्रिम जांच करने की छूट दे दी है।
एसीबी की ओर से हुई पैरवी
इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान एसीबी की ओर से स्पेशल लोक अभियोजक मदनमोहन नगायच ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष यह तर्क रखा कि मामले में कई पहलू ऐसे हैं, जिनकी अब तक समुचित जांच नहीं हो सकी है। कोर्ट ने दलीलों को स्वीकार करते हुए एसीबी को अग्रिम जांच की अनुमति प्रदान की, जिससे अब एजेंसी नए सिरे से तथ्यों की पड़ताल कर सकेगी।
अभियोजन वापसी आवेदन पर कोर्ट का रुख
इस प्रकरण में एक और अहम पहलू अभियोजन वापसी से जुड़ा रहा है। तत्कालीन एसीएस जीएस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर और जेडीए के जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी के खिलाफ अभियोजन वापस लेने को लेकर गहलोत सरकार के समय 19 जनवरी 2021 को एसीबी ने आवेदन किया था।
करीब पांच साल बाद भजनलाल सरकार ने उस आवेदन को वापस लेने के लिए कोर्ट में नया प्रार्थना पत्र दायर किया। हालांकि एसीबी कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2021 में ही उस अभियोजन वापसी के आवेदन को खारिज किया जा चुका है, ऐसे में उसे वापस लेने का कोई औचित्य नहीं बनता।
मामले की शुरुआत और गिरफ्तारी का इतिहास
यह मामला जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) द्वारा 29 जून 2011 को गणपति कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर शैलेंद्र गर्ग के नाम जारी किए गए एकल पट्टे से जुड़ा है। इस पट्टे को लेकर वर्ष 2013 में परिवादी रामशरण सिंह ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के बाद एसीबी ने जांच करते हुए तत्कालीन एसीएस जीएस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर, जेडीए के जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी सहित शैलेंद्र गर्ग और दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। बाद में एसीबी कोर्ट में इनके खिलाफ चालान भी पेश किया गया।
पट्टा निरस्त और क्लोजर रिपोर्ट
मामला तूल पकड़ने के बाद संबंधित विभाग ने 25 मई 2013 को एकल पट्टा निरस्त कर दिया था। इसके बाद सरकार बदलने पर एसीबी ने तीन क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में पेश कीं, जिनमें तीनों अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी गई। साल 2021 में सरकार की ओर से तीनों अधिकारियों के खिलाफ मामला वापस लेने का आवेदन भी दायर किया गया, जिसे एसीबी कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
एसीबी कोर्ट के फैसले के खिलाफ तीनों अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 17 जनवरी 2023 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष में फैसला देते हुए केस वापस लेने को सही माना। हालांकि इस आदेश के खिलाफ अशोक पाठक ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने 5 नवंबर 2024 को हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश स्वयं इस मामले की सुनवाई करें। फिलहाल हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जारी है।
अग्रिम जांच से बढ़ी हलचल
अब एसीबी को अग्रिम जांच की अनुमति मिलने के बाद यह प्रकरण एक बार फिर चर्चा में आ गया है। माना जा रहा है कि जांच के दायरे में कई नए तथ्य और जिम्मेदारियां सामने आ सकती हैं।


