राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित रीट भर्ती परीक्षा को लेकर उठ रहे सवालों और बदले हुए पेपर पैटर्न पर बोर्ड के अध्यक्ष मेजर जनरल आलोक राज ने कई अहम बातें स्पष्ट की हैं। उन्होंने साफ कहा है कि अब भर्ती परीक्षाओं में रटे-रटाए सवालों की जगह लॉजिकल और विश्लेषणात्मक सोच पर आधारित प्रश्न पूछे जाएंगे, ताकि वास्तविक रूप से योग्य अभ्यर्थियों का चयन हो सके।
पटवारी परीक्षा से मिली अहम सीख
मेजर जनरल आलोक राज ने बताया कि पटवारी भर्ती परीक्षा के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने बोर्ड को फीडबैक दिया था कि परीक्षा का स्तर बेहद कम था। उन्होंने कहा कि कई उम्मीदवारों ने यहां तक कहा कि परीक्षा में योग्य और अयोग्य अभ्यर्थियों के बीच कोई फर्क नजर नहीं आया। इसी फीडबैक को गंभीरता से लेते हुए बोर्ड ने तय किया कि आगे आने वाली परीक्षाओं में सवालों का स्तर बेहतर और चुनौतीपूर्ण बनाया जाएगा।
अब रटे सवाल नहीं, लॉजिकल सोच की होगी परीक्षा
RSSB अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बोर्ड का उद्देश्य केवल किताबों से रटे हुए प्रश्न पूछना नहीं है। अब ऐसे सवाल तैयार किए जा रहे हैं जिनमें अभ्यर्थियों को दिमाग का इस्तेमाल करना पड़े। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं का मकसद सिर्फ नंबर देना नहीं, बल्कि उम्मीदवार की समझ, विश्लेषण क्षमता और विषय पर पकड़ को परखना है। इसी कारण परीक्षा के पेपर पैटर्न में बदलाव किया गया है।
REET परीक्षा में बढ़ाया गया सवालों का स्तर
आलोक राज ने बताया कि इसी नीति के तहत रीट भर्ती परीक्षा में प्रश्नों का स्तर पहले की तुलना में बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि जो अभ्यर्थी पूरी तैयारी के साथ परीक्षा में शामिल हुए, उन्हें यह पेपर सहज लगा, जबकि जिन उम्मीदवारों ने तैयारी में कमी रखी, उनकी ओर से आपत्तियां सामने आईं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाली सभी परीक्षाओं में इसी तरह के सवाल पूछे जाएंगे।
OMR बदलने के आरोपों पर बोर्ड की सफाई
चतुर्थ श्रेणी भर्ती परीक्षा में OMR शीट बदले जाने के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए RSSB अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह के आरोप लगाए गए हैं, लेकिन इनमें कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि यह दावा किया गया कि 10 हजार OMR शीट बदली गईं, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को अपनी बात रखने की आजादी है, लेकिन तथ्य आधारित आरोप ही स्वीकार्य हो सकते हैं।
परीक्षा परिणामों में पारदर्शिता पर जोर
आलोक राज ने बताया कि बोर्ड ने इस बार परीक्षा परिणामों में पूरी पारदर्शिता बरती है। परिणाम जारी करते समय अभ्यर्थी का नाम, पिता का नाम और प्राप्तांक जैसी सभी जानकारियां सार्वजनिक की गई हैं। इसका उद्देश्य यही है कि किसी भी तरह की शंका या भ्रम की गुंजाइश न रहे। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई 10 मामलों के ठोस उदाहरण भी प्रस्तुत कर दे, तो बोर्ड उसकी जांच कराने को तैयार है।
नॉर्मलाइजेशन पर भी स्पष्ट किया फॉर्मूला
नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर भी RSSB अध्यक्ष ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नॉर्मलाइजेशन एक तय और वैज्ञानिक फॉर्मूले के आधार पर किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि हर शिफ्ट से लगभग समान संख्या में अभ्यर्थियों का चयन हो सके।
उन्होंने बताया कि हर शिफ्ट से करीब छह हजार उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ाया जाता है और इसके बाद एक कॉमन मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है। इसी मेरिट के आधार पर मार्क्स घटाए-बढ़ाए जाते हैं ताकि किसी भी शिफ्ट के अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो।
हर वर्ग को तय नियमों के तहत प्राथमिकता
मेजर जनरल आलोक राज ने यह भी स्पष्ट किया कि नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया में सभी वर्गों को तय सरकारी नियमों और आरक्षण नीति के अनुसार प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने कहा कि जो अभ्यर्थी अपनी-अपनी शिफ्ट में टॉप रैंकिंग में रहे हैं, उन्हीं का चयन हुआ है और इसमें किसी तरह का मनमाना फैसला नहीं लिया गया।
भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने की कोशिश
RSSB अध्यक्ष ने कहा कि बोर्ड का प्रयास है कि राजस्थान में होने वाली सभी भर्ती परीक्षाएं निष्पक्ष, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण हों। पेपर पैटर्न में बदलाव, परिणामों में पारदर्शिता और नॉर्मलाइजेशन जैसे कदम इसी दिशा में उठाए गए हैं, ताकि योग्य उम्मीदवारों का चयन सुनिश्चित किया जा सके और परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनी रहे।


