latest-newsराजस्थान

बसंत पंचमी 2026: जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

बसंत पंचमी 2026: जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दिन विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। विद्यार्थी विशेष रूप से इस दिन मां शारदा से ज्ञान, स्मरण शक्ति और सफलता का आशीर्वाद मांगते हैं। बसंत पंचमी को न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह ऋतु परिवर्तन का संकेत देती है और बसंत ऋतु के आगमन की घोषणा करती है। इस पर्व की एक खास बात यह भी है कि इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है। यानी इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करना, विद्यारंभ और अन्य मांगलिक कार्य बिना किसी विशेष मुहूर्त देखे किए जा सकते हैं।

इस बार बसंत पंचमी की तिथि को लेकर क्यों है असमंजस

पिछले कुछ वर्षों से बसंत पंचमी का पर्व फरवरी माह में मनाया जा रहा था। इसी कारण इस वर्ष जब पंचमी तिथि जनवरी में बन रही है, तो लोगों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कोई 23 जनवरी को बसंत पंचमी बता रहा है, तो कोई 24 जनवरी को। इस असमंजस को दूर करने के लिए पंचांग और उदिया तिथि को समझना आवश्यक है।

कब है बसंत पंचमी 2026: सही तिथि क्या कहता है पंचांग

हिंदू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी की पंचमी तिथि 23 जनवरी को रात 02:28 बजे प्रारंभ होगी और 24 जनवरी को रात 01:46 बजे समाप्त होगी। सनातन परंपरा में किसी भी पर्व का निर्धारण उदिया तिथि के आधार पर किया जाता है। उदिया तिथि का अर्थ है वह तिथि जो सूर्योदय के समय विद्यमान हो। चूंकि 23 जनवरी को सूर्योदय के समय पंचमी तिथि रहेगी, इसलिए बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी, शुक्रवार को ही मनाया जाएगा। यही तिथि धार्मिक दृष्टि से मान्य और शास्त्रसम्मत मानी जाएगी।

बसंत पंचमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

बसंत पंचमी का संबंध ज्ञान, कला, संगीत और वाणी से है। मां सरस्वती को ब्रह्मा की मानस पुत्री माना जाता है और उन्हें श्वेत वस्त्र धारण करने वाली, वीणा व पुस्तक धारण किए हुए देवी के रूप में पूजा जाता है। यह पर्व विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व रखता है। कई स्थानों पर इसी दिन छोटे बच्चों का विद्यारंभ संस्कार कराया जाता है। पीले रंग का प्रयोग इस पर्व की पहचान है, जो ऊर्जा, सकारात्मकता और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।

सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा सूर्योदय के बाद और मध्याह्न से पहले करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस वर्ष बसंत पंचमी पर पूजा का सबसे शुभ समय 23 जनवरी को सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। इस प्रकार मां सरस्वती की आराधना के लिए लगभग 5 घंटे 20 मिनट का उत्तम समय उपलब्ध रहेगा। इस अवधि में की गई पूजा को विशेष फलदायी माना गया है।

बसंत पंचमी पर पूजा की सरल और सटीक विधि

बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा विधि सरल होते हुए भी अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। पूजा विधि को श्रद्धा और शुद्ध भाव से करना सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है।

पीले रंग का महत्व

इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। पीला रंग बसंत ऋतु, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।

पूजा की तैयारी

प्रातः स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल पर मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। देवी के सामने एक कलश रखें और पूजा स्थल को स्वच्छ रखें।

पुष्प और भोग अर्पण

मां सरस्वती को पीले रंग के पुष्प, विशेषकर पीले गेंदे के फूल अर्पित करें। भोग में बेसन के लड्डू, केसरिया भात या मीठे चावल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व

मां सरस्वती विद्या की देवी हैं, इसलिए विद्यार्थी अपनी पुस्तकें, कॉपियां और कलम मां के चरणों में रखकर आशीर्वाद मांग सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे पढ़ाई में एकाग्रता और सफलता प्राप्त होती है।

वंदना और आरती

अंत में सरस्वती वंदना का पाठ करें और मां की आरती उतारें। पूजा के दौरान मन को शांत और एकाग्र रखें।

बसंत पंचमी पर किए जाने वाले शुभ कार्य

बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यापार की शुरुआत, वाहन या संपत्ति की खरीद और विद्यारंभ जैसे कार्य बिना किसी अतिरिक्त मुहूर्त के किए जा सकते हैं। बसंत पंचमी 2026 इस बार 23 जनवरी को मनाई जाएगी। तिथि को लेकर फैले भ्रम के बीच पंचांग और उदिया तिथि के अनुसार यही सही और मान्य दिन है। मां सरस्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। श्रद्धा, नियम और विधि के साथ की गई पूजा निश्चित रूप से विद्या, बुद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करेगी।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading