अजमेर के महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (MDSU) में छात्रों से उत्तरपुस्तिकाएं जांच करवाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पिछले सप्ताह सामने आए एक वायरल वीडियो ने विश्वविद्यालय प्रशासन से लेकर छात्र संगठनों तक को सकते में डाल दिया है। वीडियो के वायरल होते ही परिसर में हंगामा मच गया और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पूरे मामले में जांच पूरी कर लेने और दोषियों की पहचान होने की बात कही है, जिसके बाद जल्द सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
वीडियो वायरल होने के बाद मचा बवाल
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कुछ छात्र विश्वविद्यालय की परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं जांचते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो सामने आने के बाद छात्र संगठनों एबीवीपी और एनएसयूआई ने तीखा विरोध दर्ज कराया। दोनों संगठनों ने इसे परीक्षा प्रणाली की गंभीर अनियमितता बताते हुए कहा कि इस तरह के कृत्य योग्य और मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ हैं। छात्र संगठनों का आरोप है कि यदि उत्तरपुस्तिकाएं छात्रों से जांची जाएंगी, तो निष्पक्ष मूल्यांकन की उम्मीद कैसे की जा सकती है। इस मामले ने विश्वविद्यालय की साख और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच में शिक्षक और दो छात्रों की पहचान
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी बयान के अनुसार, इस मामले की प्रारंभिक जांच पूरी कर ली गई है। परीक्षा नियंत्रक सुनील कुमार टेलर ने बताया कि जांच में नागौर शहर के एक शिक्षक की पहचान की गई है, जिनकी देखरेख में यह गंभीर अनियमितता हुई। इसके साथ ही वायरल वीडियो में नजर आ रहे एक युवक और एक युवती की भी पहचान कर ली गई है। प्रशासन का कहना है कि यह कृत्य विश्वविद्यालय के परीक्षा नियमों का खुला उल्लंघन है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
परीक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन
परीक्षा नियंत्रक ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली में उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन केवल अधिकृत और नियुक्त परीक्षकों द्वारा ही किया जा सकता है। छात्रों से कॉपियां जांच करवाना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे पूरे मूल्यांकन तंत्र की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है। प्रशासन के अनुसार, इस मामले में नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। दोषी पाए जाने पर संबंधित शिक्षक और छात्रों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
वीडियो में दिखा गंभीर मज़ाक और लापरवाही
वायरल वीडियो में बीए प्रथम वर्ष, सेमेस्टर-2 के हिस्ट्री ऑफ इंडिया विषय की उत्तरपुस्तिकाएं साफ तौर पर दिखाई दे रही थीं। वीडियो में परीक्षा की तारीख, विषय का नाम और विश्वविद्यालय का लोगो भी स्पष्ट नजर आ रहा था, जिससे इसकी प्रामाणिकता पर कोई संदेह नहीं रह जाता। बताया गया कि ये उत्तरपुस्तिकाएं 12 नवंबर को हुई परीक्षा से संबंधित थीं। वीडियो में युवक और युवती न केवल कॉपियां जांचते दिख रहे थे, बल्कि उत्तरों को पढ़ते हुए परीक्षार्थियों का मज़ाक उड़ाते और हंसते हुए भी नजर आए। इस दृश्य ने छात्रों और अभिभावकों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया।
छात्र संगठनों का विरोध और मांग
एबीवीपी और एनएसयूआई ने इस मामले में दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। छात्र नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो विश्वविद्यालय में परीक्षाओं की विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। छात्र संगठनों ने यह भी मांग की है कि पूरे परीक्षा मूल्यांकन तंत्र की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो।
प्रशासन के बयान से बढ़ी हलचल
परीक्षा नियंत्रक के बयान के बाद पूरे विश्वविद्यालय परिसर में हलचल तेज हो गई है। शिक्षक समुदाय और छात्र दोनों ही यह जानने को उत्सुक हैं कि प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है। माना जा रहा है कि विश्वविद्यालय अपनी छवि को बचाने और परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए कड़ा फैसला ले सकता है।
विश्वविद्यालय की साख पर बड़ा सवाल
एमडीएसयू जैसे बड़े और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में इस तरह की घटना सामने आना शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाती है और दोषियों को सख्त सजा मिलती है, तभी छात्रों का भरोसा दोबारा कायम हो सकेगा।
फिलहाल, सबकी निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि एमडीएसयू इस गंभीर अनियमितता पर कितनी सख्ती से पेश आता है।


