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राम जलसेतु लिंक परियोजना से बदलेगा राजस्थान का जल भविष्य

राम जलसेतु लिंक परियोजना से बदलेगा राजस्थान का जल भविष्य

राजस्थान की महत्वाकांक्षी राम जलसेतु लिंक परियोजना, जिसे संशोधित पार्वती–कालीसिंध–चंबल (PKC) लिंक परियोजना के नाम से भी जाना जाता है, राज्य के जल भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रयास है। इस परियोजना के तहत चंबल नदी पर 2.3 किलोमीटर लंबे विशाल जलसेतु यानी एक्वाडक्ट का निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है, जिसे जून 2028 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इस एक्वाडक्ट के निर्माण पर करीब 2,330 करोड़ रुपए की लागत आएगी और यह परियोजना मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सीधी निगरानी में क्रियान्वित की जा रही है।

कोटा और बूंदी को जोड़ेगा चंबल एक्वाडक्ट

राम जलसेतु लिंक परियोजना के प्रथम चरण के पैकेज-2 के अंतर्गत बन रहा यह चंबल एक्वाडक्ट एक ओर कोटा जिले की दीगोद तहसील के पीपलदा समेल गांव और दूसरी ओर बूंदी जिले की इंद्रगढ़ तहसील के गोहाटा गांव को जोड़ेगा। इस एक्वाडक्ट के माध्यम से कालीसिंध नदी पर बने नवनेरा बैराज से पंप हाउस द्वारा पानी लिफ्ट कर मेज नदी में छोड़ा जाएगा। इसके बाद मेज बैराज से पंप हाउस और फीडर प्रणाली के जरिए पानी गलवा बांध तक पहुंचेगा। गलवा बांध से आगे यह पानी बीसलपुर और ईसरदा बांध तक भेजा जाएगा, जिससे राजस्थान के बड़े हिस्से की जल आवश्यकता पूरी होगी।

निर्माण कार्य में तेज़ी, 90 प्रतिशत तैयारी पूरी

चंबल एक्वाडक्ट के निर्माण स्थल पर बुनियादी ढांचे का काम लगभग पूरा हो चुका है। कैंप और बैचिंग प्लांट का करीब 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण किया जा चुका है। एक्वाडक्ट के लिए कुल 15 टेस्ट पाइल प्रस्तावित हैं, जिनमें से 8 टेस्ट पाइल का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं, कुल 5,060 वर्किंग पाइल प्रस्तावित हैं, जिनमें से अब तक 860 पाइल का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। निर्माण एजेंसियां प्रतिदिन 15 से 20 पाइल का कार्य कर रही हैं, जिसके लिए 12 रिंग मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि परियोजना तय समयसीमा के भीतर पूरी करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

जल परिवहन के साथ मिलेगा नया आवागमन मार्ग

चंबल नदी पर बनने वाला यह एक्वाडक्ट केवल जल परिवहन के लिए ही नहीं, बल्कि आमजन के लिए एक अतिरिक्त आवागमन मार्ग के रूप में भी उपयोगी होगा। इससे कोटा और बूंदी जिलों के बीच संपर्क बेहतर होगा और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

परियोजना के तहत होंगे कई बड़े निर्माण कार्य

राम जलसेतु लिंक परियोजना केवल चंबल एक्वाडक्ट तक सीमित नहीं है। इसके तहत राज्य में जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए कई बड़े निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं। इनमें

  • ईसरदा से रामगढ़ बांध (जयपुर) तक फीडर

  • ईसरदा से खुरा चैनपुरा–बंध बरेठा (भरतपुर) तक फीडर

  • मोरसागर कृत्रिम जलाशय

  • बीसलपुर से मोरसागर तक फीडर

  • खुरा चैनपुरा से जयसमंद (अलवर) तक फीडर

  • ब्राह्मणी बैराज का निर्माण

शामिल हैं। इन सभी कार्यों पर कुल 14,600 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

17 जिलों की 3.25 करोड़ आबादी को मिलेगा पेयजल

राम जलसेतु लिंक परियोजना पर कुल मिलाकर करीब 90 हजार करोड़ रुपए की लागत आएगी। परियोजना के प्रथम चरण में राजस्थान के 17 जिलों की लगभग 3 करोड़ 25 लाख आबादी को पीने का पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इन जिलों में जयपुर, झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, दौसा, करौली, धौलपुर, भरतपुर, डीग, अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, अजमेर, ब्यावर और टोंक शामिल हैं।

दूसरे चरण में सिंचाई और उद्योगों को मिलेगा लाभ

परियोजना के दूसरे चरण में केवल पेयजल ही नहीं, बल्कि सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए भी पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा, औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा और राजस्थान की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

राजस्थान के जल संकट का दीर्घकालिक समाधान

राम जलसेतु लिंक परियोजना को राजस्थान के जल संकट के दीर्घकालिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है। चंबल, कालीसिंध और पार्वती नदियों के जल का समुचित उपयोग कर यह परियोजना न केवल प्यासे इलाकों को राहत देगी, बल्कि राज्य के संतुलित विकास की नींव भी मजबूत करेगी।

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