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SIR ड्राफ्ट लिस्ट पर डोटासरा का बड़ा आरोप, BJP कर रही वोट चोरी

SIR ड्राफ्ट लिस्ट पर डोटासरा का बड़ा आरोप, BJP कर रही वोट चोरी

राजस्थान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) ड्राफ्ट लिस्ट को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में जारी SIR ड्राफ्ट लिस्ट में करीब 45 लाख मतदाताओं के नाम गायब कर दिए गए हैं। डोटासरा ने इसे भाजपा द्वारा की जा रही “वोट चोरी” करार देते हुए लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया। नई दिल्ली स्थित AICC मुख्यालय में आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में गोविंद सिंह डोटासरा के साथ नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने एक सुर में भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखे सवाल उठाए और पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बताया।

45 लाख मतदाता ASD श्रेणी में डाले गए

डोटासरा ने कहा कि SIR प्रक्रिया के बाद जो ड्राफ्ट लिस्ट जारी की गई, उसमें 45 लाख लोगों को Absent, Shifted और Death यानी ASD श्रेणी में डाल दिया गया। इसका मतलब यह है कि जब तक ये लोग प्रमाण नहीं देंगे, तब तक वे अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार अगर किसी मतदाता का नाम जोड़ना है तो वह दस्तावेजों के आधार पर किया जा सकता है, लेकिन 2002 की वोटर लिस्ट से मैपिंग के बाद इतने बड़े पैमाने पर नाम काटने का कोई औचित्य नहीं था।

3 जनवरी के बाद बदला पूरा खेल

डोटासरा के मुताबिक, 15 जनवरी तक आपत्तियां मांगी गई थीं और 3 जनवरी तक पूरी प्रक्रिया सामान्य रूप से चल रही थी। उन्होंने दावा किया कि 3 जनवरी को भाजपा के संगठन महासचिव बी.एल. संतोष राजस्थान आए, वहां बैठकों का दौर चला और इसके बाद वोट जोड़ने और काटने का खेल शुरू हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद फर्जी तरीके से नाम जोड़ने और नाम काटने के लिए योजनाबद्ध ढंग से आवेदन दिए गए, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

चुनाव आयोग की वेबसाइट के आंकड़ों का हवाला

गोविंद सिंह डोटासरा ने अपनी बात को मजबूती देने के लिए चुनाव आयोग की वेबसाइट से लिए गए आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 17 दिसंबर से 14 जनवरी के बीच भाजपा ने 937 बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) के माध्यम से 211 नाम जोड़ने और 5,694 नाम काटने के आवेदन दिए। इसके मुकाबले कांग्रेस पार्टी ने 110 BLA के माध्यम से केवल 185 नाम जोड़ने और 2 नाम हटाने के आवेदन किए। डोटासरा ने कहा कि इससे साफ है कि नाम काटने की प्रक्रिया में असंतुलन है और इसका सीधा नुकसान कांग्रेस समर्थक मतदाताओं को पहुंचाया गया।

कुछ विधानसभा क्षेत्रों में एक दिन में हजारों फॉर्म

डोटासरा ने झुंझुनू जिले के उदाहरण देते हुए कहा कि यहां एक ही दिन में 13,882 फॉर्म-7 जमा कराए गए। मंडावा में 16,276, उदयपुरवाटी में 1,241 और खेतड़ी में 1,478 फॉर्म दिए गए। उन्होंने दावा किया कि कुल मिलाकर करीब 1 लाख 40 हजार फॉर्म रजिस्टर करवा दिए गए। 13, 14 और 15 जनवरी को हजारों नाम काटे गए, जो नियमों के खिलाफ है।

नियमों की अनदेखी का आरोप

डोटासरा ने कहा कि नियम पुस्तिका स्पष्ट रूप से बताती है कि ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद एक BLA एक दिन में केवल 10 फॉर्म ही दे सकता है। इसके बावजूद हजारों फॉर्म एक साथ जमा कराए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं ने विशेष रूप से उन विधानसभा क्षेत्रों को चिन्हित किया, जहां कांग्रेस ने चुनाव जीते थे, और वहां कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े मतदाताओं के नाम काटने के फॉर्म दिए गए।

फर्जी हस्ताक्षर और अधूरे फॉर्म

डोटासरा ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में भाजपा के विधायक, मंत्री और विधायक प्रत्याशियों ने BLA के फर्जी हस्ताक्षर करके हजारों फॉर्म SDM कार्यालयों में जमा कराए। उन्होंने कहा कि उनकी खुद की विधानसभा में 627 फॉर्म जमा कराए गए और जब 2,000 और फॉर्म लाए गए तो SDM ने उन्हें लेने से इनकार कर दिया। कई BLAs ने मीडिया के सामने आकर कहा कि फॉर्म पर उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं और कई फॉर्म अधूरे हैं, जिनमें मोबाइल नंबर तक दर्ज नहीं हैं।

चुनाव आयोग से शिकायत

डोटासरा ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के अधिकारी नवीन महाजन से मुलाकात की है और पूरे कथित फर्जीवाड़े की जानकारी दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है कि यदि उन्हें नौकरी बचानी है तो इन फॉर्म्स को स्वीकार करें। कांग्रेस ने कई जिला कलेक्टरों से सूची मंगवाई है और उसके प्रमाण भी पार्टी के पास मौजूद हैं।

लोकतंत्र की हत्या का आरोप

प्रेस वार्ता के अंत में डोटासरा ने कहा कि राजस्थान में हालात ऐसे हो गए हैं कि भाजपा के विधायक खुद ही नाम काटने के हजारों फॉर्म जमा करवा रहे हैं और सफाई देते हैं कि वे बांग्लादेशी या रोहिंग्या लोगों के नाम कटवा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर लोकतंत्र की हत्या की जा रही है और भाजपा ‘वोट चोरी’ को अंजाम देना चाहती है। डोटासरा ने इसे पूरी तरह से सिस्टम का दुरुपयोग बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।

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