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SIR प्रक्रिया पर शांति धारीवाल का आरोप, वोटर लिस्ट से नाम काटने की साजिश का दावा

SIR प्रक्रिया पर शांति धारीवाल का आरोप, वोटर लिस्ट से नाम काटने की साजिश का दावा

विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया को लेकर राजस्थान की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मंत्री एवं कोटा उत्तर से कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल ने निर्वाचन अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया को राजनीतिक दबाव में चलाया जा रहा है। धारीवाल ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार के इशारे पर कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की सुनियोजित साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है, बल्कि मताधिकार जैसे संवैधानिक अधिकार पर सीधा हमला है। धारीवाल के अनुसार, यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो हजारों पात्र मतदाता अपने मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

जिला निर्वाचन अधिकारी से मिला कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल

शांति धारीवाल के नेतृत्व में कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल जिला निर्वाचन अधिकारी से मिला। इस प्रतिनिधिमंडल में जिला कांग्रेस अध्यक्ष राखी गौतम और पीपल्दा विधायक चेतन पटेल भी शामिल रहे। बैठक के दौरान कांग्रेस नेताओं ने SIR प्रक्रिया के तहत हो रही कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए और स्पष्टीकरण मांगा। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए धारीवाल ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी उनके किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की चुप्पी और अस्पष्ट जवाबों से पूरी प्रक्रिया पर संदेह और गहरा हो गया है।

हजारों मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप

धारीवाल ने आरोप लगाया कि हजारों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया चल रही है, जो पूरी तरह नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह काम सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है और इसका मकसद आगामी चुनावों में एक खास राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाना है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन क्षेत्रों में कांग्रेस का प्रभाव अधिक है, वहां के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है। धारीवाल के अनुसार, यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।

बीजेपी से जुड़े बीएलओ पर गंभीर आरोप

पूर्व मंत्री शांति धारीवाल ने दावा किया कि बीजेपी से जुड़े बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को बुलाकर नियमों की खुली अवहेलना की गई। उन्होंने कहा कि नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि एक बीएलओ एक दिन में अधिकतम 10 फार्म नंबर 7 ही ले सकता है, लेकिन यहां एक ही दिन में सैकड़ों और हजारों फार्म भरवाए गए। धारीवाल ने इसे चुनावी प्रक्रिया में सीधी धांधली करार देते हुए कहा कि यह सब बिना प्रशासनिक मिलीभगत के संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी कवायद राजनीतिक लाभ के लिए की जा रही है।

नियमों की अनदेखी का लगाया आरोप

शांति धारीवाल ने SIR प्रक्रिया को लेकर तीन प्रमुख सवाल उठाए। पहला, नियमों के अनुसार यदि किसी प्रकार की आपत्ति आती है तो रिटर्निंग अधिकारी को सात दिन के भीतर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करनी होती है, लेकिन ऐसी कोई बैठक आयोजित नहीं की गई। दूसरा, जब एक दिन में 10 से अधिक फार्म नहीं लिए जा सकते, तो फिर हजारों फार्म कैसे स्वीकार किए गए। तीसरा और सबसे अहम सवाल यह है कि किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस देना अनिवार्य है, लेकिन धारीवाल के अनुसार एक भी मतदाता को नोटिस नहीं दिया गया।

नोटिस के बिना नाम काटने का आरोप

धारीवाल ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाना कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए स्पष्ट नियम और दिशा-निर्देश हैं। किसी भी मतदाता को पहले नोटिस देना, उसका पक्ष सुनना और दस्तावेजों की जांच करना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सभी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर सीधे नाम हटाने की कार्रवाई की जा रही है। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि संविधान के अनुच्छेदों की भी अवहेलना है।

कांग्रेस ने जताया आंदोलन का संकेत

शांति धारीवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक भी मतदाता का नाम गलत तरीके से काटा गया, तो कांग्रेस उसे सामने लाकर खड़ा करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और जरूरत पड़ी तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। धारीवाल ने साफ कहा कि प्रशासन और निर्वाचन तंत्र की मिलीभगत से बीजेपी को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगी।

लोकतंत्र पर खतरे का आरोप

कांग्रेस विधायक ने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव होती है। यदि इसी में हेरफेर शुरू हो जाए, तो निष्पक्ष चुनाव की कल्पना ही समाप्त हो जाती है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से भी इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। धारीवाल ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य वास्तविक मतदाताओं को जोड़ना होना चाहिए, न कि राजनीतिक आधार पर नाम हटाना।

राजनीतिक सरगर्मी तेज

SIR प्रक्रिया को लेकर लगाए गए इन आरोपों के बाद कोटा सहित पूरे राजस्थान में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस इसे लोकतंत्र की हत्या बता रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिए हैं कि यदि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आई, तो इसे सड़कों से लेकर न्यायालय तक ले जाया जाएगा।

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