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अजमेर SIR विवाद: 30-40 साल से रह रहे 244 मतदाताओं के नाम काटने की कोशिश

अजमेर SIR विवाद: 30-40 साल से रह रहे 244 मतदाताओं के नाम काटने की कोशिश

अजमेर  में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के लाखन कोटड़ी इलाके में 30 से 40 वर्षों से निवास कर रहे 244 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटवाने के लिए आपत्तियां दर्ज कराई गईं। जब स्थानीय लोगों को इस कार्रवाई की जानकारी मिली तो क्षेत्र में हड़कंप मच गया और मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया।

खाली फार्म पर साइन कराने का आरोप, युवक को लोगों ने पकड़ा

स्थानीय लोगों ने जब जांच-पड़ताल की तो उन्हें एक युवक के बारे में जानकारी मिली, जिसके जरिए इन आपत्तियों को दर्ज कराया गया था। क्षेत्रवासियों ने युवक को पकड़कर पूछताछ की। पूछताछ में युवक ने स्वीकार किया कि उसने भाजपा से जुड़े कुछ लोगों के कहने पर केवल खाली फार्मों पर हस्ताक्षर किए थे। बाद में इन्हीं हस्ताक्षरित फार्मों का उपयोग मतदाताओं की अनुपस्थिति दर्शाकर उनके नाम कटवाने के लिए किया गया।

लाखन कोटड़ी क्षेत्र का मामला, 866 में से 244 मतदाता निशाने पर

लाखन कोटड़ी निवासी मेहराज ने बताया कि अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में भाग संख्या न्यू 162 (पुरानी 138), वार्ड संख्या पुराना 11 और नया 13 शामिल है। इस क्षेत्र में कुल 866 मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें से 244 लोगों की अनुपस्थिति दर्शाते हुए आपत्तियां दर्ज कराई गईं। ये सभी मतदाता लंबे समय से उसी क्षेत्र में निवास कर रहे हैं और नियमित रूप से मतदान करते आए हैं।

बीएलओ से मिली जानकारी, खेमराज नाम आया सामने

मेहराज के अनुसार 16 जनवरी को बूथ लेवल अधिकारी (BLO) ने उन्हें जानकारी दी कि बड़ी संख्या में मतदाताओं को अनुपस्थित दर्शाया गया है। जांच करने पर पता चला कि यह कार्य खेमराज नाम के व्यक्ति द्वारा किया गया है। शुरुआत में खेमराज का कोई पता या मोबाइल नंबर उपलब्ध नहीं था, लेकिन बाद में मालूम चला कि वह उसी क्षेत्र का निवासी है। इसके बाद क्षेत्रवासियों ने उसे पकड़कर पूछताछ की।

पूछताछ में कबूलनामा, लेटर लिखवाकर छोड़ा

पूछताछ में खेमराज ने स्वीकार किया कि उसने भाजपा से जुड़े कुछ लोगों के कहने पर यह काम किया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने उससे निर्वाचन अधिकारी के नाम एक पत्र लिखवाया, जिसमें उसने स्वीकार किया कि फार्म संख्या 7 में दर्ज की गई आपत्तियां गलत थीं और केवल किसी के कहने पर खाली फार्मों पर हस्ताक्षर किए गए थे। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि जिन मतदाताओं को अनुपस्थित बताया गया, वे सभी वास्तव में क्षेत्र में मौजूद हैं।

निर्वाचन अधिकारी को सौंपा जाएगा पत्र

लाखन कोटड़ी निवासी लेखराज ने बताया कि खेमराज से लिखवाया गया यह पत्र अब निर्वाचन अधिकारी को सौंपा जाएगा। पत्र में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि आपत्तियां झूठी थीं और मतदाता सूची से नाम काटने का कोई वास्तविक आधार नहीं है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

प्रशासन का बयान, जांच के बाद ही कटते हैं नाम

इस मामले पर अतिरिक्त जिला कलेक्टर (अजमेर सिटी) नरेन्द्र कुमार मीणा ने स्पष्ट किया कि यदि किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज कराई गई है तो उसकी विधिवत जांच की जाती है। जांच में आपत्ति सही पाए जाने पर ही मतदाता सूची से नाम हटाया जाता है। केवल आपत्ति दर्ज हो जाने मात्र से किसी का नाम नहीं काटा जाता। प्रशासन स्तर पर मामले की जांच की जाएगी।

अलवर के रामगढ़ मामले से जुड़ा राजनीतिक विवाद

इसी बीच अलवर जिले के रामगढ़ क्षेत्र में भी SIR के तहत एक दिन में 1383 फर्जी आपत्तियां दर्ज होने के मामले ने राजनीतिक घमासान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ये आपत्तियां भाजपा के बीएलए के नाम पर दर्ज कराई गईं, जबकि संबंधित बीएलए ने अपने हस्ताक्षर से इनकार कर दिया है।

अशोक गहलोत और कांग्रेस नेताओं का भाजपा पर हमला

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा पर लोकतंत्र के चीरहरण का आरोप लगाया है। गहलोत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि रामगढ़ का मामला इस बात का प्रमाण है कि किस तरह कूटरचित दस्तावेजों के जरिए जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि यह केवल वोट चोरी नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश है, जिसका पूरे प्रदेश में प्रयास किया गया, लेकिन समय रहते इसका भंडाफोड़ हो गया।

राजस्थान में SIR प्रक्रिया पर बढ़ता सियासी तनाव

अजमेर और अलवर के मामलों के सामने आने के बाद राजस्थान में SIR प्रक्रिया को लेकर सियासी तनाव तेज हो गया है। विपक्षी दल निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासन का कहना है कि नियमों के तहत ही पूरी प्रक्रिया संचालित की जा रही है।

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