आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में इन दिनों एक ऐसा विवाद चल रहा है, जिसने पूरी टेक इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है। एक तरफ दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपति एलन मस्क हैं और दूसरी ओर चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई, जिसके साथ टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट भी मजबूती से खड़ा है। यह लड़ाई केवल तकनीक की नहीं, बल्कि भरोसे, सिद्धांतों और अरबों डॉलर के मुनाफे की है। एलन मस्क ने ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर कर 79 अरब डॉलर से लेकर 134 अरब डॉलर तक के हर्जाने की मांग की है। यह मामला अब कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में जूरी ट्रायल के जरिए सुना जाएगा, जिसकी शुरुआत अप्रैल के अंत में होने की संभावना है।
2015 से शुरू हुई कहानी, गैर-लाभकारी का सपना
इस विवाद की जड़ें साल 2015 में हैं, जब एलन मस्क और सैम ऑल्टमैन ने मिलकर ओपनएआई की स्थापना की थी। उस समय ओपनएआई को एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य ऐसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विकसित करना था, जो पूरी मानवता के लिए सुरक्षित और मुफ्त हो। एलन मस्क का दावा है कि उन्होंने इसी उद्देश्य से प्रेरित होकर शुरुआती दौर में करीब 38 लाख डॉलर का निवेश किया था। उनका कहना है कि ओपनएआई किसी एक कंपनी या कॉरपोरेट के नियंत्रण में न रहे, यही मूल समझौता था।
धोखे का आरोप और मुनाफे की राजनीति
एलन मस्क का आरोप है कि जैसे ही ओपनएआई को सफलता मिलने लगी, उसके मूल सिद्धांतों से समझौता कर लिया गया। मस्क के अनुसार, सैम ऑल्टमैन के नेतृत्व में ओपनएआई ने गैर-लाभकारी स्वरूप को पीछे छोड़ते हुए माइक्रोसॉफ्ट के साथ साझेदारी कर ली और इसे मुनाफा कमाने वाली संस्था बना दिया। मस्क इसे सिर्फ अपने साथ ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के साथ धोखा मानते हैं। उनका कहना है कि जिस एआई को सबके लिए खुला और पारदर्शी होना था, उसे अब माइक्रोसॉफ्ट के सर्वर और व्यावसायिक हितों के दायरे में सीमित कर दिया गया है।
500 अरब डॉलर की वैल्यूएशन और मस्क का दावा
आज ओपनएआई की वैल्यूएशन करीब 500 अरब डॉलर आंकी जा रही है। मस्क के वकीलों का तर्क है कि जिस तरह किसी स्टार्टअप में शुरुआती निवेशक को कंपनी के बड़े होने पर उसका उचित हिस्सा मिलता है, उसी तरह एलन मस्क भी ओपनएआई की मौजूदा सफलता में हिस्सेदार हैं। अदालत में मस्क की ओर से कहा गया है कि ओपनएआई ने कथित तौर पर 65.50 अरब से 109.43 अरब डॉलर तक का अनुचित लाभ कमाया है, जबकि माइक्रोसॉफ्ट को इस साझेदारी से 13.30 अरब से 25.06 अरब डॉलर तक का फायदा हुआ है। मस्क चाहते हैं कि न केवल उन्हें हर्जाना मिले, बल्कि इन कंपनियों पर भारी आर्थिक दंड भी लगाया जाए।
सैम ऑल्टमैन का जवाब और प्रतिस्पर्धा का आरोप
वहीं ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने एलन मस्क के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि यह मुकदमा पूरी तरह बेबुनियाद है और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा रहा है। ऑल्टमैन का आरोप है कि मस्क अब एआई की दौड़ में पीछे रह गए हैं और अपनी नई कंपनी xAI को आगे बढ़ाने के लिए ओपनएआई की रफ्तार धीमी करना चाहते हैं। ओपनएआई का यह भी कहना है कि मस्क ने 2018 में खुद ही बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था और उसके बाद कंपनी के फैसलों में उनकी कोई भूमिका नहीं रही।
माइक्रोसॉफ्ट की भूमिका और बढ़ता विवाद
इस पूरे विवाद में माइक्रोसॉफ्ट की भूमिका भी अहम है। अक्टूबर में ओपनएआई ने अपनी कॉर्पोरेट संरचना में बदलाव कर माइक्रोसॉफ्ट को करीब 27 प्रतिशत हिस्सेदारी दी थी। हालांकि कंपनी का दावा है कि अंतिम नियंत्रण अब भी गैर-लाभकारी संस्था के पास है, लेकिन एलन मस्क इस दावे को स्वीकार नहीं करते। माइक्रोसॉफ्ट ने फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अदालत में उसे भी मस्क के सवालों का सामना करना पड़ेगा।
एआई के भविष्य के सिद्धांतों की लड़ाई
यह मुकदमा सिर्फ अरबों डॉलर के हर्जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य और उसके नैतिक सिद्धांतों की लड़ाई भी बन चुका है। एलन मस्क का कहना है कि एआई जैसी ताकतवर तकनीक को कुछ कॉरपोरेट कंपनियों के नियंत्रण में नहीं छोड़ा जा सकता। अब सबकी नजरें कैलिफोर्निया की अदालत पर टिकी हैं, जहां ओपनएआई के अंदरूनी दस्तावेज और ईमेल इस बहस को और भी गहराई दे सकते हैं। यह तय होना बाकी है कि यह जंग सिर्फ एक कारोबारी विवाद बनकर रहेगी या एआई की दिशा और दशा को बदलने वाला ऐतिहासिक फैसला साबित होगी।


