राजस्थान में शनिवार से चार दिन तक चलने वाली बहुप्रतीक्षित शिक्षक भर्ती परीक्षा की शुरुआत हो गई है। पहले दिन लेवल-1 की परीक्षा आयोजित की गई, जो सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक चली। प्रदेशभर में बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर सख्त सुरक्षा व्यवस्था और दिशा-निर्देशों के बीच अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। इस महत्वपूर्ण परीक्षा के पहले ही दिन राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की सक्रियता भी साफ नजर आई।
जयपुर परीक्षा केंद्र पर पहुंचे बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज
परीक्षा के पहले दिन राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष मेजर जनरल आलोक राज स्वयं जयपुर के सुभाषचौक स्थित स्कूल में बनाए गए परीक्षा केंद्र पहुंचे। उन्होंने वहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और सुरक्षा इंतजामों को नजदीक से परखा। इस दौरान उन्होंने परीक्षा केंद्र पर तैनात महिला सुरक्षा कर्मियों से मेटल डिटेक्टर के माध्यम से अपनी जांच भी करवाई, ताकि यह संदेश जाए कि नियम सभी के लिए समान हैं और किसी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
ड्रेस कोड को लेकर सख्त रुख
निरीक्षण के दौरान बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज ने सुरक्षा कर्मचारियों को उस समय फटकार लगाई, जब उन्होंने महिला अभ्यर्थियों से दुपट्टा हटाने को कहा। आलोक राज ने मौके पर ही कर्मचारियों से ड्रेस कोड की सूची के बारे में पूछा और स्पष्ट किया कि नियमों की सही जानकारी होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि ड्रेस कोड का उद्देश्य अभ्यर्थियों को परेशान करना नहीं, बल्कि परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराना है।
परीक्षा केंद्रों पर क्यों करते हैं औचक निरीक्षण
मीडिया से बातचीत में आलोक राज ने बताया कि जब भी परीक्षा आयोजित होती है, वह कोशिश करते हैं कि कम से कम एक शिफ्ट में किसी एक परीक्षा केंद्र पर जरूर जाएं। इसका उद्देश्य यह देखना होता है कि ग्राउंड लेवल पर स्थिति कैसी है, परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाएं सही हैं या नहीं और बोर्ड द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं। उन्होंने कहा कि वे अभ्यर्थियों से सीधे बातचीत कर फीडबैक भी लेते हैं और पेपर की पैकिंग से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक हर पहलू की जांच करते हैं।
दुपट्टे को लेकर भ्रम पर दिया स्पष्टीकरण
ड्रेस कोड को लेकर उठे सवाल पर आलोक राज ने कहा कि बोर्ड समय-समय पर ड्रेस कोड में सुधार करता रहा है। वर्तमान में जो ड्रेस कोड लागू है, उसमें साफ तौर पर बताया गया है कि क्या पहनना अनुमत है और क्या नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुपट्टा पूरी तरह से अनुमत है, जबकि शॉल और स्टॉल जैसी वस्तुएं परीक्षा केंद्र में ले जाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने माना कि कभी-कभी कर्मचारियों या अभ्यर्थियों के मन में भ्रम की स्थिति बन जाती है, लेकिन ऐसे मामलों में बोर्ड की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा ताकि किसी तरह का कन्फ्यूजन न रहे।
पेपर लीक और फर्जीवाड़े पर क्या बोले बोर्ड अध्यक्ष
बीते वर्षों में हुई परीक्षाओं में पेपर लीक और फर्जी अभ्यर्थियों जैसी समस्याओं पर सवाल पूछे जाने पर आलोक राज ने कहा कि भविष्य में क्या होगा, यह कोई नहीं कह सकता, लेकिन बोर्ड की पूरी कोशिश है कि परीक्षाएं पूरी तरह साफ-सुथरे तरीके से हों। उन्होंने भरोसा जताया कि 2024 और 2025 में बोर्ड द्वारा कराई गई परीक्षाओं में अब तक किसी भी तरह की गड़बड़ी या पेपर लीक की घटना सामने नहीं आई है। उनका कहना था कि इसी दिशा में प्रयास जारी रहेंगे, ताकि अभ्यर्थियों का भरोसा बना रहे।
चार दिन तक चलेगी परीक्षा, निगरानी रहेगी सख्त
शिक्षक भर्ती परीक्षा चार दिन तक आयोजित की जाएगी, जिसमें अलग-अलग शिफ्ट में परीक्षाएं होंगी। बोर्ड की ओर से सभी परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी, सुरक्षा जांच और नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। बोर्ड अध्यक्ष का खुद मैदान में उतरकर निरीक्षण करना इस बात का संकेत है कि परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर प्रशासन गंभीर है। इससे अभ्यर्थियों में भी यह संदेश गया है कि मेहनत करने वालों को पूरा मौका मिलेगा और किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


