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SI भर्ती पेपर लीक केस: हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं की बड़ी दलील, सरकार पर उठे सवाल

SI भर्ती पेपर लीक केस: हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं की बड़ी दलील, सरकार पर उठे सवाल

राजस्थान एसआई भर्ती-2021 पेपर लीक मामले को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से सरकार और भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि यह प्रदेश के इतिहास में पहली बार हो रहा है, जब राज्य सरकार अपनी ही जांच एजेंसी के खिलाफ बहस कर रही है। इस मामले में एसओजी की रिपोर्ट को काल्पनिक करार देने की सरकारी कोशिशों पर भी कड़ी आपत्ति जताई गई।

SOG रिपोर्ट को बताया तथ्यात्मक दस्तावेज

याचिकाकर्ता कैलाशचंद्र शर्मा की ओर से अदालत में कहा गया कि एसओजी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं है, बल्कि तीन चार्जशीट पर आधारित एक ठोस और तथ्यात्मक दस्तावेज है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एसआई भर्ती परीक्षा 13 से 15 सितंबर 2021 के बीच आयोजित हुई थी और इस दौरान पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर पेपर लीक हुआ। इसके बावजूद सरकार और आयोग की ओर से समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए।

परीक्षा स्थगित नहीं करने पर उठे सवाल

याचिकाकर्ताओं के वकील हरेंद्र नील ने कोर्ट को बताया कि 13 सितंबर को ही पहला पेपर लीक हो गया था। यह पेपर चाचा-भतीजा ब्लूटूथ गैजेट गिरोह के तुलछाराम कालेर और सौरभ कालेर ने बीकानेर के रामसहाय सीनियर सेकेंडरी स्कूल से लीक किया। उसी दिन पाली और बीकानेर में मामले दर्ज हो गए थे, इसके बावजूद परीक्षा को स्थगित नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही करार दिया।

RPSC और परीक्षा केंद्रों की भूमिका पर सवाल

14 और 15 सितंबर को जयपुर से कई गिरोहों तक पेपर पहुंचाने वाले यूनिक भांभू और जगदीश विश्नोई के विदेश फरार होने का भी उल्लेख किया गया। इन दोनों पर एक-एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया है। इस दौरान कुल 11 एफआईआर दर्ज हुईं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि एक परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी के पास से मोबाइल फोन में पेपर की कॉपी भी बरामद हुई थी। इसके बावजूद आरपीएससी ने परीक्षा केंद्रों पर वीडियोग्राफी तक नहीं कराई, जिससे लीक के स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो गया।

SI भर्ती रद्द करने को लेकर कानूनी लड़ाई

उल्लेखनीय है कि 28 अगस्त को राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने एसआई भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया था। इस फैसले को चयनित अभ्यर्थियों ने खंडपीठ में चुनौती दी, जहां से एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी गई। इसके बाद अन्य अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने एकलपीठ के फैसले को बहाल करते हुए खंडपीठ को तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार की याचिका और अगली सुनवाई

एकलपीठ के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने भी याचिका दायर की है। सरकार का तर्क है कि पूरी भर्ती को रद्द करना उचित नहीं है और जांच एजेंसी अभी पात्र-अपात्र अभ्यर्थियों की छंटनी कर सकती है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि पेपर लीक पूरे प्रदेश में नहीं हुआ, इसलिए भर्ती रद्द नहीं की जानी चाहिए। फिलहाल राजस्थान हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जारी है, जो सोमवार 19 जनवरी से आगे बढ़ेगी।

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