राजस्थान में मतदाता सूचियों में कथित हेराफेरी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश में शामिल अधिकारियों की कानूनी जवाबदेही तय कराने के लिए पार्टी जल्द ही कोर्ट में याचिका दायर करेगी। जूली ने यह बयान उस समय दिया जब प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल सत्तारूढ़ दल के इशारे पर मतदाता सूची में छेड़छाड़ के लिए किया गया।
SIR प्रक्रिया में कांग्रेस समर्थित मतदाताओं को निशाना बनाने का आरोप
टीकाराम जूली ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान भाजपा ने कांग्रेस विचारधारा से जुड़े मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का प्रयास किया। जूली का दावा है कि प्रदेशभर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सतर्कता और सक्रियता के कारण यह कोशिश सफल नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बूथ स्तर पर निगरानी रखी और मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत उजागर किया, जिससे बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने की योजना विफल हो गई।
आपत्ति अवधि बढ़ाने पर उठे सवाल
टीकाराम जूली ने चुनाव आयोग के फैसले पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब भाजपा अपने प्रयासों में सफल नहीं हो सकी, तब बिना किसी स्पष्ट आवश्यकता के राजस्थान में SIR प्रक्रिया की आपत्ति अवधि को बढ़ा दिया गया। जूली ने इसे संदिग्ध बताते हुए कहा कि इससे सत्तारूढ़ दल को दोबारा मतदाता सूची में गड़बड़ी करने का मौका मिल सकता है। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील की कि SIR प्रक्रिया पूरी होने तक पूरी सतर्कता बरती जाए और किसी भी तरह की अनियमितता को होने से रोका जाए। जूली ने बताया कि कई जिलों से शिकायतें सामने आई हैं, जिनके आधार पर पार्टी ने कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
कोर्ट में जाएगी कांग्रेस, अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि कोर्ट में याचिका दायर कर उन अधिकारियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा, जो इस कथित हेराफेरी में शामिल पाए जाएंगे। जूली ने कहा कि यह लड़ाई केवल कांग्रेस की नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा की है।
अशोक गहलोत का हमला, बताया लोकतंत्र पर काला अध्याय
इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मतदाता सूची में कथित हेराफेरी को राजस्थान के लोकतंत्र के लिए काला अध्याय करार दिया। गहलोत का आरोप है कि सरकार ने चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया के अंतिम दिन निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों के माध्यम से बूथ लेवल अधिकारियों पर दबाव बनाया गया कि वे कांग्रेस समर्थित मतदाताओं के नाम हटाएं।
फॉर्म-7 और BLOs पर दबाव के गंभीर आरोप
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में नाम काटने के लिए इस्तेमाल होने वाला फॉर्म-7 पहले से भरा हुआ बूथ लेवल अधिकारियों को दिया गया। उन्होंने इसे निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव प्रणाली पर सीधा हमला बताया। गहलोत का कहना है कि जिन अधिकारियों ने इस कथित साजिश में शामिल होने से इनकार किया, उन्हें सत्ताधारी पार्टी से जुड़े लोगों द्वारा तबादलों की धमकियां दी गईं। उन्होंने दावा किया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र सरदारपुरा में भी ऐसे प्रयास किए गए।
निर्वाचन आयोग से की शिकायत, अधिकारियों को चेतावनी
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने राज्य निर्वाचन आयुक्त नवीन महाजन से फोन पर बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी दी और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। गहलोत ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन जो लोग संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करेंगे, उन्हें कानूनी परिणाम भुगतने होंगे।


