राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि भारतीय संस्कृति के अस्तित्व से ही हमारी पहचान जुड़ी हुई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि भारतीय संस्कृति सुरक्षित है, तो हम हैं और यदि संस्कृति कमजोर होगी, तो हमारी पहचान भी संकट में पड़ जाएगी। देवनानी ने संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति का संपूर्ण वैचारिक और आध्यात्मिक आधार संस्कृत भाषा में समाहित है। वे शुक्रवार को संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित संस्कृत के महान विद्वान पंडित गिरधर शर्मा की कृति ‘मेरी संसार यात्रा’ के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
संस्कृत महाविद्यालय में हुआ गरिमामय आयोजन
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी, राजस्थान पत्रिका के प्रमुख संपादक डॉ. गुलाब कोठारी, राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स के मानद महासचिव डॉ. के.एल. जैन और संस्कृत निदेशालय की निदेशक प्रियंका जोधावत भी मंचासीन रहे। सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से पंडित गिरधर शर्मा की कृति का विमोचन किया। कार्यक्रम में संस्कृत विद्वानों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे आयोजन का वातावरण पूर्णतः संस्कृतमय और सांस्कृतिक गरिमा से परिपूर्ण नजर आया।
संस्कृत में शपथ लेना मेरे लिए गौरव का विषय: देवनानी
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अपने संबोधन में बताया कि उन्होंने राजस्थान विधानसभा में अब तक पांचों बार विधायक बनने पर संस्कृत भाषा में ही शपथ ग्रहण की है। उन्होंने इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण क्षण बताया और कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि संस्कारों, मूल्यों और जीवन दर्शन की वाहक है। देवनानी ने कहा कि आज विश्व के अनेक देशों में संस्कृत पर शोध और अनुसंधान हो रहे हैं। विदेशी विश्वविद्यालयों में संस्कृत को अकादमिक विषय के रूप में अपनाया जा रहा है, जो इसकी वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।
‘मेरी संसार यात्रा’ युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा
देवनानी ने पंडित गिरधर शर्मा की कृति ‘मेरी संसार यात्रा’ की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पुस्तक युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि पंडित शर्मा ने अपना संपूर्ण जीवन विद्या, अध्ययन और संस्कारों के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि पंडित गिरधर शर्मा उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जब विद्या केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं थी, बल्कि जीवन पद्धति का आधार हुआ करती थी। उस समय सम्मान किसी पद से नहीं, बल्कि साधना और आचरण से प्राप्त होता था।
सनातन मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान
विधानसभा अध्यक्ष ने युवाओं से सनातन मूल्यों के प्रति समर्पण भाव से आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के जीवन मूल्यों और प्राचीन ज्ञान परंपराओं का गंभीर अध्ययन कर उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करना समय की आवश्यकता है। उनका कहना था कि आधुनिकता और तकनीक के साथ आगे बढ़ते हुए भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना ही भारत की असली शक्ति है।
संस्कृत विश्व की प्राचीनतम भाषा: घनश्याम तिवाड़ी
राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध भाषा है। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति में संस्कृत शिक्षा को विशेष स्थान दिया गया है, जिससे आने वाली पीढ़ियों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ेगी। तिवाड़ी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली में नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में ‘युगे-युगे भारते’ संग्रहालय का निर्माण नौ सौ कमरों में किया जा रहा है, जिसमें संस्कृत और भारतीय संस्कृति के प्रत्येक पहलू को प्रदर्शित किया जाएगा।
संस्कृत से ही संस्कृति की रक्षा संभव
घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि भारतीय संस्कृति की रक्षा संस्कृत के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि अब भारतीय संस्कृति के उत्थान का समय आ चुका है। इस अवसर पर उन्होंने संस्कृत महाविद्यालय में सांसद निधि से लिफ्ट लगाने की घोषणा भी की।
संस्कृत विश्व का मानचित्र है: डॉ. गुलाब कोठारी
राजस्थान पत्रिका के प्रमुख संपादक डॉ. गुलाब कोठारी ने कहा कि संस्कृत के सूक्ष्म भाव और वेद विज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड का पर्याय है। डॉ. कोठारी ने कहा कि संस्कृत देववाणी है और मां सरस्वती तथा मां लक्ष्मी से इसका गहरा संबंध है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के वैश्विक विस्तार के लिए निरंतर कार्य किए जाने पर जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में पंडित गिरधर शर्मा के पौत्र विकास चतुर्वेदी ने सभी अतिथियों और सहभागियों का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन संस्कृत, संस्कृति और सनातन मूल्यों के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।


