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राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज, महेंद्रजीत सिंह मालवीय की कांग्रेस में वापसी की अटकलें तेज

राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज, महेंद्रजीत सिंह मालवीय की कांग्रेस में वापसी की अटकलें तेज

राजस्थान की राजनीति में इन दिनों कड़ाके की ठंड के बीच सियासी तापमान चरम पर है। विधानसभा चुनाव के बाद से ही प्रदेश की राजनीति में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए वरिष्ठ आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि मालवीय की कांग्रेस में घर वापसी की पटकथा तैयार हो चुकी है। शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वॉर रूम में हुई अनुशासन कमेटी की अहम बैठक ने इन अटकलों को और मजबूती दे दी है। इस बैठक के बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों खेमों में हलचल तेज हो गई है।

अनुशासन कमेटी की बैठक में सात बड़े नामों पर मंथन

प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन कमेटी की बैठक में कुल सात प्रमुख नेताओं की संभावित वापसी पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद कमेटी के अध्यक्ष उदयलाल आंजना ने खुलासा किया कि महेंद्रजीत सिंह मालवीय के अलावा कांता भील, खिलाड़ीलाल बैरवा, कैलाश मीणा, सुभाष तंबोली और गोपाल गुर्जर जैसे नेताओं के नाम एजेंडे में शामिल थे। उदयलाल आंजना ने कहा कि ये सभी नेता कभी कांग्रेस परिवार का हिस्सा रहे हैं और अब उन्हें यह एहसास हो गया है कि कांग्रेस से बेहतर कोई राजनीतिक मंच नहीं है। उन्होंने संकेत दिए कि पार्टी नेतृत्व इन नेताओं की वापसी को लेकर सकारात्मक रुख अपना सकता है।

दिल्ली आलाकमान करेगा अंतिम फैसला

अनुशासन कमेटी की बैठक में हुए मंथन के बाद यह तय किया गया है कि कमेटी अपनी रिपोर्ट शनिवार तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को सौंपेगी। इसके बाद यह रिपोर्ट दिल्ली स्थित पार्टी आलाकमान को भेजी जाएगी, जहां से अंतिम निर्णय लिया जाएगा। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व इस पूरे मामले में बेहद सतर्कता से आगे बढ़ना चाहता है, ताकि किसी भी तरह की अंदरूनी असंतोष की स्थिति पैदा न हो।

भाजपा में भी अंदरूनी असंतोष के संकेत

इस बैठक के दौरान कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शकुंतला रावत के बयान ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी। उन्होंने दावा किया कि सिर्फ कांग्रेस छोड़कर गए नेता ही नहीं, बल्कि भाजपा के कई मूल नेता भी कांग्रेस के संपर्क में हैं। शकुंतला रावत के अनुसार, भाजपा की कार्यशैली से कई नेता नाराज हैं और आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। उनके इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि भाजपा के भीतर भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

वापसी से पहले नफा-नुकसान का आंकलन

कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम में किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहता। इसी कारण पार्टी ने जिलाध्यक्षों और स्थानीय नेताओं से फीडबैक लेना शुरू कर दिया है। यह जानने की कोशिश की जा रही है कि जिन नेताओं की वापसी की चर्चा है, उन्हें वापस लेने से स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं में कोई नाराजगी तो नहीं होगी। पार्टी के भीतर यह भी मंथन हुआ कि महेंद्रजीत सिंह मालवीय जैसे नेताओं की वापसी से आदिवासी क्षेत्रों में कांग्रेस को कितना राजनीतिक फायदा मिल सकता है और इसका असर आगामी चुनावों पर कैसे पड़ेगा।

मालवीय की वापसी से बढ़ी सियासी बेचैनी

महेंद्रजीत सिंह मालवीय की संभावित घर वापसी ने भाजपा खेमे में बेचैनी बढ़ा दी है, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्सुकता और उम्मीद दोनों दिखाई दे रही हैं। मालवीय को आदिवासी समाज का प्रभावशाली नेता माना जाता है और उनकी राजनीतिक पकड़ दक्षिण राजस्थान में मजबूत रही है। यदि उनकी वापसी होती है, तो यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जाएगा, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी प्रदेश में खुद को मजबूत करने की कोशिश में जुटी हुई है।

आने वाले दिनों में साफ होगी तस्वीर

फिलहाल राजस्थान की राजनीति में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अनुशासन कमेटी की रिपोर्ट और दिल्ली आलाकमान के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि महेंद्रजीत सिंह मालवीय और अन्य नेताओं की कांग्रेस में वापसी होगी या नहीं। लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में हलचल और तेज होने वाली है।

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