राजस्थान में वर्षों से सरकारी स्कूलों का शैक्षणिक सत्र जुलाई से शुरू होता रहा है, जबकि निजी और CBSE से जुड़े स्कूलों में पढ़ाई 1 अप्रैल से ही शुरू हो जाती है। इस अंतर के कारण बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला अप्रैल में ही निजी स्कूलों में करवा देते थे, जिससे सरकारी स्कूलों में नामांकन लगातार घटता जा रहा था। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राजस्थान शिक्षा विभाग ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब राज्य के सभी सरकारी स्कूल भी CBSE पैटर्न की तर्ज पर 1 अप्रैल से अपना नया शैक्षणिक सत्र शुरू करेंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के इस प्रस्ताव को राज्य सरकार की स्वीकृति मिल चुकी है और इसे आगामी सत्र से लागू किया जाएगा।
नामांकन बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया बड़ा फैसला
शिक्षा विभाग का मानना है कि अप्रैल से सत्र शुरू होने पर सरकारी स्कूल निजी स्कूलों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। अक्सर अभिभावक जुलाई तक इंतजार नहीं करना चाहते और अप्रैल में ही बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिला देते हैं। ऐसे में सरकारी स्कूल पीछे रह जाते थे। इस बदलाव से सरकारी स्कूलों में समय पर नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी और विद्यार्थियों को निजी स्कूलों की ओर जाने से रोका जा सकेगा। साथ ही शिक्षा की निरंतरता बनी रहेगी और अकादमिक प्लानिंग भी बेहतर ढंग से हो सकेगी।
परीक्षाओं और टेस्ट की तिथियों में किया गया संशोधन
नए शैक्षणिक कैलेंडर को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग ने परीक्षाओं की समय-सारिणी में भी बदलाव किया है। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 27 और 28 जनवरी को तृतीय टेस्ट आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद कक्षा 8वीं की बोर्ड परीक्षा 19 फरवरी से 4 मार्च तक कराई जाएगी, जबकि कक्षा 5वीं की बोर्ड परीक्षा 20 फरवरी से 5 मार्च के बीच आयोजित होगी। कक्षा 9वीं और 11वीं की वार्षिक परीक्षाएं भी इसी अवधि में शुरू की जाएंगी ताकि 30 मार्च तक सभी कक्षाओं के परीक्षा परिणाम घोषित किए जा सकें। इसके तुरंत बाद 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ कर दिया जाएगा।
परीक्षा समय को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश
शिक्षा विभाग ने परीक्षा संचालन को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कक्षा 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं दो पारियों में आयोजित होंगी। पहली पारी सुबह 8:30 बजे से 11:45 बजे तक और दूसरी पारी दोपहर 1:00 बजे से 4:15 बजे तक होगी। वहीं कक्षा 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षाएं दोपहर 1:30 बजे से 4:00 बजे तक आयोजित की जाएंगी। इससे परीक्षा संचालन में एकरूपता रहेगी और विद्यार्थियों व शिक्षकों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।
सिलेबस में कोई कटौती नहीं, पूरी तैयारी जरूरी
संशोधित परीक्षा कार्यक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परीक्षाएं एक महीने पहले होने के बावजूद पाठ्यक्रम में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की गई है। छात्रों को पूरा सिलेबस पढ़ना और उसकी पूरी तैयारी करनी होगी। विशेष रूप से कक्षा 8वीं के छात्रों को होली की छुट्टियों के दौरान भी पढ़ाई जारी रखनी होगी, क्योंकि उनकी बोर्ड परीक्षाएं मार्च के पहले सप्ताह तक चलेंगी। इससे छात्रों पर पढ़ाई का दबाव बढ़ सकता है, लेकिन शिक्षा विभाग का मानना है कि यह अकादमिक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
कक्षा 5वीं में तृतीय भाषा को लेकर विशेष व्यवस्था
कक्षा 5वीं में संस्कृत या अन्य तृतीय भाषा की परीक्षा केवल उन विशेष स्कूलों के लिए अनिवार्य होगी, जहां यह विषय पहले से लागू है। सामान्य स्कूलों में इसे लेकर छात्रों पर अतिरिक्त दबाव नहीं डाला जाएगा। इससे पाठ्यक्रम संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
जिलों को समय पर व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश
शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, प्रश्न पत्रों की गोपनीयता, मूल्यांकन प्रक्रिया और परिणाम जारी करने की तैयारियां समय पर पूरी की जाएं। किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि किसी भी नवीनतम सूचना या बदलाव के लिए शिक्षा विभाग के आधिकारिक पोर्टल और स्कूल स्तर से जारी सूचनाओं पर नियमित नजर बनाए रखें।


