राजस्थान में आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर निर्वाचन आयोग ने एक अहम और सख्त आदेश जारी किया है। चुनाव प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पूरी तरह पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण गतिविधियों की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी कराई जाएगी। आयोग का मानना है कि कैमरे की निगरानी से चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा और अधिक मजबूत होगा।
ईवीएम से जुड़ी हर प्रक्रिया कैमरे में कैद
निर्वाचन आयोग के आदेश के अनुसार ईवीएम की प्रथम स्तरीय जांच से लेकर मतदान के लिए ईवीएम तैयार करने, उनके सुरक्षित भंडारण और अभिरक्षा तक की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाएगी। इसके अलावा संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष रूप से कैमरे की नजर रहेगी। मतदान के दौरान यदि कहीं हिंसा, आगजनी या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होती है, तो उसकी रिकॉर्डिंग भी अनिवार्य रूप से की जाएगी।
मतगणना और परिणाम प्रक्रिया भी होगी रिकॉर्ड
आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल मतदान ही नहीं, बल्कि मतगणना की पूरी प्रक्रिया भी कैमरे में रिकॉर्ड की जाएगी। परिणाम निर्धारण के लिए अपनाई जाने वाली लॉटरी प्रक्रिया, मल्टी पोस्ट सिंगल वोट और मल्टी पोस्ट मल्टी वोट मशीनों को सील कर सुरक्षित रूप से संग्रहित करने तक की कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। इससे चुनाव परिणामों को लेकर किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में साक्ष्य उपलब्ध रहेंगे।
वीडियोग्राफरों के लिए सख्त दिशा-निर्देश
निर्वाचन आयोग ने वीडियोग्राफी कार्य में तैनात किए जाने वाले व्यक्तियों के लिए भी कड़े नियम तय किए हैं। किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्ति, चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार के मित्र या रिश्तेदार को वीडियोग्राफर नियुक्त नहीं किया जाएगा। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रिकॉर्डिंग पूरी तरह निष्पक्ष और बिना किसी प्रभाव के हो।
राजनीतिक संपर्क और आतिथ्य पर रोक
आदेश के अनुसार वीडियोग्राफर न तो किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार को अपनी सेवाएं देगा और न ही उनका किसी प्रकार का आतिथ्य स्वीकार करेगा। प्रत्येक रिकॉर्डिंग का पूरा विवरण एक लॉग बुक में दर्ज करना अनिवार्य होगा। यह लॉग बुक कार्य पूर्ण होने के बाद संबंधित रिटर्निंग अधिकारी को सौंपी जाएगी, ताकि रिकॉर्डिंग की पारदर्शिता और सत्यता बनी रहे।
राजनीतिक दलों को मिलेगी रिकॉर्डिंग की सुविधा
निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को निर्धारित शुल्क और तय प्रक्रिया के तहत वीडियोग्राफी का निरीक्षण करने और प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने की सुविधा दी जाएगी। इससे चुनाव प्रक्रिया में विश्वास बढ़ेगा और किसी भी तरह के आरोप-प्रत्यारोप को तथ्यों के आधार पर परखा जा सकेगा।


