मकर संक्रांति के अवसर पर पूरे देश में उत्सव और उल्लास का माहौल देखने को मिला। इस पर्व पर पतंग उड़ाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। जयपुर में भी मकर संक्रांति के दिन सुबह से लेकर शाम तक आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भरा रहा। छतों पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक पतंगबाजी का आनंद लेते नजर आए। हालांकि, इस उत्साह के बीच लापरवाही और खतरनाक मांझे ने कई परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया।
पतंगबाजी बच्चों के लिए बनी जानलेवा
जयपुर में मकर संक्रांति के दौरान पतंगबाजी कुछ बच्चों के लिए जानलेवा साबित हुई। अलग-अलग हादसों में दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए सवाई मानसिंह अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों के अनुसार दोनों बच्चों की हालत चिंताजनक बनी हुई है।
छत से गिरा 5 साल का रौनक
पहली घटना में 5 वर्षीय रौनक पतंगबाजी के दौरान छत से गिर गया। बताया जा रहा है कि वह छत पर पतंग उड़ाते समय संतुलन बिगड़ने से नीचे गिर पड़ा। गिरने से उसके सिर और शरीर में गंभीर चोटें आई हैं। परिजन उसे तुरंत SMS अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसका इलाज जारी है।
पतंग लूटते वक्त घायल हुआ हर्षित
दूसरी घटना में हर्षित नाम का बच्चा उस समय गंभीर रूप से घायल हो गया, जब वह पतंग लूटने के प्रयास में सीढ़ियों से गिर गया। हादसे में उसे भी गंभीर चोटें आई हैं। उसे भी SMS अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों घटनाओं ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चाइनीज मांझा बना सबसे बड़ा खतरा
मकर संक्रांति पर पतंगबाजी के दौरान चाइनीज मांझा एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ। झोटवाड़ा क्षेत्र में बस का इंतजार कर रहे राजेश के साथ दर्दनाक हादसा हो गया। जैसे ही वे बस में चढ़ने वाले थे, अचानक कहीं से आया चाइनीज मांझा उनके पैर में उलझ गया। मांझा तेजी से खिंचने के कारण उनका पैर बुरी तरह कट गया। उन्हें भी गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया।
SMS अस्पताल में पहुंचे 25 से ज्यादा घायल
सवाई मानसिंह अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में मकर संक्रांति के दिन अब तक करीब 25 घायल मरीज लाए जा चुके हैं। इनमें से कई लोगों के गले पर गहरे कट के निशान हैं, तो किसी की आंख और चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं। 9 साल की परी का पूरा चेहरा छिल गया है और आंख के पास भी गहरी चोट लगी है। कई मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
चोटें साधारण मांझे से नहीं: नर्सिंग इंचार्ज
ट्रॉमा आपातकाल के नर्सिंग इंचार्ज राजेश कुमार जागा ने बताया कि अस्पताल में लाए गए ज्यादातर घाव साधारण सूती मांझे से नहीं हो सकते। ये सभी चोटें चाइनीज मांझे से हुई प्रतीत होती हैं। उन्होंने बताया कि अब तक पांच बच्चे गिरने से घायल होकर अस्पताल पहुंचे हैं और लगातार गंभीर केस सामने आ रहे हैं।
खुशियों का पर्व बना पीड़ा का कारण
मकर संक्रांति को खुशियों, उत्साह और आपसी मेलजोल का पर्व माना जाता है, लेकिन लापरवाही और नियमों की अनदेखी के कारण यह त्योहार कई परिवारों के लिए दुख और वेदना का कारण बन गया। पतंगबाजी के दौरान सुरक्षा उपायों की अनदेखी, छतों पर रेलिंग का अभाव और प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का उपयोग इन हादसों की बड़ी वजह बन रहा है।
सावधानी ही है एकमात्र उपाय
विशेषज्ञों और चिकित्सकों का कहना है कि पतंगबाजी करते समय सुरक्षित स्थान का चयन, बच्चों की निगरानी और चाइनीज मांझे से दूरी ही ऐसे हादसों को रोक सकती है। प्रशासन की ओर से भी लगातार अपील की जा रही है कि लोग सुरक्षित तरीके से पतंगबाजी करें, ताकि खुशियों का यह पर्व किसी के लिए दर्दनाक याद न बन जाए।


