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मेवाड़ राजपरिवार संपत्ति विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट में होगा फैसला

मेवाड़ राजपरिवार संपत्ति विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट में होगा फैसला

उदयपुर के पूर्व मेवाड़ राजपरिवार से जुड़ा बहुचर्चित संपत्ति विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की संपत्तियों के उत्तराधिकार को लेकर उनके बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और बेटी पद्मजा कुमारी परमार के बीच चल रही कानूनी लड़ाई अब दिल्ली हाईकोर्ट में सुनी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सभी संबंधित मामलों को एक ही अदालत में स्थानांतरित किया गया है, जिससे अब इस लंबे विवाद पर एक साथ सुनवाई संभव हो सकेगी।

सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और पद्मजा कुमारी परमार द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ दायर किए गए वसीयतनामा से जुड़े मामलों की संक्षिप्त सुनवाई की। कोर्ट ने लक्ष्यराज सिंह की ओर से पेश वकील को निर्देश दिए कि वे दिल्ली हाईकोर्ट के नियमों के अनुसार पक्षकारों की नई सूची, यानी फ्रेश मेमो ऑफ पार्टीज, दाखिल करें। इसके साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 20 जनवरी तय की है।

क्या है मेवाड़ राजपरिवार का संपत्ति विवाद

यह विवाद उदयपुर के ऐतिहासिक मेवाड़ राजघराने की संपत्तियों के स्वामित्व और प्रशासनिक नियंत्रण से जुड़ा हुआ है। बताया गया है कि अरविंद सिंह मेवाड़ ने फरवरी 2025 में एक वसीयत तैयार की थी। इस वसीयत में उन्होंने अपनी स्व-अर्जित संपत्तियों का एकमात्र उत्तराधिकारी अपने बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को घोषित किया था।

अरविंद सिंह मेवाड़ के निधन के बाद लक्ष्यराज सिंह ने इसी वसीयत के आधार पर संपत्तियों के प्रशासन और नियंत्रण के लिए राजस्थान हाईकोर्ट में लेटर्स ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन की मांग की। उनका तर्क था कि वसीयत पूरी तरह वैध है और संपत्तियों पर उनका कानूनी अधिकार बनता है।

पद्मजा कुमारी ने वसीयत को बताया अवैध

दूसरी ओर, उनकी बहन पद्मजा कुमारी परमार ने इस वसीयत को अवैध बताते हुए इसे बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। पद्मजा कुमारी का कहना है कि वसीयत में कई कानूनी खामियां हैं और इसे सही नहीं माना जा सकता। इसी कारण उन्होंने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अलग अदालत का रुख किया।

जब यह मामला अलग-अलग हाईकोर्ट्स में चलने लगा, तो दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर पिटीशन दायर की। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में आदेश दिया कि सभी संबंधित मामलों को एक ही अदालत में सुना जाना चाहिए, ताकि परस्पर विरोधी फैसलों की संभावना न रहे।

अब दिल्ली हाईकोर्ट में होगी एक साथ सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत अब राजस्थान हाईकोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित सभी मामले दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिए गए हैं। इससे यह साफ हो गया है कि अब मेवाड़ राजपरिवार के इस संपत्ति विवाद का फैसला दिल्ली हाईकोर्ट ही करेगा।

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