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मनरेगा नए कानून के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा आंदोलन, 45 दिवसीय संघर्ष शुरू

मनरेगा नए कानून के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा आंदोलन, 45 दिवसीय संघर्ष शुरू

शोभना शर्मा।  ‘सेव अरावली’ अभियान के बाद अब कांग्रेस ने मनरेगा के नए कानून के खिलाफ राजस्थान में बड़े और संगठित आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली है। प्रदेश में मनरेगा से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं, वहीं पार्टी ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर ले जाते हुए 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी आंदोलन का भी आगाज कर दिया है। कांग्रेस नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि जब तक मनरेगा के नए कानून को वापस नहीं लिया जाता, तब तक यह संघर्ष लगातार जारी रहेगा।

कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए मनरेगा के नए कानून में ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी को कमजोर करते हैं। पार्टी का कहना है कि मनरेगा गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण परिवारों के लिए जीवनरेखा जैसी योजना रही है, लेकिन नए कानून से इस योजना का मूल उद्देश्य ही खतरे में पड़ गया है।

आंदोलन को धार देने के लिए को-ऑर्डिनेशन कमेटी गठित

राजस्थान में आंदोलन को प्रभावी, संगठित और व्यापक बनाने के लिए कांग्रेस ने एक को-ऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया है। वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सीपी जोशी को इस कमेटी का कन्वीनर नियुक्त किया गया है। पार्टी के अनुसार, सीपी जोशी के अनुभव और संगठनात्मक क्षमता से आंदोलन को जमीनी स्तर तक मजबूती मिलेगी।

इस कमेटी में मुरारी मीणा, उम्मेदाराम बेनीवाल, अशोक चांदना, रोहित बोहरा, गणेश घोघरा, हाकम अली खान, बाबूलाल नागर, डूंगरराम गेदर और वैभव गहलोत को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यह कमेटी पूरे प्रदेश में आंदोलन की रणनीति तय करेगी, जिलों के बीच समन्वय स्थापित करेगी और धरना-प्रदर्शनों से लेकर बड़े आयोजनों तक की रूपरेखा तैयार करेगी।

जयपुर में उपवास, शांतिपूर्ण तरीके से विरोध

मनरेगा कानून के विरोध की इसी कड़ी में रविवार को जयपुर के शहीद स्मारक पर कांग्रेस ने शांतिपूर्ण उपवास कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कई घंटों तक उपवास पर बैठे और बिना किसी उग्र प्रदर्शन के अपना विरोध दर्ज कराया। यह कार्यक्रम जयपुर शहर, जयपुर देहात पूर्व और जयपुर देहात पश्चिम जिला कांग्रेस कमेटियों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

उपवास के दौरान मंच से किसी प्रकार की भाषणबाजी नहीं की गई। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रामधुनी के साथ शांतिपूर्ण माहौल में विरोध प्रकट किया। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीके से चलाया जाएगा, ताकि सरकार तक जनता की आवाज मजबूती से पहुंच सके।

कांग्रेस के बड़े नेता रहे मौजूद

शहीद स्मारक पर हुए इस उपवास कार्यक्रम में कांग्रेस के कई बड़े नेता मौजूद रहे। पार्टी प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कार्यक्रम में शिरकत की। नेताओं की मौजूदगी को आंदोलन के प्रति पार्टी की गंभीरता के रूप में देखा जा रहा है।

नेताओं ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मनरेगा से जुड़े मुद्दों को गांव-गांव तक पहुंचाएं और मजदूरों, किसानों तथा ग्रामीण परिवारों को इस कानून के संभावित प्रभावों के बारे में जागरूक करें। कांग्रेस का मानना है कि जब तक जनता को सही जानकारी नहीं मिलेगी, तब तक इस तरह के कानूनों के खिलाफ मजबूत जनआंदोलन खड़ा करना मुश्किल होगा।

केंद्र सरकार पर तीखा हमला

मीडिया से बातचीत में कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा के नए कानून में ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनसे मजदूरों के रोजगार पर सीधा असर पड़ेगा। उनका कहना था कि रोजगार के दिनों में कटौती, भुगतान प्रणाली में बदलाव और नियमों की सख्ती से गरीब मजदूरों को नुकसान होगा।

रंधावा ने कहा कि कांग्रेस गरीब, किसान और मजदूर विरोधी किसी भी नीति को स्वीकार नहीं करेगी। पार्टी सड़क से लेकर सदन तक इस मुद्दे को उठाएगी और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

सड़क से सदन तक संघर्ष का ऐलान

कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन केवल धरना-प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी विधानसभा, संसद और जनआंदोलनों के माध्यम से मनरेगा के नए कानून का विरोध करेगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की आर्थिक सुरक्षा का आधार है।

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