मनीषा शर्मा। कोटा में भारत विकास परिषद, कोटा महानगर की ओर से स्वामी विवेकानंद की 163वीं जन्मजयंती के अवसर पर भव्य सेवा संगम समारोह का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य समाज में सेवा, राष्ट्रभक्ति और युवाओं में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह के दौरान सामाजिक सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली 31 संस्थाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, युवा और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
राज्यपाल ने इजराइल की देशभक्ति का दिया उदाहरण
अपने संबोधन में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने राष्ट्रभक्ति और अनुशासन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने इजराइल का उदाहरण देते हुए कहा कि यह देश लगभग दो हजार वर्षों तक भटकता रहा। लंबे समय तक उनके पास न तो अपनी जमीन थी और न ही कोई राष्ट्र। भारत की आजादी के एक वर्ष बाद ही इजराइल स्वतंत्र हुआ, लेकिन इसके बावजूद वहां के नागरिकों में राष्ट्र के प्रति श्रद्धा और भक्ति अत्यंत प्रबल है।
राज्यपाल ने बताया कि इजराइल में सभी युवाओं के लिए सैन्य प्रशिक्षण अनिवार्य है। वहां लड़कों को 12वीं के बाद तीन साल और लड़कियों को ढाई साल तक मिलिट्री ट्रेनिंग लेनी होती है। यदि कोई यह प्रशिक्षण नहीं लेता, तो उसे आगे की पढ़ाई में प्रवेश तक नहीं मिलता। इस सख्त व्यवस्था के बावजूद वहां के लोग इसे गर्व के साथ स्वीकार करते हैं, क्योंकि यह उनके राष्ट्र की सुरक्षा और मजबूती से जुड़ा हुआ है।
राष्ट्रनिष्ठा से मजबूत हुआ इजराइल
राज्यपाल बागड़े ने कहा कि इजराइल के आसपास कई देश हैं, लेकिन इसके बावजूद इजराइल कभी भयभीत नहीं होता। वहां की सेना समय आने पर बेहद कम समय में कार्रवाई कर वापस लौट आती है। उन्होंने कहा कि कई बार इजराइली सेना सिर्फ सात मिनट में हमला कर लक्ष्य हासिल कर लेती है और लौट आती है। यह सब वहां के नागरिकों की देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रनिष्ठा का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि जब किसी देश के नागरिक राष्ट्र को सर्वोपरि मानते हैं, तब वह राष्ट्र हर परिस्थिति में मजबूत बनता है। इजराइल इसका जीवंत उदाहरण है।
अग्निवीर योजना पर विरोध को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
अपने संबोधन में राज्यपाल ने भारत में अग्निवीर योजना को लेकर हुए विरोध पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हमारे देश में अग्निवीर योजना सेना से जुड़ी हुई है, किसी मंदिर या धार्मिक संस्था से नहीं निकली है। इस योजना को लागू करने से पहले गहन अध्ययन और कई सुझावों के बाद निर्णय लिया गया था। राज्यपाल ने कहा कि अग्निवीर योजना का उद्देश्य यह है कि हर गांव से 5 से 10 ऐसे युवा निकलें, जो सेना में प्रशिक्षण लेकर अनुशासन, देशभक्ति और नेतृत्व का गुण सीखें। इससे गांवों में सकारात्मक बदलाव आएगा। साथ ही चार साल की सेवा के बाद युवाओं को करीब 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी मिलेगी, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद इस योजना का विरोध होना राष्ट्रनिष्ठा के अनुरूप नहीं कहा जा सकता। देश की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़े फैसलों में सकारात्मक सोच और सहयोग की जरूरत होती है।
सेवा और विचारों का संगम बना समारोह
सेवा संगम समारोह में वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा युवाओं को राष्ट्र निर्माण की ताकत बताया। विवेकानंद का जीवन सेवा, आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक रहा है। कार्यक्रम में सम्मानित संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और समाज सेवा के क्षेत्र में आगे भी कार्य करने का संकल्प लिया। भारत विकास परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करते हैं।


